तमन्ना फिर मचल जाए, अगर तुम मिलने आ जाओ
यह मौसम ही बदल जाए, अगर तुम मिलने आ जाओ
मुझे ग़म है कि मैने ज़िन्दगी में कुछ नहीं पाया
ये ग़म दिल से निकल जाए, अगर तुम मिलने आ जाओ
ये दुनिया भर के झगड़े, घर के किस्से, काम की बातें
बला हर एक टल जाए, अगर तुम मिलने आ जाओ
नहीं मिलते हो मुझसे तुम तो सब हमदर्द हैं मेरे
ज़माना मुझसे जल जाए, अगर तुम मिलने आ जाओ
**********************************************************
आज मैंने अपना फिर सौदा किया
और फिर मैं दूर से देखा किया
ज़िन्दगी भर मेरे काम आए उसूल
एक एक करके उन्हें बेचा किया
कुछ कमी अपनी वफ़ाओं में भी थी
तुम से क्या कहते के तुमने क्या किया
हो गई थी दिल को कुछ उम्मीद सी
ख़ैर तुमने जो किया अच्छा किया
***********************************************************
अब अगर आओ तो जाने के लिए मत आना
सिर्फ अहसान जताने के लिए मत आना
मैंने पलकों पे तमन्नाएँ सजा रखी हैं
दिल में उम्मीद की सौ शम्मे जला रखी हैं
ये हसीं शम्मे बुझाने के लिए मत आना
प्यार की आग में ज़ंजीरें पिघल सकती हैं
चाहने वालों की तक़दीरें बदल सकती हैं
तुम हो बेबस ये बताने के लिए मत आना
अब तुम आना जो तुम्हें मुझसे मुहब्बत है कोई
मुझसे मिलने की अगर तुमको भी चाहत है कोई
तुम कोई रस्म निभाने के लिए मत आना
************************************************************
आप भी आइये हमको भी बुलाते रहिये
दोस्ती जुर्म नहीं दोस्त बनाते रहिये
ज़हर पी जाइये और बाँटिये अमृत सब को
ज़ख्म भी खाइये और गीत भी गाते रहिये
वक़्त ने लूट लीं लोगों की तमन्नाएँ भी
ख़्वाब जो देखिये औरों को दिखाते रहिये
शक्ल तो आपके भी ज़हन में होगी कोई
कभी बन जाएगी तस्वीर बनाते रहिये
************************************************************
क्यों डरें ज़िन्दगी में क्या होगा
कुछ ना होगा तो तज़ुर्बा होगा
हँसती आँखों में झाँक कर देखो
कोई आँसू कहीं छुपा होगा
इन दिनों ना-उम्मीद सा हूँ मैं
शायद उसने भी ये सुना होगा
देखकर तुमको सोचता हूँ मैं
क्या किसी ने तुम्हें छुआ होगा
***************************************************************
तुम बैठे हो लेकिन जाते देख रहा हूँ
मैं तन्हाई के दिन आते देख रहा हूँ
आने वाले लम्हे से दिल सहमा है
तुमको भी डरते घबराते देख रहा हूँ
कब यादों का ज़ख्म भरे कब दाग मिटे
कितने दिन लगते हैं भुलाते देख रहा हूँ
उसकी आँखों में भी काजल फैला है
मैं भी मुड़ के जाते जाते देख रहा हूँ
***************************************************************
इक पल ग़मों का दरिया इक पल खुशी का दरिया
थमता नहीं कहीं भी ये ज़िन्दगी का दरिया
आँखें थी वो किसी की या ख़्वाब के जज़ीरे
आवाज़ थी किसी की या रागिनी का दरिया
इस दिल की वादियों में अब ख़ाक उड़ रही है
बहता यहीं था पहले इक आशिक़ी का दरिया
किरनों में हैं ये लहरें या लहरों में हैं किरनें
दरिया की चाँदनी है या चाँदनी का दरिया
जज़ीरे : टापू
***************************************************************
प्यास की कैसे लाए ताब कोई
नहीं दरिया तो हो सराब कोई
रात बजती थी दूर शहनाई
रोया पीकर बहुत शराब कोई
कौन-सा ज़ख़्म किसने बख़्शा है
इसका रक्खे कहाँ हिसाब कोई
फ़िर मैं सुनने लगा हूँ इस दिल की
आने वाला है फिर अज़ाब कोई
ताब : सहनशक्ति
सराब : तृष्णा
अज़ाब : दुःख
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all ghazals lyrics are penned by Javed Akhtar.
