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Jagjit Singh : Aaeena

घर से निकले थे हौसला करके 
लौट आये ख़ुदा ख़ुदा करके 

दर्दे दिल पाओगे वफ़ा करके 
हमने देखा है तजुर्बा करके 

ज़िन्दगी तो कभी नहीं आई 
मौत अाई जरा जरा करके 

लोग सुनते रहे दिमाग की बात 
हम चल दिल को रहनुमा करके 

किसने पाया सुकून दुनिया में 
ज़िंदगानी का सामना करके 

                          " rajesh reddy "

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तेरा चेहरा है आईने जैसा 
क्यूँ न देखूं है देखने जैसा 

तुम कहो तो मैं पूछ लूँ तुमसे 
है सवाल एक पूछने जैसा 

दोस्त मिल जायेंगे कई लेकिन 
ना मिलेगा कोई मेरे जैसा 

तुम अचानक मिले थे जब पहले 
पल नहीं है भूलने जैसा 

                                       " Payyam Sayyidi "

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परखना मत, परखने में कोई अपना नहीं रहता 
किसी भी आईने में देर तक चेहरा नहीं रहता 

बड़े लोगों से मिलने में हमेशा फ़ासला रखना 
जहाँ दरिया समंदर से मिला दरिया नहीं रहता 

तुम्हारा शहर तो बिलकुल नए अंदाज़ वाला है 
हमारे शहर में भी अब कोई हम सा नहीं रहता 

मोहब्बत एक खुशबू है हमेशा साथ चलती है 
कोई इंसान तन्हाई में तनहा नहीं रहता 

                                                               " Dr. Bashir Badr "

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उसकी बातें तो फूल हों जैसे 
बाकी बातें बबूल हों जैसे 

छोटी छोटी सी उसकी वो आँखें 
दो चमेली के फूल हों जैसे 

उसका हंसकर नज़र झुका लेना 
सारी शर्तें क़ुबूल हों जैसे 

कितनी दिलकश है उसकी ख़ामोशी 
सारी बातें फ़िज़ूल हों जैसे 

                                            " Ibrahim Ashq "

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फिर नज़र से पिला दीजिये 
होश मेरे उड़ा दीजिये 

छोड़िये दुश्मनी की रबिश 
अब ज़रा मुस्कुरा दीजिये 

बात अफ़साना बन जाएगी 
इस कदर मत हवा दीजिये 

आइये खुल के मिलिये गले 
सब तकल्लुफ हटा दीजिये 

कब से मुश्ताक़-ए-दीदार हूँ 
अब तो जलवा दिखा दीजिये 

                                                " Jaam Nasimi "

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अपना अपना रास्ता है कुछ नहीं 
क्या भला है क्या बुरा है कुछ नहीं 

जुस्तजू है इक मुसलसल जुस्तज़ू 
क्या कहीं कुछ खो गया है कुछ नहीं 

मोहर मेरे नाम की हर शय में है 
मेरे घर में मेरा क्या है कुछ नहीं

कहने वाले अपनी अपनी कह गए 
मुझसे पूछो क्या सुना है कुछ नहीं 

                                                  " Dr. Bashir Badr "

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मुस्कुरा कर मिला करो हमसे
कुछ कहा और सुना करो हमसे

बात करने से बात बढ़ती है
रोज़ बातें किया करो हमसे

दुश्मनी से मिलेगा क्या तुमको
दोस्त बनकर रहा करो हमसे

देख लेते है सात पर्दों में
यूँ ना पर्दा किया करो हमसे


                                        " इब्राहिम अश्क "


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jagjit singh : Album Desires

गुलशन की फ़क़त फूलों से नहीं काँटों से भी जीनत होती है
जीने के लिए इस दुनिया में ग़म की भी जरुरत होती है

ऐ वाइज़-ए-नादान करता है तू एक क़यामत का चर्चा
यहाँ रोज निगाहें मिलती हैं यहाँ रोज क़यामत होती है

वो पुर्सिश-ए-ग़म को आये हैं कुछ कह न सकूं चुप रह न सकूं
खामोश रहूँ तो मुश्किल है कह दू तो शिकायत होती है

करना ही पड़ेगा जब्त-ए-आलम पीने ही पड़ेंगे ये आंसू
फरियाद-ओ-फुगां से ऐ नादाँ तोहीन-ए-मोहब्बत होती है

जो आके रुके दामन पे सदा वो अश्क नहीं है पानी है 
जो अश्क न छलके आँखों से उस अश्क की कीमत होती है 

                                                " saba afghani "

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काँटों की चुभन पाई, फूलों का मज़ा भी 
दिल दर्द के मौसम में रोया भी हंसा भी 

