Album : The Voice From Beyond

दर्द हल्का है, साँस भारी है
जिये जाने की रस्म जारी है

आप के बाद हर घड़ी हमने
आप के साथ ही गुज़ारी है

रात को चाँदनी तो ओढ़ा दो 
दिन की चादर अभी उतारी है 

कल का हर वाक़या तुम्हारा था 
आज की दास्ताँ हमारी है 

                             " गुलज़ार "

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आशियाने की बात करते हो
किस ज़माने की बात करते हो

सारी दुनिया के रंज-ओ-ग़म  दे कर
मुस्कुराने की बात करते हो

हादसा था गुज़र गया होगा
किसके जाने की बात करते हो

हम को अपनी ख़बर नहीं कुछ भी  
तुम ज़माने की बात करते हो

हमने अपनों से ज़ख़्म खाये हैं 
तुम तो ग़ैरों की बात करते हो 

                              " जावेद कुरैशी "

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ख़ुदा के वास्ते अपना हिसाब रहने दो
सुबह तलक़ मेरे आगे शराब रहने दो

ये क्या के ख़ुद हुए जा रहे हो पागल से
ज़रा सी देर तो रुख़ पे नक़ाब रहने दो

ये आईना है इसे तोड़ने से क्या हासिल
ख़ुद अपने वास्ते अपना जवाब रहने दो

हमें भी अपने ज़रा और पास आने दो
हमें भी और ज़रा सा ख़राब रहने दो

                                      " सईद राही "

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रस्म-ए-उल्फ़त सिखा गया कोई
दिल की दुनिया पे छा गया कोई

ता क़यामत किसी तरह न बुझे
आग ऐसी लगा गया कोई

दिल की दुनिया उजाड़ सी क्यूँ है
क्या यहाँ से चला गया कोई

वक़्त-ए-रुख़सत गले लगा कर 'दाग़'
हँसते हँसते रुला गया कोई

                          " दाग़ देहलवी "

वक़्त-ए-रुख़सत : विदाई के वक़्त 

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एक तेरे क़रीब आने से
दूर हम हो गए ज़माने से

जाने क्यों बिजलियों को रंजिश है
सिर्फ़ मेरे ही आशियाने से

आग दिल की सुलगती रहने दो
और भड़केगी ये बुझाने से 

इश्क़ ही एक राज़ है ऐसा
फ़ाश होता है जो छुपाने से

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धड़कन धड़कन धड़क रहा है बस इक तेरो नाम
पंछी पंछी चहक रहा है बस इक तेरो नाम

नन्हों की भोली बातों में उजली उजली धूप
गुंचा गुंचा चटक रहा है बस इक तेरो नाम

अम्बर सोना, धरती चाँदी, माटी हीरा मोती
बाहर भीतर चमक रहा है बस इक तेरो नाम

जमुना जी के तट पर गूंजे तेरे नाम की मुरली
गंगा जी में झलक रहा है बस इक तेरो नाम


                                " निदा फ़ाज़ली "

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