Showing posts with label poetry of nida fazli. Show all posts
Showing posts with label poetry of nida fazli. Show all posts

Jivan Ka Sach : Nida Fazli


दुनिया जिसे कहते हैं, जादू का खिलौना है 
मिल जाये तो मिट्टी है, खो जाए तो सोना है 

बरसात का बादल तो दीवाना है, क्या जाने 
किस राह से बचना है, किस छत को भिगोना है 

अच्छा सा कोई मौसम, तनहा सा कोई आलम 
हर वक़्त का रोना तो बेकार का रोना है 

ग़म हो कि ख़ुशी, दोनों कुछ देर के साथी है 
हर गाम पे पहरा है, फिर भी इसे खोना है 

आवारा मिज़ाजी ने फैला दिया आँगन को 
आकाश की चादर है, धरती का बिछोना है 

गाम : कदम 

Awesome Poetry : Nida Fazli

दिल में ना हो ज़ुर्रत तो मोहब्बत नहीं मिलती
ख़ैरात में इतनी बड़ी दौलत नहीं मिलती

कुछ लोग यूँ ही शहर में हमसे भी ख़फा हैं
हर एक से अपनी भी तबीयत नहीं मिलती

देखा था जिसे मैंने कोई और था शायद
वो कौन है जिससे तेरी सूरत नहीं मिलती

हँसते हुए चेहरों से है बाज़ार की ज़ीनत
रोने को यहाँ वैसे भी फुरसत नहीं मिलती

Wo Ladki : Nida Fazli

वो शोख शोख नज़र सांवली सी एक लड़की
जो रोज़ मेरी गली से गुज़र के जाती है
सुना है
वो किसी लड़के से प्यार करती है
बहार हो के, तलाश-ए-बहार करती है
न कोई मेल न कोई लगाव है लेकिन न जाने क्यूँ
बस उसी वक़्त जब वो आती है
कुछ इंतिज़ार की आदत सी हो गई है
मुझे
एक अजनबी की ज़रूरत हो गई है मुझे
मेरे बरांडे के आगे यह फूस का छप्पर
गली के मोड पे खडा हुआ सा
एक पत्थर
वो एक झुकती हुई बदनुमा सी नीम की शाख
और उस पे जंगली कबूतर के घोंसले का निशाँ
यह सारी चीजें कि जैसे मुझी में शामिल हैं
मेरे दुखों में मेरी हर खुशी में शामिल हैं
मैं चाहता हूँ कि वो भी यूं ही गुज़रती रहे
अदा-ओ-नाज़ से लड़के को प्यार करती रहे