RIP Nida Fazli Saheb..

आज के दौर के महान शायर निदा फ़ाज़ली साहब की मौत।  उनकी रचनाओं में सूर, मीरा, कबीर, रहीम इत्यादि दिग्गजों का प्रभाव रहा । वो इंसानी रूह के शायर थे। रोमांस, विरह, प्रकृति इत्यादि के अलावा उन्होंने इंसानी जज़्बातों को बेहद बारीकी से पकड़ा।  शायरी में गहराई के मामले में शायद वो उच्चतम स्तर पर थे।  उनकी कुछ ग़ज़ल वापस आपके लिए यहाँ रख रहा हूँ।  पढ़ें और जानिए इस महान शायर के महान लेखन के बारे में।

album : insight


अपनी मर्ज़ी से कहाँ अपने सफर के हम है 
रुख़ हवाओं का जिधर का है उधर के हम हैं 

पहले हर चीज़ थी अपनी मगर अब लगता है 
अपने ही घर में किसी दूसरे घर के हम हैं 

वक़्त के साथ है मिट्टी का सफर सदियों से 
किसको मालूम कहाँ के है किधर के हम हैं 

चलते रहते हैं कि चलना है मुसाफिर का नसीब 

सोचते रहते हैं किस राहगुजर के हम हैं 

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album : love is blind

तुम ये कैसे जुदा हो गये 
हर तरफ हर जगह हो गये 

अपना चेहरा न बदला गया 
आईने से ख़फ़ा हो गये 

जाने वाले गए भी कहाँ 
चाँद सूरज घटा हो गये 

बेवफ़ा तो न वो थे न हम 
यूँ हुआ बस जुदा हो गये 

आदमी बनना आसां न था 

शेख जी आरसा हो गये 

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album : sajda

हर तरफ हर जगह बेशुमार आदमी
फिर भी तन्हाइयों का शिकार आदमी 

सुबह से शाम तक बोझ ढोता हुआ 
अपनी ही लाश का खुद मज़ार आदमी 

हर तरफ भागते दौड़ते रास्ते 
हर तरफ आदमी का शिकार आदमी 

रोज जीता हुआ रोज मरता हुआ 
हर नये दिन नया इंतज़ार आदमी 

ज़िन्दगी का मुकद्दर सफर दर सफर 
आखरी सांस तक बेकरार आदमी 

मज़ार : कब्र 

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धूप में निकलो घटाओं में नहा कर देखो
ज़िंदगी क्या है किताबों को हटा कर देखो
क्या ज़रूरी है उसे जिस्म बनाकर देखो
अपने घर के दरोदीवार सजा कर देखो

वो मिले या न मिले हाथ बढ़ा कर देखो

वो सितारा है चमकने दो यूँ ही आँखों में

पत्थरों में भी ज़ुबां होती है दिल होते हैं
फ़ासला नज़रों का धोखा भी तो हो सकता है

                                                       
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जो भी भला बुरा है अल्लाह जानता है 
बन्दे के दिल में क्या है, अल्लाह जानता है 

ये फर्श-ओ-अर्श क्या है अल्लाह जानता है
पर्दों में क्या छुपा है, अल्लाह जानता है

जाकर जहाँ से कोई वापस नहीं है आता 
वो कौनसी जगह है, अल्लाह जानता है

नेकी-बदिे को अपने कितना ही तू छुपा ले 
अल्लाह को पता है अल्लाह जानता है

ये धूप-छाँव देखो, ये सुबह शाम देखो 
सब क्यूँ ये हो रहा है, अल्लाह जानता है

किस्मत के नाम को तो सब जानते हैं लेकिन 
किस्मत में क्या लिखा है, अल्लाह जानता है

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Album : Muntazir


यूं तो गुजर रहा है हर इक पल ख़ुशी के साथ 
फिर भी कोई कमी सी है क्यूँ ज़िन्दगी के साथ 

रिश्ते वफायें दोस्ती सब कुछ तो पास है 
क्या बात है पता नही दिल क्यों उदास है 
हर लम्हा है हसीन नई दिलकशी के साथ 
फिर भी कोई कमी सी है क्यूँ ज़िन्दगी के साथ

चाहत भी है सुकून भी है दिलबरी भी है 
आँखों में ख्वाब भी है लबों पर हंसी भी है 
दिल को नहीं है कोई शिकायत किसी के साथ 
फिर भी कोई कमी सी है क्यूँ ज़िन्दगी के साथ

सोचा था जैसा वैसा ही जीवन तो है मगर 
अब और किस तलाश में बेचैन है नज़र 
कुदरत भी मेहरबान है दरियादिली के साथ 
फिर भी कोई कमी सी है क्यूँ ज़िन्दगी के साथ

                                                    
                                                                      
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बेनाम सा ये दर्द ठहर क्यूँ नहीं जाता 
जो बीत गया है वो गुजर क्यूँ नहीं जाता 

सब कुछ तो है क्या ढूंढती रहती हैं निगाहें 
क्या बात है मैं वक़्त पे घर क्यूँ नहीं जाता 

वो एक चेहरा तो नहीं सारे जहाँ में 
जो दूर है वो दिल से उतर क्यूँ नहीं जाता 

मैं अपनी ही उलझी हुई राहों का तमाशा 
जाते हैं जिधर सब मैं उधर क्यूँ नहीं जाता 

वो नाम जो बरसों से न चेहरा न बदन है 
वो ख्वाब अगर है तो बिखर क्यूँ नहीं जाता 

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album : hope

अब ख़ुशी है न कोई दर्द रुलाने वाला 
हमने अपना लिया हर रंग ज़माने वाला 

उसको रुख़सत तो किया था मुझे मालूम न था 

सारा घर ले गया घर छोड़ के जाने वाला 

इक मुसाफिर के सफर जैसी है सबकी दुनिया 

कोई जल्दी में कोई देर से जाने वाला 

एक बे-चेहरा सी उम्मीद है चेहरा चेहरा 

जिस तरफ देखिये आने को है आने वाला 
                                                         

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तन्हा-तन्हा हम रो लेंगे महफ़िल-महफ़िल गायेंगे
जब तक आंसू साथ रहेंगे तब तक गीत सुनायेंगे

तुम जो सोचो वो तुम जानो हम तो अपनी कहते हैं
देर न करना घर जाने में वरना घर खो जायेंगे

बच्चों के छोटे हाथों को चाँद सितारें छूने दो
चार किताबे पढ़ कर वो भी हम जैसे हो जायेंगे

किन राहों से दूर है मंजिल कौन सा रास्ता आसां है
हम जब थक कर रुक जायेंगे, औरों को समझायेंगे

अच्छी सूरत वाले सारे पत्थर दिल हों मुमकिन है
हम तो उस दिन राय देंगे जिस दिन धोखा खायेंगे



                                                                  


                                         







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