Showing posts with label nida fazli. Show all posts
Showing posts with label nida fazli. Show all posts

Hosh walon ko Khabar Kya

होश वालों को खबर क्या, बेखुदी क्या चीज़ है 
इश्क़ कीजे, फिर समझिये, ज़िन्दगी क्या चीज़ है 

उनसे नज़रें क्या मिलीं, रोशन फ़िज़ाएं हो गईं 
आज जाना, प्यार की जादूगरी क्या चीज़ है 

खुलती जुल्फों ने सिखाई, मौसमों को शायरी 
झुकती आँखों ने बताया, मैकशी क्या चीज़ है 

हम लबों से कह न पाए, उनसे हाल-ए-दिल कभी 
और वो समझे नहीं ये, ख़ामोशी क्या चीज़ है 

                                 "  निदा फ़ाज़ली "       

Nida Fazli : Superb Poetry

कुछ तबियत ही मिली थी ऐसी, चैन से जीने की सूरत ना हुई 
जिसको चाहा, उसे अपना न सके, जो मिला उससे मुहब्बत न हुई 

जिससे जब तक मिले, दिल ही से मिले, दिल जो बदला तो फ़साना बदला 
रस्में दुनिया की निभाने के लिए, हमसे  रिश्तों की तिज़ारत न हुई 

वक़्त रूठा रहा बच्चे की तरह, राह में कोई खिलौना ना मिला 
दोस्ती भी तो निभाई ना गई, दुश्मनी में भी अदावत न हुई 

दूर से था वो कई चेहरों में, पास से कोई वैसा ना लगा 
बेवफाई भी था उसी का चलन फिर किसी से भी शिकायत ना हुई 

तिज़ारत : व्यापार 
अदावत : निभाना 

Wo Ladki : Nida Fazli

वो शोख शोख नज़र सांवली सी एक लड़की
जो रोज़ मेरी गली से गुज़र के जाती है
सुना है
वो किसी लड़के से प्यार करती है
बहार हो के, तलाश-ए-बहार करती है
न कोई मेल न कोई लगाव है लेकिन न जाने क्यूँ
बस उसी वक़्त जब वो आती है
कुछ इंतिज़ार की आदत सी हो गई है
मुझे
एक अजनबी की ज़रूरत हो गई है मुझे
मेरे बरांडे के आगे यह फूस का छप्पर
गली के मोड पे खडा हुआ सा
एक पत्थर
वो एक झुकती हुई बदनुमा सी नीम की शाख
और उस पे जंगली कबूतर के घोंसले का निशाँ
यह सारी चीजें कि जैसे मुझी में शामिल हैं
मेरे दुखों में मेरी हर खुशी में शामिल हैं
मैं चाहता हूँ कि वो भी यूं ही गुज़रती रहे
अदा-ओ-नाज़ से लड़के को प्यार करती रहे

Album : The Voice From Beyond

दर्द हल्का है, साँस भारी है
जिये जाने की रस्म जारी है

आप के बाद हर घड़ी हमने
आप के साथ ही गुज़ारी है

रात को चाँदनी तो ओढ़ा दो 
दिन की चादर अभी उतारी है 

कल का हर वाक़या तुम्हारा था 
आज की दास्ताँ हमारी है 

                             " गुलज़ार "

**************************************************************************


आशियाने की बात करते हो
किस ज़माने की बात करते हो

सारी दुनिया के रंज-ओ-ग़म  दे कर
मुस्कुराने की बात करते हो

हादसा था गुज़र गया होगा
किसके जाने की बात करते हो

हम को अपनी ख़बर नहीं कुछ भी  
तुम ज़माने की बात करते हो

हमने अपनों से ज़ख़्म खाये हैं 
तुम तो ग़ैरों की बात करते हो 

                              " जावेद कुरैशी "

*************************************************************************

ख़ुदा के वास्ते अपना हिसाब रहने दो
सुबह तलक़ मेरे आगे शराब रहने दो

ये क्या के ख़ुद हुए जा रहे हो पागल से
ज़रा सी देर तो रुख़ पे नक़ाब रहने दो

ये आईना है इसे तोड़ने से क्या हासिल
ख़ुद अपने वास्ते अपना जवाब रहने दो

हमें भी अपने ज़रा और पास आने दो
हमें भी और ज़रा सा ख़राब रहने दो

                                      " सईद राही "

