Showing posts with label kaif bhopali. Show all posts
Showing posts with label kaif bhopali. Show all posts

Album :Classic Forever ( Jagjit Singh )



Please rate me by giving your rating by Excellent, Good, Average given after these album.




तेरा चेहरा कितना सुहाना लगता है
तेरे आगे चाँद पुराना लगता है

तिरछे तिरछे तीर नज़र के लगते हैं
सीधा सीधा दिल पे निशाना लगता है

आग का क्या है पल दो पल में लगती है
बुझते बुझते एक ज़माना लगता है

सच तो ये है फूल का दिल भी छलनी है
हँसता चेहरा एक बहाना लगता है


                                 " कैफ़ भोपाली "

***********************************************************************

मेरे क़रीब ना आओ के मैं शराबी हूँ
मेरा शऊर जगाओ के मैं शराबी हूँ

ज़माने भर की निगाहों से गिर चुका हूँ मैं
नज़र से तुम ना गिराओ के मैं शराबी हूँ

ये अर्ज़ करता हूँ गिर के ख़ुलूस वालो से
उठा सको तो उठाओ के मैं शराबी हूँ

तुम्हारी आँख से भर लूँ सुरूर आँखों में
नज़र नज़र से मिलाओ के मैं शराबी हूँ


                                    " सबा सीकरी "

***********************************************************************

कौन आएगा यहाँ, कोई न आया होगा
मेरा दरवाज़ा हवाओं ने हिलाया होगा

दिल-ए-नादाँ न धड़क, ऐ दिल-ए-नादाँ न धड़क
कोई ख़त ले के पड़ौसी के घर आया होगा

गुल से लिपटी हुई तितली को गिरा कर देखो
आँधियों तुम ने दरख़्तों को गिराया होगा

‘कैफ’ परदेस में मत याद करो अपना मकाँ
अब के बारिश ने उसे तोड़ गिराया होगा


                                         " कैफ भोपाली "

*************************************************************************

उसकी बातें बहार की बातें
वादी-ए-लालाज़ार* की बातें       ( गुलाब की वादी )

गुल-ओ-शबनम* का ज़िक्र कर ना अभी       ( फूल और ओस )
मुझको करनी है यार की बातें

मखमली फ़र्श पे हो जिनकें कदम
क्या वो समझेंगे ख़ार* की बातें       ( कांटे )

शेख़* जी मैकदा* है काबा* नहीं       ( पंडित, शराबखाना, मस्जिद )
याँ तो होंगी ख़ुमार की बाते

इश्क़ का कारवाँ चला भी नहीं
और अभी से ग़ुबार की बातें

ये क़फ़स* और तेरा ख़याल-ए-हसीं       ( पिंजरा )
उस पे हरसू बहार की बातें

याद है तुझसे गुफ़्तगू करना
कभी इश्क़, कभी रार की बातें

नसीम-ए-सहर* मुझे भी सुना,       ( सुबह की ठंडी हवा )
गेसू-ए-मुश्क़बार* की बातें       ( खुशबूदार जुल्फें )

जब सुकूँ है कफ़स* में ऐ 'राही'       ( पिंजरा )
क्यूँ करें हम फ़रार* की बातें       ( भागने की बात )

                              " सईद राही "


******************************************************************

हम तो हैं परदेस में, देस में निकला होगा चाँद
अपनी रात की छत पर कितना तनहा होगा चाँद

जिन आँखों में काजल बन कर तैरी काली रात
उन आँखों में आँसू का इक क़तरा होगा चाँद

रात ने ऐसा पेंच लगाया टूटी हाथ से डोर
आँगन वाले नीम में जाकर अटका होगा चाँद

चाँद बिना हर दिन यूँ बीता जैसे युग बीते
मेरे बिना किस हाल में होगा कैसा होगा चाँद


                                      " राही मासूम रज़ा "


******************************************************************

दिन आ गए शबाब के आँचल संभालिये
होने लगी है शहर में हलचल संभालिये

चलिए संभल संभल के कठिन राह-ऐ-इश्क़ है
नाज़ुक बड़ी है आपकी पायल संभालिये

सज धज के आप निकले सर-ए-राह ख़ैर हो
टकरा न जाए आपका पागल संभालिये

घर से ना जाओ दूर किसी अजनबी के साथ
बरसेंगे जोर-शोर से बादल संभालिये


                                            " मदन पाल "