आने का सबब याद न जाने की ही खबर है 
वो दिल में रहा और इसे तोड़ गया भी 

हर एक से मंज़िल का पता पूछ रहा है 
गुमराह मेरे साथ हुआ राहनुमा भी 

गुमनाम कभी अपनों से जो ग़म हुए हासिल 
कुछ याद रहे उनमे तो कुछ भूल गया भी 

                                               " Gumnam Surinder Malik "

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उल्फत का जब किसी ने लिया नाम, रो पड़े 
अपनी वफ़ा का सोचके हम अंजाम, रो पड़े 

हर शाम ये सवाल मुहब्बत से क्या मिला 
हर शाम ये जवाब कि, हर शाम रो पड़े 

राहे वफ़ा में हमको ख़ुशी की तलाश थी 
दो कदम ही चले थे कि हर कदम रो पड़े 


रोना नसीब में है तो औरों से क्या गिला 

अपने ही सर लिया कोई इलज़ाम, रो पड़े 

                                                    " Bashir Badr "

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जब नाम तेरा प्यार से लिखती हैं ऊँगलियाँ,
मेरी तरफ़ ज़माने की उठती हैं ऊँगलियाँ

दामन सनम का हाथ में आया था एक पल,
दिन रात उस एक पल से महकती हैं ऊँगलियाँ

जिस दिन से दूर हो गए, उस दिन से ही सनम,
बस दिन तुम्हारे आने के गिनती हैं ऊँगलियाँ

पत्थर तराश कर ना बना ताज एक नया,
फ़नकार की जहान में कटती हैं उँगलियाँ 


                                                  " Madan Pal "

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अबके बरस भी वो नहीं आये बहार में
गुज़रेगा और एक बरस इंतज़ार में

ये आग इश्क़ की है बुझाने से क्या बुझे
दिल तेरे बस में है ना मेरे इख़्तियार में

है टूटे दिल में तेरी मुहब्बत, तेरा ख़याल
कुछ रंग है बहार के उजड़ी बहार में

आँसू नहीं हैं आँख में लेकिन तेरे बग़ैर
तूफ़ान छुपे हुए हैं दिल-ए-बेक़रार में

                                               ' पयाम सईदी '


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बात साक़ी की न टाली जाएगी
कर के तौबा तोड़ डाली जाएगी

देख लेना वो न ख़ाली जाएगी
आह जो दिल से निकाली जाएगी

ग़र यही तर्ज़-ए-फ़ुग़ाँ है अन्दलीब
तू भी गुलशन से निकाली जाएगी

आते-आते आएगा उनको ख़याल
जाते-जाते बेख़याली जाएगी

क्यों नहीं मिलती गले से तेग़-ए-नाज़
ईद क्या अब के भी ख़ाली जाएगी


तर्ज़-ए-फ़ुग़ाँ = दुहाई का ढँग, अन्दलीब = बुलबुल
बेख़याली = ख्याल में गुम 

तेग़-ए-नाज़ = घमण्ड में चूर 

                                                           ' जलील मानिकपुरी '


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ये कैसी मुहब्बत कहाँ के फ़साने
ये पीने पिलाने के सब है बहाने

वो दामन हो उनका कि सुनसान सहरा
बस हमको तो आख़िर हैं आँसू बहाने

ये किसने मुझे मस्त नज़रों से देखा
लगे ख़ुद-ब-ख़ुद ही कदम लड़खडाने

चलो तुम भी 'गुमनाम' अब मैकदे में
तुम्हे दफ़्न करने हैं कई ग़म पुराने

                                                ' गुमनाम सुरिंदर मलिक '


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दिन आ गए शबाब के आँचल संभालिये
होने लगी है शहर में हलचल संभालिये 

चलिए संभल संभल के कठिन राह-ऐ-इश्क़ है
नाज़ुक बड़ी है आपकी पायल संभालिये

सज धज के आप निकले सर-ए-राह ख़ैर हो
टकरा न जाए आपका पागल संभालिये

घर से ना जाओ दूर किसी अजनबी के साथ
बरसेंगे जोर-शोर से बादल संभालिये

                                                       ' मदन पाल '


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Ahsaas : jagjit singh

हम दोस्ती एहसान वफ़ा भूल गए हैं 
ज़िंदा तो है जीने की अदा भूल गए है 

खुशबू जो लुटाती है मसलते है उसी को 
एहसान का बदला यही मिलता है कली को 
एहसान तो लेते हैं सिला भूल गए हैं --- हम दोस्ती एहसान वफ़ा.... 

करते हैं मुहब्बत का और एहसान का सौदा 
मतलब  के लिए करते हैं ईमान का सौदा 
डर मौत का और ख़ौफ़े खुदा भूल गए हैं --- हम दोस्ती एहसान वफ़ा....

अब मोम के घर पर कोई पत्थर नहीं होता 
अब कोई भी कुर्बान किसी पर नहीं होता 
यूँ भटके है मंजिल का पता भूल गए हैं --- हम दोस्ती एहसान वफ़ा....

                                                                               
                                                          lyrics : payam sayeedi