*************************************************************************

रस्म-ए-उल्फ़त सिखा गया कोई
दिल की दुनिया पे छा गया कोई

ता क़यामत किसी तरह न बुझे
आग ऐसी लगा गया कोई

दिल की दुनिया उजाड़ सी क्यूँ है
क्या यहाँ से चला गया कोई

वक़्त-ए-रुख़सत गले लगा कर 'दाग़'
हँसते हँसते रुला गया कोई

                          " दाग़ देहलवी "

वक़्त-ए-रुख़सत : विदाई के वक़्त 

***********************************************************************

एक तेरे क़रीब आने से
दूर हम हो गए ज़माने से

जाने क्यों बिजलियों को रंजिश है
सिर्फ़ मेरे ही आशियाने से

आग दिल की सुलगती रहने दो
और भड़केगी ये बुझाने से 

इश्क़ ही एक राज़ है ऐसा
फ़ाश होता है जो छुपाने से

***********************************************************************

धड़कन धड़कन धड़क रहा है बस इक तेरो नाम
पंछी पंछी चहक रहा है बस इक तेरो नाम

नन्हों की भोली बातों में उजली उजली धूप
गुंचा गुंचा चटक रहा है बस इक तेरो नाम

अम्बर सोना, धरती चाँदी, माटी हीरा मोती
बाहर भीतर चमक रहा है बस इक तेरो नाम

जमुना जी के तट पर गूंजे तेरे नाम की मुरली
गंगा जी में झलक रहा है बस इक तेरो नाम


                                " निदा फ़ाज़ली "

***********************************************************************









Ghazal of Nida Fazli

बात कम कीजे, जहानत को छिपाते रहिये 
अजनबी शहर है, दोस्त बनाते रहिये 

दुश्मन लाख सही, ख़त्म न कीजे रिश्ता 
दिल मिले ना मिले, हाथ मिलाते रहिये 

ग़म है आवारा, अकेले में भटक जाता है 
जिस जगह भी रहिये, मिलते मिलाते रहिये 

जाने कब चाँद बिखर जाए जंगल में 
घर की चौखट पे कोई दीया जलाते रहिये 




RIP Nida Fazli Saheb..

आज के दौर के महान शायर निदा फ़ाज़ली साहब की मौत।  उनकी रचनाओं में सूर, मीरा, कबीर, रहीम इत्यादि दिग्गजों का प्रभाव रहा । वो इंसानी रूह के शायर थे। रोमांस, विरह, प्रकृति इत्यादि के अलावा उन्होंने इंसानी जज़्बातों को बेहद बारीकी से पकड़ा।  शायरी में गहराई के मामले में शायद वो उच्चतम स्तर पर थे।  उनकी कुछ ग़ज़ल वापस आपके लिए यहाँ रख रहा हूँ।  पढ़ें और जानिए इस महान शायर के महान लेखन के बारे में।