*****************************************************************

नींद के गाँव में आज यादों का बाज़ार है

खिलखिलाते हुए अपना दामन उठाते हुए
बच्चों के पाँव की धूल का कारवाँ
गाँव की हर गली अपने पैरों की ज़ंजीर है
गाँव का हर मकान अपने रस्ते की दीवार है
नींद के गाँव में आज यादों का बाज़ार है

एक अँगोछा लपेटे हुए वक़्त बैठा है दहलीज़ पर
बांस के झुण्ड़ से बचके चलती रहगुज़र
वो गली के किनारे पर बैठी वज़ू करती
मस्जि़द की एक मीनार पर
कब की अटकी हुई इक अज़ान
जिसका सन्नाटा तलवार की धार है
नींद के गाँव में आज यादों का बाज़ार है

मैं भी बरगद के साये में बैठी हुई
अपनी यादों की परछाईयाँ बेच दूँ
मेरे लफ्ज़ों में है उस उदासी कहानी का रस
जिसपे चलता न था कच्चे आँगन का बस
निमकियों के कड़े सख़्त लड़े
जो न जाने थे किसके लिए
आज भी किस कदर याद है
नींद के गाँव में आज यादों का बाज़ार है



**********************************************************************



Royal Salute

कृपया ग़ज़ल के निचे दिए गए ऑप्शन में Average, Good, Excellent  रेटिंग जरूर देवें ।


मान मौसम का कहा, छायी घटा जाम उठा 
आग से आग बुझा, फूल खिला जाम उठा 

ऐ मेरे यार, तुझे उसकी कसम देता हूँ 
भूल जा शिकवा-गिला, हाथ मिला जाम उठा 

एक पल भी कभी हो जाता है सदियों जैसा 
देर क्या करना यहाँ, हाथ बढ़ा जाम उठा 

प्यार ही प्यार है सब लोग बराबर है यहाँ 
मयकदे में कोई छोटा न बड़ा, जाम उठा 

मान मौसम का कहा, छायी घटा जाम उठा 
आग से आग बुझा, फूल खिला जाम उठा 

                                    " बशीर बद्र "

*******************************************************

मेरे करीब न आओ, कि मैं शराबी हूँ 
मेरा शऊर जगाओ, कि मैं शराबी हूँ 

ज़माने भर की निगाहों से गिर चुका हूँ मैं 
नज़र से तुम न गिराओ कि मैं शराबी हूँ 

ये अर्ज़ करता हूँ गिर के ख़ुलूस वालों से 
उठा सको तो उठाओ कि मैं शराबी हूँ

तुम्हारी आँख से भर लूँ सुरूर आँखों में 
नज़र नज़र से मिलाओ कि मैं शराबी हूँ

ख़ुलूस : अच्छे लोग 

                                                  "  सबा सीकरी "

********************************************************

झूम के जब रिंदों ने पिला दी 
शेख ने चुपके चुपके दुआ दी 

एक कमी थी ताजमहल में 
हमने तेरी तस्वीर लगा दी 

तेरी गली में सज़दे करके 
हमने इबादतगाह बना दी 

आपने झूठा वादा करके 
आज हमारी उम्र बढा दी 

                                          " Kaif Bhopali :      

********************************************************

नज़र नज़र से मिला कर शराब पीते हैं 
हम उनको पास बिठाकर शराब पीते हैं 

इसीलिए तो अंधेरा है मयकदे में बहुत 
यहाँ घरों को जलाकर शराब पीते हैं 

हमें तुम्हारे सिवा कुछ नज़र नहीं आता 
तुम्हे नज़र में सजाकर शराब पीते हैं 

उन्हीं के हिस्से में आती है प्यास ही अक्सर 
जो दूसरों को रुलाकर शराब पीते है 

                                                            " Tasneem Faruqi "

*********************************************************

ये पीने वाले बहुत ही अजीब होते हैं 
जहाँ से दूर ये खुद के करीब होते हैं 

किसी को प्यार मिले, और किसी को रुसवाई 
मोहब्बतों के सफर भी अजीब होते हैं 

मिला किसी को है क्या सोचिये अमीरी से 
दिलों के शाह तो अक्सर ग़रीब होते हैं 

यहाँ के लोगों की है ख़ासियत ये सबसे बड़ी 
हबीब लगते हैं लेकिन रक़ीब होते हैं 

                                                    अज्ञात 
                                                **********************************************************