यह मौसम ही बदल जाए, अगर तुम मिलने आ जाओ
मुझे ग़म है कि मैने ज़िन्दगी में कुछ नहीं पाया
ये ग़म दिल से निकल जाए, अगर तुम मिलने आ जाओ
ये दुनिया भर के झगड़े, घर के किस्से, काम की बातें
बला हर एक टल जाए, अगर तुम मिलने आ जाओ
नहीं मिलते हो मुझसे तुम तो सब हमदर्द हैं मेरे
ज़माना मुझसे जल जाए, अगर तुम मिलने आ जाओ
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आज मैंने अपना फिर सौदा किया
और फिर मैं दूर से देखा किया
ज़िन्दगी भर मेरे काम आए उसूल
एक एक करके उन्हें बेचा किया
कुछ कमी अपनी वफ़ाओं में भी थी
तुम से क्या कहते के तुमने क्या किया
हो गई थी दिल को कुछ उम्मीद सी
ख़ैर तुमने जो किया अच्छा किया
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अब अगर आओ तो जाने के लिए मत आना
सिर्फ अहसान जताने के लिए मत आना
मैंने पलकों पे तमन्नाएँ सजा रखी हैं
दिल में उम्मीद की सौ शम्मे जला रखी हैं
ये हसीं शम्मे बुझाने के लिए मत आना
प्यार की आग में ज़ंजीरें पिघल सकती हैं
चाहने वालों की तक़दीरें बदल सकती हैं
तुम हो बेबस ये बताने के लिए मत आना
अब तुम आना जो तुम्हें मुझसे मुहब्बत है कोई
मुझसे मिलने की अगर तुमको भी चाहत है कोई
तुम कोई रस्म निभाने के लिए मत आना
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आप भी आइये हमको भी बुलाते रहिये
दोस्ती जुर्म नहीं दोस्त बनाते रहिये
ज़हर पी जाइये और बाँटिये अमृत सब को
ज़ख्म भी खाइये और गीत भी गाते रहिये
वक़्त ने लूट लीं लोगों की तमन्नाएँ भी
ख़्वाब जो देखिये औरों को दिखाते रहिये
शक्ल तो आपके भी ज़हन में होगी कोई
कभी बन जाएगी तस्वीर बनाते रहिये
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क्यों डरें ज़िन्दगी में क्या होगा
कुछ ना होगा तो तज़ुर्बा होगा
हँसती आँखों में झाँक कर देखो
कोई आँसू कहीं छुपा होगा
इन दिनों ना-उम्मीद सा हूँ मैं
शायद उसने भी ये सुना होगा
देखकर तुमको सोचता हूँ मैं
क्या किसी ने तुम्हें छुआ होगा
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तुम बैठे हो लेकिन जाते देख रहा हूँ
मैं तन्हाई के दिन आते देख रहा हूँ
आने वाले लम्हे से दिल सहमा है
तुमको भी डरते घबराते देख रहा हूँ
कब यादों का ज़ख्म भरे कब दाग मिटे
कितने दिन लगते हैं भुलाते देख रहा हूँ
उसकी आँखों में भी काजल फैला है
मैं भी मुड़ के जाते जाते देख रहा हूँ
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इक पल ग़मों का दरिया इक पल खुशी का दरिया
थमता नहीं कहीं भी ये ज़िन्दगी का दरिया
आँखें थी वो किसी की या ख़्वाब के जज़ीरे
आवाज़ थी किसी की या रागिनी का दरिया
इस दिल की वादियों में अब ख़ाक उड़ रही है
बहता यहीं था पहले इक आशिक़ी का दरिया
किरनों में हैं ये लहरें या लहरों में हैं किरनें
दरिया की चाँदनी है या चाँदनी का दरिया
जज़ीरे : टापू
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प्यास की कैसे लाए ताब कोई
नहीं दरिया तो हो सराब कोई
रात बजती थी दूर शहनाई
रोया पीकर बहुत शराब कोई
कौन-सा ज़ख़्म किसने बख़्शा है
इसका रक्खे कहाँ हिसाब कोई
फ़िर मैं सुनने लगा हूँ इस दिल की
आने वाला है फिर अज़ाब कोई
ताब : सहनशक्ति
सराब : तृष्णा
अज़ाब : दुःख
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all ghazals lyrics are penned by Javed Akhtar.
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