album : insight


अपनी मर्ज़ी से कहाँ अपने सफर के हम है 
रुख़ हवाओं का जिधर का है उधर के हम हैं 

पहले हर चीज़ थी अपनी मगर अब लगता है 
अपने ही घर में किसी दूसरे घर के हम हैं 

वक़्त के साथ है मिट्टी का सफर सदियों से 
किसको मालूम कहाँ के है किधर के हम हैं 

चलते रहते हैं कि चलना है मुसाफिर का नसीब 

सोचते रहते हैं किस राहगुजर के हम हैं 

**************************************************************************

album : love is blind

तुम ये कैसे जुदा हो गये 
हर तरफ हर जगह हो गये 

अपना चेहरा न बदला गया 
आईने से ख़फ़ा हो गये 

जाने वाले गए भी कहाँ 
चाँद सूरज घटा हो गये 

बेवफ़ा तो न वो थे न हम 
यूँ हुआ बस जुदा हो गये 

आदमी बनना आसां न था 

शेख जी आरसा हो गये 

**************************************************************************

album : sajda

हर तरफ हर जगह बेशुमार आदमी
फिर भी तन्हाइयों का शिकार आदमी 

सुबह से शाम तक बोझ ढोता हुआ 
अपनी ही लाश का खुद मज़ार आदमी 

हर तरफ भागते दौड़ते रास्ते 
हर तरफ आदमी का शिकार आदमी 

रोज जीता हुआ रोज मरता हुआ 
हर नये दिन नया इंतज़ार आदमी 

ज़िन्दगी का मुकद्दर सफर दर सफर 
आखरी सांस तक बेकरार आदमी 

मज़ार : कब्र 

***********************************************************************


धूप में निकलो घटाओं में नहा कर देखो
ज़िंदगी क्या है किताबों को हटा कर देखो
क्या ज़रूरी है उसे जिस्म बनाकर देखो
अपने घर के दरोदीवार सजा कर देखो

वो मिले या न मिले हाथ बढ़ा कर देखो

वो सितारा है चमकने दो यूँ ही आँखों में

पत्थरों में भी ज़ुबां होती है दिल होते हैं
फ़ासला नज़रों का धोखा भी तो हो सकता है

                                                       
*************************************************************************


जो भी भला बुरा है अल्लाह जानता है 
बन्दे के दिल में क्या है, अल्लाह जानता है 

ये फर्श-ओ-अर्श क्या है अल्लाह जानता है
पर्दों में क्या छुपा है, अल्लाह जानता है

जाकर जहाँ से कोई वापस नहीं है आता 
वो कौनसी जगह है, अल्लाह जानता है

नेकी-बदिे को अपने कितना ही तू छुपा ले 
अल्लाह को पता है अल्लाह जानता है

ये धूप-छाँव देखो, ये सुबह शाम देखो 
सब क्यूँ ये हो रहा है, अल्लाह जानता है

किस्मत के नाम को तो सब जानते हैं लेकिन 
किस्मत में क्या लिखा है, अल्लाह जानता है

***********************************************

Album : Muntazir


यूं तो गुजर रहा है हर इक पल ख़ुशी के साथ 
फिर भी कोई कमी सी है क्यूँ ज़िन्दगी के साथ 

रिश्ते वफायें दोस्ती सब कुछ तो पास है 
क्या बात है पता नही दिल क्यों उदास है 
हर लम्हा है हसीन नई दिलकशी के साथ 
फिर भी कोई कमी सी है क्यूँ ज़िन्दगी के साथ

चाहत भी है सुकून भी है दिलबरी भी है 
आँखों में ख्वाब भी है लबों पर हंसी भी है 
दिल को नहीं है कोई शिकायत किसी के साथ 
फिर भी कोई कमी सी है क्यूँ ज़िन्दगी के साथ

सोचा था जैसा वैसा ही जीवन तो है मगर 
अब और किस तलाश में बेचैन है नज़र 
कुदरत भी मेहरबान है दरियादिली के साथ 
फिर भी कोई कमी सी है क्यूँ ज़िन्दगी के साथ

                                                    
                                                                      
*********************************************************************************

बेनाम सा ये दर्द ठहर क्यूँ नहीं जाता 
जो बीत गया है वो गुजर क्यूँ नहीं जाता 

सब कुछ तो है क्या ढूंढती रहती हैं निगाहें 
क्या बात है मैं वक़्त पे घर क्यूँ नहीं जाता 

