किस्मत में क्या लिखा है, अल्लाह जानता है
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Album : Muntazir
यूं तो गुजर रहा है हर इक पल ख़ुशी के साथ
फिर भी कोई कमी सी है क्यूँ ज़िन्दगी के साथ
रिश्ते वफायें दोस्ती सब कुछ तो पास है
क्या बात है पता नही दिल क्यों उदास है
हर लम्हा है हसीन नई दिलकशी के साथ
फिर भी कोई कमी सी है क्यूँ ज़िन्दगी के साथ
चाहत भी है सुकून भी है दिलबरी भी है
आँखों में ख्वाब भी है लबों पर हंसी भी है
दिल को नहीं है कोई शिकायत किसी के साथ
फिर भी कोई कमी सी है क्यूँ ज़िन्दगी के साथ
सोचा था जैसा वैसा ही जीवन तो है मगर
अब और किस तलाश में बेचैन है नज़र
कुदरत भी मेहरबान है दरियादिली के साथ
फिर भी कोई कमी सी है क्यूँ ज़िन्दगी के साथ
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बेनाम सा ये दर्द ठहर क्यूँ नहीं जाता
जो बीत गया है वो गुजर क्यूँ नहीं जाता
सब कुछ तो है क्या ढूंढती रहती हैं निगाहें
क्या बात है मैं वक़्त पे घर क्यूँ नहीं जाता
वो एक चेहरा तो नहीं सारे जहाँ में
जो दूर है वो दिल से उतर क्यूँ नहीं जाता
मैं अपनी ही उलझी हुई राहों का तमाशा
जाते हैं जिधर सब मैं उधर क्यूँ नहीं जाता
वो नाम जो बरसों से न चेहरा न बदन है
वो ख्वाब अगर है तो बिखर क्यूँ नहीं जाता
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album : hope
अब ख़ुशी है न कोई दर्द रुलाने वाला
हमने अपना लिया हर रंग ज़माने वाला
उसको रुख़सत तो किया था मुझे मालूम न था
सारा घर ले गया घर छोड़ के जाने वाला
इक मुसाफिर के सफर जैसी है सबकी दुनिया
कोई जल्दी में कोई देर से जाने वाला
एक बे-चेहरा सी उम्मीद है चेहरा चेहरा
जिस तरफ देखिये आने को है आने वाला
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तन्हा-तन्हा हम रो लेंगे महफ़िल-महफ़िल गायेंगे
जब तक आंसू साथ रहेंगे तब तक गीत सुनायेंगे
तुम जो सोचो वो तुम जानो हम तो अपनी कहते हैं
देर न करना घर जाने में वरना घर खो जायेंगे
बच्चों के छोटे हाथों को चाँद सितारें छूने दो
चार किताबे पढ़ कर वो भी हम जैसे हो जायेंगे
किन राहों से दूर है मंजिल कौन सा रास्ता आसां है
हम जब थक कर रुक जायेंगे, औरों को समझायेंगे
अच्छी सूरत वाले सारे पत्थर दिल हों मुमकिन है
हम तो उस दिन राय देंगे जिस दिन धोखा खायेंगे