Showing posts with label dr. madhusudan chobey. Show all posts
Showing posts with label dr. madhusudan chobey. Show all posts

कतरा कतरा जहान : मधुसूदन चौबे

कतरे कतरे से मिलकर समंदर महान बना है 
अक्षर अक्षर से मिलकर वेदों का ज्ञान बना है 

किसी का भी वजूद छोटा समझना है नासमझी 
भाप के कण कण से विशाल आसमान बना है        

खुद को तूफान के हिमायती समझने वालों सुनों
छोटी छोटी सांसों से तुम्हारा जीवनदान बना है

समंदर भूल गया कि एक कतरा था वो कभी
वो खारा हुआ क्योंकि उसमें अभिमान बना है

बरसों पोथियाँ चाटकर कचरा रहा वो ‘मधु’
केवल ढाई आखर पढ़कर कबीर विद्वान बना है 






डॉ.मधुसूदन चौबे : कर्म का उच्चारण हो

हाल ही में अतिलोकप्रिय सोशल साईट facebook पर मैंने एक ग्रुप join किया है ' मधु कवि की महफ़िल ' । इस ग्रुप के संचालक हैं मध्य-प्रदेश के कवि डॉ मधुसूदन चौबे। इस ग्रुप में आप अपनी कविता, ग़ज़ल, शेर कुछ भी डाल सकते हैं, अर्थात सब के लिए एक खुला मंच है। हाल ही में fb पर मधुजी ने एक के बाद एक पोस्ट दागी, जैसे कि सीमा पर मुस्तैद जवान दनादन गोलियां दागता है। फर्क ये है कि जवान दुश्मन के सामने गोलियां दागता है और चौबे जी समाज की बुराइयों और समाज में विलुप्त होती नैतिकता पर अपनी कविता दागते हैं। वो हमारे अंतर्मन को झकझोरते भी हैं। उनके शब्द जैसे हमें भीतर से जगाने के लिए आतुर हैं। सब जानते हैं कि मैं एक अच्छा श्रोता हूँ और पाठक भी। ये बात अलग है कि अपनी बात कहने के लिए शब्दों की सीमा होती है। अतः उनकी वजनदार रचनाओं पर अधिक बात न करते हुए एक कविता ही आपके सम्मुख रखता हूँ, जो मुझे बड़ी अच्छी लगी।

कोयले का हीरे में रूपांतरण हो जाता है 
मेहनतकश दुनिया में उदाहरण हो जाता है 

लंकाओं को ध्वस्त होते देर नहीं लगती गर 
हनुमानों की शक्ति का जागरण हो जाता है 

इंसा को इंसा होने का अहसास हो जाये तो 
रोम रोम से कर्म का उच्चारण हो जाता है

नमकहलाली का चस्का लगने का है असर 
श्रमपथ का अनुसरण आमरण हो जाता है 

अकड़ता है, झगड़ता है सबसे मगर ' मधु '
वतन के उन्नायकों का चारण हो जाता है