वो एक चेहरा तो नहीं सारे जहाँ में 
जो दूर है वो दिल से उतर क्यूँ नहीं जाता 

मैं अपनी ही उलझी हुई राहों का तमाशा 
जाते हैं जिधर सब मैं उधर क्यूँ नहीं जाता 

वो नाम जो बरसों से न चेहरा न बदन है 
वो ख्वाब अगर है तो बिखर क्यूँ नहीं जाता 

*****************************************************************

album : hope

अब ख़ुशी है न कोई दर्द रुलाने वाला 
हमने अपना लिया हर रंग ज़माने वाला 

उसको रुख़सत तो किया था मुझे मालूम न था 

सारा घर ले गया घर छोड़ के जाने वाला 

इक मुसाफिर के सफर जैसी है सबकी दुनिया 

कोई जल्दी में कोई देर से जाने वाला 

एक बे-चेहरा सी उम्मीद है चेहरा चेहरा 

जिस तरफ देखिये आने को है आने वाला 
                                                         

**************************************************************************

तन्हा-तन्हा हम रो लेंगे महफ़िल-महफ़िल गायेंगे
जब तक आंसू साथ रहेंगे तब तक गीत सुनायेंगे

तुम जो सोचो वो तुम जानो हम तो अपनी कहते हैं
देर न करना घर जाने में वरना घर खो जायेंगे

बच्चों के छोटे हाथों को चाँद सितारें छूने दो
चार किताबे पढ़ कर वो भी हम जैसे हो जायेंगे

किन राहों से दूर है मंजिल कौन सा रास्ता आसां है
हम जब थक कर रुक जायेंगे, औरों को समझायेंगे

अच्छी सूरत वाले सारे पत्थर दिल हों मुमकिन है
हम तो उस दिन राय देंगे जिस दिन धोखा खायेंगे



                                                                  


                                         







Nida Fazli at his best

दुनिया जिसे कहते हैं जादू का खिलौना है
मिल जाये तो मिट्टी है खो जाये तो सोना है

अच्छा-सा कोई मौसम तन्हा-सा कोई आलम
हर वक़्त का रोना तो बेकार का रोना है

बरसात का बादल तो दीवाना है क्या जाने
किस राह से बचना है किस छत को भिगोना है

ग़म हो कि ख़ुशी दोनों कुछ देर के साथी हैं
फिर रस्ता ही रस्ता है हँसना है न रोना है

ये वक्त जो तेरा है, ये वक्त जो मेरा
हर गाम पर पहरा है, फिर भी इसे खोना है

आवारा मिज़ाजी ने फैला दिया आंगन को
आकाश की चादर है धरती का बिछौना है  

Nida Fazli & Jagjit Singh : Sarfarosh

होश वालों को ख़बर क्या बेख़ुदी क्या चीज़ है
इश्क़ कीजे फिर समझिए ज़िन्दगी क्या चीज़ है

उन से नज़रें क्या मिली रोशन फिजाएँ हो गईं
आज जाना प्यार की जादूगरी क्या चीज़ है

ख़ुलती ज़ुल्फ़ों ने सिखाई मौसमों को शायरी
झुकती आँखों ने बताया मयकशी क्या चीज़ है

हम लबों से कह न पाये उन से हाल-ए-दिल कभी
और वो समझे नहीं ये ख़ामोशी क्या चीज़ है 


Chausar : Jagjit Singh

हर घड़ी खुद से उलझना है मुक़द्दर मेरा
मैं ही कश्ती हूँ मुझ ही में है समंदर मेरा

एक से हो गए मौसम हो, कि चेहरे सारे
मेरी आँखों से कहीं खो गया मंजर मेरा

किससे पूंछू कि कहाँ गुम हूँ कई बरसों से
हर जगह ढूंढता फिरता है मुझे घर मेरा

मुद्दतें हो गई इक ख्वाब सुनहरा देखे
जागता रहता है हर नींद में बिस्तर मेरा

                                                                " Nida Fazli "

*******************************************************************************

आईना देख के बोले, ये संवरने वाले,
अब तो बे-मौत मरेंगे, मेरे  मरने वाले

देख के तुमको होश में आना भूल गए
याद रहे तुम और ज़माना भूल गए
जब सामने तुम आ जाते हो
क्या जाने क्या हो जाता है
कुछ मिल जाता है, कुछ खो जाता है
क्या जाने क्या हो जाता है

चाहा था ये कहेंगे, सोचा था वो कहेंगे
आये वो सामने तो कुछ भी न कह सके
बस देखा किये उन्हें हम

देख कर तुमको यकीं होता है
कोई इतना भी हसीं होता है
देख पाते हैं कहाँ हम तुमको
दिल कहीं होश कहीं होता है