आप आये जनाब बरसों में 
हमने पी है शराब बरसों में 

दिल से दिल की कली खिली अपनी 
फिर से देखा शबाब बरसों में 

तुम कहाँ थे, कहाँ रहे साहिब  
आज होगा हिसाब बरसों में 

पहले नादां थे अब हुए दाना
उनको आया अदब बरसों में 

इसी उम्मीद पे मैं ज़िंदा हूँ 
क्या वो देंगे जवाब बरसों में 

                                          " Rustam Sehgal 'wafa' "

***********************************************************

बात साक़ी की ना टाली जाएगी 
करके तौबा तोड़ डाली जाएगी 

देख लेना वो न खाली जाएगी 
आह जो दिल निकाली जायेगी 

गर यही तर्ज-ए-फुगाँ है अंदलीब 
तू भी गुलशन से निकाली जाएगी 

आते आते आएगा उनको ख्याल 
जाते जाते बेखयाली जाएगी 

क्यों नहीं मिलती गले से तेग-ए-नाज़ 
ईद क्या अबके भी खाली जायेगी 

                                                      " Jalil Manikpuri "

तर्ज-ए-फुगाँ : दुहाई देने का तरीका 
अंदलीब : बुलबुल 
बेखयाली : असावधानी 
तेग-ए-नाज़ : घमंडी 

*********************************************************

















Unique : Jagjit Singh

तेरा चेहरा कितना सुहाना लगता है 
तेरे आगे चाँद पुराना लगता है 

तिरछे तिरछे तीर नज़र के चलते हैं 
सीधा सीधा दिल पे निशाना लगता है 

आग का क्या है पल दो पल में लगती है
बुझते बुझते एक ज़माना लगता है 

सच तो ये है फूल का दिल भी छलनी है 
हँसता चेहरा एक  बहाना लगता है   
                                                      " Kaif Bhopali "

*********************************************************************************

आप से गिला आपकी कसम 
सोचते रहे कर सके न हम 

उसकी क्या खता ला-दवा है ग़म 
क्यूँ गिला करें चारागर से हम 

ये नवाज़िशें और ये करम 
फरते शौक से मर न जाए हम 

खींचते रहे उम्र भर मुझे 
इक तरफ ख़ुदा इक तरफ सनम 

ये अगर नहीं यार की गली 
चलते चलते क्यूँ रुक गए कदम 
                                                   " Saba Sikri

*********************************************************************************

बस एक वक़्त का खंजर मेरी तलाश में है 
जो रोज भेष बदलकर मेरी तलाश में है 

मैं एक कतरा मेरा अलग वज़ूद तो है 
हुआ करे जो समंदर मेरी तलाश में है 

मैं देवता की तरह क़ैद अपने मंदिर में 
वो मेरे जिस्म के बाहर मेरी तलाश में है 

मैं जिसके हाथ में इक फूल आया था 
उसी के हाथ का पत्थर मेरी तलाश में है 
                                                          " Krishna Bihari Noor "

*********************************************************************************

बुझ गई तपते हुए दिन की अगन 
साँझ ने चुपचाप ही पी ली जलन 
रात झुक आई पहन उजला वसन 
प्राण तुम क्यों मौन हो कुछ गुनगुनाओ 
चांदनी के फूल चुन मुस्कुराओ 

एक नीली झील सा फैला अचल 
आज ये आकाश है कितना सजल 
चाँद जैसे रूप का उभरा कमल 
रात भर इस रूप का जादू जगाओ 
प्राण तुम क्यों मौन हो कुछ गुनगुनाओ 

चल रहा है चैत का चंचल पवन 
बाँध लो बिखरे हुए उंदल सघन 
आज लो कजरा उदास है नयन 
मांग भर लो भाल पर बिंदिया सजाओ 
प्राण तुम क्यों मौन हो कुछ गुनगुनाओ 
                                                            " Pandit Vinod Sharma "

*********************************************************************************

मेरे क़रीब न आओ कि मैं शराबी हूँ 
मेरा सऊर जगाओ कि मैं शराबी हूँ 

ज़माने भर की निगाहों से गिर चुका हूँ मैं
नज़र से तुम न गिराओ कि मैं शराबी हूँ 

ये अर्ज़ करता हूँ गिरके ख़ुलूस वालों से 
उठा सको तो उठाओ कि मैं शराबी हूँ

तुम्हारी आँख से भर लूँ सुरूर आँखों में 
नज़र नज़र से मिलाओ कि मैं शराबी हूँ
                                                            " Saba Sikri "

*********************************************************************************





हमारा हौसला बढ़ाने के लिए कृपया पोस्ट के नीचे अपनी - Average, Good या Excellent की रेटिंग अवश्य दें और हो सके तो कमेंट भी लिखें ।  धन्यवाद....