जब भी तन्हाई से घबरा के सिमट जाते हैं
हम तेरी याद के दामन से लिपट जाते हैं
उन पे तूफां को भी अफ़सोस हुआ करता है
वो सफ़ीने जो किनारे पे उलट जाते हैं
हम तो आये थे रहें शाख़ में फूलों की तरह
तुम अगर खार समझते हो तो हट जाते हैं
सुदर्शन फ़ाकिर
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ये भी क्या अहसान कम है देखिये ना आपका
हो रहा है हर तरफ चर्चा हमारा आपका
चाँद में तो दाग है पर आप में तो वो भी नहीं
चौदहवी के चाँद से बढ़के चेहरा है आपका
इश्क़ में ऐसे भी हम डूबे हुए हैं आपके
अपने चेहरे पे सदाहोता है धोखाआपका
चाँद सूरज धुप सुबह कहकशां तारे शमा
हर उजाले ने चुराया है उजाला आपका
वाज़िदा तबस्सुम
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ये क्या जाने में जाना है, जाते हो खफा होकर
मैं जब जानूं मेरे दिल से चले जाओ जुदा होकर
क़यामत तक उड़ेगी दिल से उठकर खाक आखों तक
इसी रस्ते गया है हसरतों का काफ़िला होकर
तुम्ही अब दर्दे दिल के नाम से घबराये जाते हो
तुम्ही तो दिल में शायद आये थे दर्द-ऐ-आशियाँ होकर
यूँ ही हम तुम घडी भर मिला करते थे बेहतर था
ये दोनों वक़्त जैसे रोज मिलते हैं जुदा होकर
सीमाब अकबराबादी
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हम तेरी याद के दामन से लिपट जाते हैं
उन पे तूफां को भी अफ़सोस हुआ करता है
वो सफ़ीने जो किनारे पे उलट जाते हैं
हम तो आये थे रहें शाख़ में फूलों की तरह
तुम अगर खार समझते हो तो हट जाते हैं
सुदर्शन फ़ाकिर
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ये भी क्या अहसान कम है देखिये ना आपका
हो रहा है हर तरफ चर्चा हमारा आपका
चाँद में तो दाग है पर आप में तो वो भी नहीं
चौदहवी के चाँद से बढ़के चेहरा है आपका
इश्क़ में ऐसे भी हम डूबे हुए हैं आपके
अपने चेहरे पे सदाहोता है धोखाआपका
चाँद सूरज धुप सुबह कहकशां तारे शमा
हर उजाले ने चुराया है उजाला आपका
वाज़िदा तबस्सुम
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ये क्या जाने में जाना है, जाते हो खफा होकर
मैं जब जानूं मेरे दिल से चले जाओ जुदा होकर
क़यामत तक उड़ेगी दिल से उठकर खाक आखों तक
इसी रस्ते गया है हसरतों का काफ़िला होकर
तुम्ही अब दर्दे दिल के नाम से घबराये जाते हो
तुम्ही तो दिल में शायद आये थे दर्द-ऐ-आशियाँ होकर
यूँ ही हम तुम घडी भर मिला करते थे बेहतर था
ये दोनों वक़्त जैसे रोज मिलते हैं जुदा होकर
सीमाब अकबराबादी
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