जब सामने तुम आ जाते हो
क्या जाने क्या हो जाता है
कुछ मिल जाता है, कुछ खो जाता है
क्या जाने क्या हो जाता है

आकर चले न जाना ऐसे नहीं सताना
देकर हंसी लबों को आँखों को नहीं रुलाना
देना न बेक़रारी दिल का क़रार बनके
यादों में खो न जाना इंतज़ार बनके

भूल कर तुमको न जी पाएंगे
साथ तुम होगी जहाँ जायेंगे
हम कोई वक़्त नहीं है हमदम
जब बुलाओगे चले आएंगे

जब सामने तुम आ जाते हो
क्या जाने क्या हो जाता है
कुछ मिल जाता है, कुछ खो जाता है
क्या जाने क्या हो जाता है

                                            " Nida Fazli "

Voice : Asha Bhonsle & Jagjit Singh

*******************************************************************************

कहीं कहीं से हर चेहरा तुम जैसा लगता है 
तुमको भूल न पाएंगे हम ऐसा लगता है 

ऐसा भी इक रंग है जो करता है बातें भी 
जो भी इसको पहन ले वो अपना सा लगता है 
तुमको भूल न पाएंगे हम ऐसा लगता है

और तो सब कुछ ठीक है लेकिन 
कभी कभी यूँ ही चलता फिरता शहर 
अचानक तनहा लगता है 
तुमको भूल न पाएंगे हम ऐसा लगता है

अब भी यूँ मिलते हैं हमसे फूल चमेली के 
जैसे इनसे अपना कोई रिश्ता लगता है 
तुमको भूल न पाएंगे हम ऐसा लगता है

                                                        " Nawaz Deobandi "

Voices : Lata ji, Asha ji, Jagjit ji

*******************************************************************************

बात निकलेगी तो फिर दूर तलक जाएगी 
लोग बेवजह उदासी का सबब पूछेंगे 
ये भी पूछेंगे कि तुम इतनी परेशां क्यूँ हो 

उँगलियाँ उठेगी सूखे हुए बालों की तरफ 
इक नज़र देखेंगे गुजरे हुए सालों की तरफ 
चूड़ियों पर भी कई तंज़ किये जायेंगे 
कांपते हाथों पे भी फिकरे कसे जायेंगे 
लोग ज़ालिम है हर एक बात का ताना देंगे 
बातों बातों में मेरा जिक्र भी ले आएंगे 
उनकी बातों का जरा सा भी असर मत लेना 
वर्ना चेहरे के तास्सुर से समझ जायेंगे 
चाहे कुछ भी हो सवालात न करना उनसे - 2 
मेरे बारे में कोई बात न करना उनसे 
बात निकलेगी तो फिर दूर तलक जाएगी 

                                                         " Kafir Aazer "

*******************************************************************************
















Jagjit Singh : Album Hope

ख़ुदा हमको ऐसी खुदाई न दे 
कि अपने सिवा कुछ दिखाई न दे 

ख़तावार समझेगी दुनिया तुझे 
अब इतनी ज्यादा सफाई न दे 

हंसो आज इतना कि इस शोर में 
सदा सिसकियों की सुनाई न दे 

अभी तो बदन में लहू है बहुत 
कलम छीन ले रोशनाई न दे 

ख़ुदा ऐसे अहसास का नाम है 
रहे सामने और दिखाई न दे 
                                              " Dr. Bashir Badr "

*********************************************************************************

ना शिवाले ना कलीसा ना हरम झूठे हैं 
बस यही सच है कि तुम झूठे हो हम झूठे हैं 

हमने देखा ही नहीं बोलते उनको अब तक 
कौन कहता है कि पत्थर के सनम झूठे हैं 

उनसे मिलिए तो ख़ुशी होती है उनसे मिलकर 
शहर के दूसरे लोगों से जो कम झूठे हैं 

कुछ तो है बात जो तहरीरों में तासीर नहीं 
झूठे फ़नकार नहीं है तो कलम झूठे हैं 
                                                      " Ayaz Jhansvi "

