Album : Muntazir

Muntazir means " waiting for someone/something " .

बहुत खूबसूरत है आँखें तुम्हारी
अगर हो इनायत ए जाने मुहब्बत
बना दीजिये इनको किस्मत हमारी

जो सबसे जुदा है वो अंदाज़ हो तुम
छुपा था जो दिल में वो ही राज़ हो तुम
तुम्हारी नज़ाकत बनी जब से चाहत
सुकून बन गई है हर इक बेक़रारी

न थे जब तलक तुम हमारी नज़र में
न था चाँद शब में न सूरज सहर में
तुम्हारी इजाजत तुम्हारी हुक़ूमत
ये सारा गगन है ये धरती है सारी

बहुत खूबसूरत है आँखें तुम्हारी
अगर हो इनायत ए जाने मुहब्बत
बना दीजिये इनको किस्मत हमारी  

                                              " Nida fazli "
                                                                                                       
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यूं तो गुजर रहा है हर इक पल ख़ुशी के साथ 
फिर भी कोई कमी सी है क्यूँ ज़िन्दगी के साथ 

रिश्ते वफायें दोस्ती सब कुछ तो पास है 
क्या बात है पता नही दिल क्यों उदास है 
हर लम्हा है हसीन नई दिलकशी के साथ 
फिर भी कोई कमी सी है क्यूँ ज़िन्दगी के साथ

चाहत भी है सुकून भी है दिलबरी भी है 
आँखों में ख्वाब भी है लबों पर हंसी भी है 
दिल को नहीं है कोई शिकायत किसी के साथ 
फिर भी कोई कमी सी है क्यूँ ज़िन्दगी के साथ

सोचा था जैसा वैसा ही जीवन तो है मगर 
अब और किस तलाश में बेचैन है नज़र 
कुदरत भी मेहरबान है दरियादिली के साथ 
फिर भी कोई कमी सी है क्यूँ ज़िन्दगी के साथ

                                                     " Nida Fazli "
                                                                      
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बेनाम सा ये दर्द ठहर क्यूँ नहीं जाता 
जो बीत गया है वो गुजर क्यूँ नहीं जाता 

सब कुछ तो है क्या ढूंढती रहती हैं निगाहें 
क्या बात है मैं वक़्त पे घर क्यूँ नहीं जाता 

वो एक चेहरा तो नहीं सारे जहाँ में 
जो दूर है वो दिल से उतर क्यूँ नहीं जाता 

मैं अपनी ही उलझी हुई राहों का तमाशा 
जाते हैं जिधर सब मैं उधर क्यूँ नहीं जाता 

वो नाम जो बरसों से न चेहरा न बदन है 
वो ख्वाब अगर है तो बिखर क्यूँ नहीं जाता 

                                          " Nida Fazli "

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रूख़ से पर्दा उठा दे जरा साक़िया 
बस अभी रंग-ए-महफ़िल बदल जायेगा 
है जो बेहोश वो होश में आएगा 
गिरने वाला है जो वो संभल जायेगा 

तुम तसल्ली न दो सिर्फ बैठे रहो 
वक़्त कुछ मेरे मरने का टल जायेगा 
क्या ये कम है मसीहा के होने ही से 
मौत का भी इरादा बदल जायेगा 

तीर की जान है दिल दिल की जान तीर है  
तीर को यूँ न खींचो कहा मान लो 
तीर खिंचा तो दिल भी निकल आएगा 
दिल जो निकला तो दम भी निकल जायेगा 

जिसके हंसने में रोने का अंदाज़ है 
खाक उड़ाने में फरियाद का राज है 
इसको छेड़ो न ' अनवर ' खुदा के लिए 
वर्ना बीमार का दम निकल जायेगा 
                                                        " Anwar Mirzapuri "

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