*********************************************************************************

क्या खबर थी इस तरह से वो जुदा हो जायेगा 
ख़्वाब में भी उसका मिलना ख़्वाब सा हो जायेगा 

ज़िन्दगी की क़ैद-ए-ग़म से क्या निकालोगे उसे 
मौत जब आ जाएगी तो खुद रिहा हो जायेगा 

दोस्त बनकर उसको चाहा ये कभी सोचा न था 
दोस्ती ही दोस्ती में वो ख़ुदा हो जायेगा 

उसका जलवा होगा क्या जिसका कि पर्दा नूर है 
जो भी उसको देख लेगा वो फ़िदा हो जायेगा 
                                                                 " Rustam Sehgal Wafa "

*********************************************************************************

अब ख़ुशी है न कोई दर्द रुलाने वाला 
हमने अपना लिया हर रंग ज़माने वाला 

उसको रुख़सत तो किया था मुझे मालूम न था 

सारा घर ले गया घर छोड़ के जाने वाला 

इक मुसाफिर के सफर जैसी है सबकी दुनिया 

कोई जल्दी में कोई देर से जाने वाला 

एक बे-चेहरा सी उम्मीद है चेहरा चेहरा 

जिस तरफ देखिये आने को है आने वाला 
                                                             " Nida Fazli "

*********************************************************************************

तन्हा-तन्हा हम रो लेंगे महफ़िल-महफ़िल गायेंगे
जब तक आंसू साथ रहेंगे तब तक गीत सुनायेंगे

तुम जो सोचो वो तुम जानो हम तो अपनी कहते हैं
देर न करना घर जाने में वरना घर खो जायेंगे

बच्चों के छोटे हाथों को चाँद सितारें छूने दो
चार किताबे पढ़ कर वो भी हम जैसे हो जायेंगे

किन राहों से दूर है मंजिल कौन सा रास्ता आसां है
हम जब थक कर रुक जायेंगे, औरों को समझायेंगे

अच्छी सूरत वाले सारे पत्थर दिल हों मुमकिन है
हम तो उस दिन राय देंगे जिस दिन धोखा खायेंगे
                                                                  " Nida Fazli "   

*********************************************************************************

देखा जो आईना तो मुझे सोचना पड़ा
ख़ुद से न मिल सका तो मुझे सोचना पड़ा

उस का जो ख़त मिला तो मुझे सोचना पड़ा
अपना सा वो लगा तो मुझे सोचना पड़ा

मुझ को था ये गुमाँ के मुझी में है इक अना
देखी तेरी अना तो मुझे सोचना पड़ा

दुनिया समझ रही थी के नाराज़ मुझसे है
लेकिन वो जब मिला तो मुझे सोचना पड़ा

सर को छुपाऊँ अपने कि पैरों को ढाँप लूँ
छोटी सी थी रिदा तो मुझे सोचना पड़ा

इक दिन वो मेरे ऐब गिनाने लगा ‘फ़राग़’
जब ख़ुद ही थक गया तो मुझे सोचना पड़ा

                                          ' फ़राग़ रोहवी '

अना = आत्मसम्मान
रिदा = घूँघट

***********************************************************************************

धूप है क्या और साया क्या है अब मालूम हुआ
ये सब खेल तमाशा क्या है अब मालूम हुआ

हँसते फूल का चेहरा देखूँ और भर आई आँख
अपने साथ ये क़िस्सा क्या है अब मालूम हुआ

हम बरसों के बाद भी उसको अब तक भूल न पाए
दिल से उसका रिश्ता क्या है अब मालूम हुआ

सहरा सहरा प्यासे भटके सारी उम्र जले
बादल का इक टुकड़ा क्या है अब मालूम हुआ
सहरा = रेगिस्तान

                                                      ' ज़फ़र गोरखपुरी '

**********************************************************************************

ऐसे हिज्र के मौसम कब कब आते हैं
तेरे अलावा याद हमें सब आते हैं

गती आँखों से भी देखो दुनिया को
ख़्वाबों का क्या है वो हर शब आते हैं

अब वो सफ़र की ताब नहीं बाक़ी वरना
हम को बुलावे दश्त से जब-तब आते हैं

काग़ज़ की कश्ती में दरिया पार किया
देखो हम को क्या-क्या करतब आते हैं

                                              ' शहरयार '

हिज्र = बिछोहजुदाई
ताब = शक्ति, सामर्थ्य
दश्त = जंगल

******************************************************************************************

कभी यूँ भी आ मेरी आँख में, कि मेरी नज़र को ख़बर न हो
मुझे एक रात नवाज़ दे, मगर उसके बाद सहर न हो

वो बड़ा रहीम-ओ-करीम है, मुझे ये सिफ़त भी अता करे
तुझे भूलने की दुआ करूँ तो दुआ में मेरी असर न हो

कभी दिन की धूप में झूम के, कभी शब के फूल को चूम के
यूँ ही साथ-साथ चले सदा, कभी ख़त्म अपना सफ़र न हो

मेरे पास मेरे हबीब आ, ज़रा और दिल के क़रीब आ
तुझे धड़कनों में बसा लूँ मैं, के बिछड़ने का कभी डर न हो

                                                ' बशीर बद्र '

सिफ़त  = गुण
अता = प्रदान

****************************************************************************************





हमारा हौसला बढ़ाने के लिए कृपया पोस्ट के नीचे अपनी - Average, Good या Excellent की रेटिंग अवश्य दें और हो सके तो कमेंट भी लिखें ।  धन्यवाद....






















Album : Muntazir

Muntazir means " waiting for someone/something " .

बहुत खूबसूरत है आँखें तुम्हारी
अगर हो इनायत ए जाने मुहब्बत
बना दीजिये इनको किस्मत हमारी

जो सबसे जुदा है वो अंदाज़ हो तुम
छुपा था जो दिल में वो ही राज़ हो तुम
तुम्हारी नज़ाकत बनी जब से चाहत
सुकून बन गई है हर इक बेक़रारी

न थे जब तलक तुम हमारी नज़र में
न था चाँद शब में न सूरज सहर में
तुम्हारी इजाजत तुम्हारी हुक़ूमत
ये सारा गगन है ये धरती है सारी

बहुत खूबसूरत है आँखें तुम्हारी
अगर हो इनायत ए जाने मुहब्बत
बना दीजिये इनको किस्मत हमारी  

                                              " Nida fazli "
                                                                                                       
*********************************************************************************

यूं तो गुजर रहा है हर इक पल ख़ुशी के साथ 
फिर भी कोई कमी सी है क्यूँ ज़िन्दगी के साथ 

रिश्ते वफायें दोस्ती सब कुछ तो पास है 
क्या बात है पता नही दिल क्यों उदास है 
हर लम्हा है हसीन नई दिलकशी के साथ 
फिर भी कोई कमी सी है क्यूँ ज़िन्दगी के साथ

चाहत भी है सुकून भी है दिलबरी भी है 
आँखों में ख्वाब भी है लबों पर हंसी भी है 
दिल को नहीं है कोई शिकायत किसी के साथ 
फिर भी कोई कमी सी है क्यूँ ज़िन्दगी के साथ

सोचा था जैसा वैसा ही जीवन तो है मगर 
अब और किस तलाश में बेचैन है नज़र 
कुदरत भी मेहरबान है दरियादिली के साथ 
फिर भी कोई कमी सी है क्यूँ ज़िन्दगी के साथ

                                                     " Nida Fazli "
                                                                      
*********************************************************************************

बेनाम सा ये दर्द ठहर क्यूँ नहीं जाता 
जो बीत गया है वो गुजर क्यूँ नहीं जाता 

सब कुछ तो है क्या ढूंढती रहती हैं निगाहें 
क्या बात है मैं वक़्त पे घर क्यूँ नहीं जाता 

वो एक चेहरा तो नहीं सारे जहाँ में 
जो दूर है वो दिल से उतर क्यूँ नहीं जाता 

मैं अपनी ही उलझी हुई राहों का तमाशा 
जाते हैं जिधर सब मैं उधर क्यूँ नहीं जाता 

वो नाम जो बरसों से न चेहरा न बदन है 
वो ख्वाब अगर है तो बिखर क्यूँ नहीं जाता 

                                          " Nida Fazli "

*********************************************************************************

रूख़ से पर्दा उठा दे जरा साक़िया 
बस अभी रंग-ए-महफ़िल बदल जायेगा 
है जो बेहोश वो होश में आएगा 
गिरने वाला है जो वो संभल जायेगा 

तुम तसल्ली न दो सिर्फ बैठे रहो 
वक़्त कुछ मेरे मरने का टल जायेगा 
क्या ये कम है मसीहा के होने ही से 
मौत का भी इरादा बदल जायेगा 

तीर की जान है दिल दिल की जान तीर है  
तीर को यूँ न खींचो कहा मान लो 
तीर खिंचा तो दिल भी निकल आएगा 
दिल जो निकला तो दम भी निकल जायेगा 

जिसके हंसने में रोने का अंदाज़ है 
खाक उड़ाने में फरियाद का राज है 
इसको छेड़ो न ' अनवर ' खुदा के लिए 
वर्ना बीमार का दम निकल जायेगा 
                                                        " Anwar Mirzapuri "

*******************************************************************************





हमारा हौसला बढ़ाने के लिए कृपया पोस्ट के नीचे अपनी - Average, Good या Excellent की रेटिंग अवश्य दें और हो सके तो कमेंट भी लिखें ।  धन्यवाद....

Love is Blind

कभी खामोश बैठोगे कभी कुछ गुनगुनाओगे
मैं उतना याद आउंगा मुझे जितना भुलाओगे  

कोई जब पूछ बैठेगा ख़ामोशी का सबब तुमसे
बहुत समझाना चाहोगे मगर समझा न पाओगे

कभी दुनिया मुकम्मल बनके आएगी निगाहों में
कभी मेरी कमी दुनिया की हर इक शय में पाओगे

कहीं पर भी रहे हम तुम मुहब्बत फिर मुहब्बत है
तुम्हे हम याद आयेंगे हमें तुम याद आओगे

                                               " नज़ीर बनारसी "

*********************************************************************************


आज हम बिछड़े हैं तो कितने रंगीले हो गये
मेरी आँखें सुर्ख़, तेरे हाथ पीले हो गये

कब की पत्थर हो चुकी थी मुंतज़िर आँखें मगर
छू के जब देखा तो मेरे हाथ गीले हो गये

जाने क्या अहसास साजे-हुस्न के तारों में है
जिनको छूते ही मेरे नगमे रसीले हो गये

अब कोई उम्मीद है ' शाहिद ' न कोई आरज़ू
आसरे टूटे तो जीने के वसीले हो गये 

                                     " Shahid Kabir "

*********************************************************************************

तुम ये कैसे जुदा हो गये 
हर तरफ हर जगह हो गये 

अपना चेहरा न बदला गया 
आईने से ख़फ़ा हो गये 

जाने वाले गए भी कहाँ 
चाँद सूरज घटा हो गये 

बेवफ़ा तो न वो थे न हम 
यूँ हुआ बस जुदा हो गये 

आदमी बनना आसां न था 
शेख जी आरसा हो गये 

                              " Nida Fazli "

*********************************************************************************

वो कौन है दुनिया में जिसे ग़म नहीं होता 
किस घर में ख़ुशी होती है मातम नहीं होता 

ऐसे भी है दुनिया में जिन्हे ग़म नहीं होता 
इक ग़म है हमारा जो कभी कम नहीं होता 

क्या सुरमा भरी आँखों से आंसू नहीं गिरते 
क्या मेहंदी लगी हाथों से मातम नहीं होता 

कुछ और भी होती है बिगड़ने की अदाएं  
बनने में संवरने में ये आलम नहीं होता 

                                                             " Raiz Khairabadi "


*********************************************************************************





हमारा हौसला बढ़ाने के लिए कृपया पोस्ट के नीचे अपनी - Average, Good या Excellent की रेटिंग अवश्य दें और हो सके तो कमेंट भी लिखें ।  धन्यवाद....