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Gulzar : Humko man ki shakti dena

हमको मन की शक्ति देना, मन विजय करें 
दूसरों की जय से पहले, खुद को जय करें 

भेदभाव अपने दिल से साफ़ कर सकें 
दोस्तों से भूल हो तो माफ़ कर सकें 
झूठ से बचे रहें, सच का दम भरें 
दूसरों की जय से पहले, खुद को जय करें

मुश्किल पड़े हमपे तो इतना कर्म कर 
साथ दें तो धर्म का, चलें तो धर्म पर 
खुद पर हौसला रहे, बदी से ना डरें 
दूसरों की जय से पहले, खुद को जय करें

हमको मन की शक्ति देना, मन विजय करें 
दूसरों की जय से पहले, खुद को जय करें 

movie : guddi
music : vasant desai
singer : vaani jairam

Billu Barber : Gulzar

रातों रात तारा कोई, चाँद या सितारा कोई 
गिरे तो उठा लेना 
ओ सुनियो रे , तारा चमकीला होगा, चाँद शर्मीला होगा 
नथ में लगा लेना

जरा सी सांवरी है वो, जरा सी बावरी है वो 
वो सुरमे की तरह मेरी आँखों में ही रहती है 
सुबह के ख्वाब से उड़ाई है, पलकों के निचे छिपाई है 
मानो न मानो तुम सोते सोते ख्वाबों में भी ख्वाब दिखाती है 
मानो न मानो तुम परी है वो परी की कहानियां सुनाती है
खुदाया खैर, खुदाया खैर 

तू हवा, मैं जमीं, तू जहाँ-मैं वहीँ 
जब उड़े, मुझे लेके क्यूँ उड़ती नहीं 
तू घटा, मैं जमीं, तू कही मैं कही 
क्यों कभी, मुझे ले के बरसती नहीं 
जरा सा सांवरा है वो जरा सा बावरा है वो 
वो सुरमे की तरह मेरी आँखों में ही रहता है 
सुबह के ख्वाब से उड़ाई है, पलकों के निचे छिपाई है 
मानो न मानो तुम सोते सोते ख्वाबों में भी ख्वाब दिखाती है 
मानो न मानो तुम परी है वो परी की कहानियां सुनाती है
खुदाया खैर, खुदाया खैर, खुदाया खैर, खुदाया खैर

जब दांत में ऊँगली दबाये, या ऊँगली पे लट लिपटाये 
बादल ये नीचड़ता जाए ओओओओ
कुछ करके वो बात को टाले, जब माथे पे गोगल डाले 
अम्बर ये सिकुड़ता जाये 
वो जब नाख़ून कुतरती है तो चंदा घटने लगता है 
वो पानी पे कदम रखे, सागर भी हट जाता है 
सुबह के ख्वाब से उड़ाई है, पलकों के निचे छिपाई है 
मानो न मानो तुम सोते सोते ख्वाबों में भी ख्वाब दिखाती है 
मानो न मानो तुम परी है वो परी की कहानियां सुनाती है
खुदाया खैर, खुदाया खैर, खुदाया खैर, खुदाया खैर

music : pritam
voice : soham, akriti kakkar, monali










Khoosurat ( 1999 ) : Gulzar

बड़ी ताज़ा खबर है 
कि तुम खूबसूरत हो........

बहुत खूबसूरत हो, बहुत खूबसूरत हो - 2 
ये बिखरी सी लटें है, इन्हें चेहरे पे उड़ने दो 
बहुत खूबसूरत हो - 2 

ये रुख़सार पीले से लगते हैं ना 
उदासी की हल्दी है हट जाएगी 
तमन्ना की लाली को पकने तो दो 
ये पतझड़ की छाँव छंट जाएगी 
लबों पे जुबां फेरो, इन्हे गीले रहने दो 
बहुत खूबसूरत हो

वो चेहरे जो रोशन है लौ की तरह 
उन्हें ढूंढने की जरुरत नहीं 
मेरी आँख में झाँक कर देख लो 
तुम्हे आईने की जरुरत नहीं 
रूठी सी ख़फ़ा सी तुम, जरा तो मनाने दो 
बहुत खूबसूरत हो - 2

music : jatin lalit
voice : abhijeet

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Gulzar & Ghulam Ali : Visaal

                                                                Visaal : मिलन 

जब भी आँखों में अश्क़ भर आये
लोग कुछ डूबते नज़र आये

मुद्दतें हो गई सहर देखे
कोई आहट कोई ख़बर आये

चाँद जितने भी गुम हुए शब के
सबके इलज़ाम मेरे सर आये

मुझको अपना पता ठिकाना मिले
वो भी इक बार मेरे घर आये

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खुशबू ग़ुंचे तलाश करती है 
बीते रिश्ते तलाश करती है 

जब गुजरती है उस गली से सबा 
ख़त के पुर्ज़े तलाश करती है 

अपने माज़ी की जुस्तज़ू में बहार 
पीले पत्ते तलाश करती है 

एक उम्मीद बार-बार आकर 
अपने टुकड़े तलाश करती है 

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हम तो कितनों को महजबीं कहते 
आप हैं इसलिए नहीं कहते 

चाँद होता न आसमां पे अगर 
हम किसे आप सा हसीं कहते 

आपने औरों से कहा सब कुछ 
हम से कुछ तो कभी नहीं कहते 

रात देखा था जाते जाते उन्हें 
चाँद को अपना जानशीं कहते 

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खुशबू जैसे लोग मिले अफ़साने में 
एक पुराना ख़त खोला अनजाने में 

चाँद के साये बालिश्तों से नापे हैं 
चाँद ने कितनी देर लगा दी आने में 

दिल पर दस्तक देने ये कौन आया है 
किसकी आहट सुनता हूँ वीराने में 

जाने किसका जिक्र है इस अफ़साने में 
दर्द मजे लेता है जो दोहराने में 

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कोई अटका हुआ है पल शायद 
वक़्त में पड़ गया है बल शायद 

आ रही है जो चाप कदमों की 
खिल रहे हैं कहीं कँवल शायद 

दिल अगर है तो दर्द भी होगा 
इसका कोई नहीं है हल शायद 

राख को भी कुरेद कर देखो 
अभी जलता हो कोई पल शायद 

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मेरा क्या था तेरे हिसाब में, मेरा सांस सांस उधार था
जो गुजर गया वो तो वक़्त था, जो बचा रहा वो ग़ुबार था 

तेरी आरज़ू में उड़े तो थे चंद खुश्क पत्ते चनार के 
जो हवा के दोष से गिर पड़ा, उनमें एक ये ख़ाकसार था 

वो उदास-उदास इक शाम थी, एक चेहरा था एक चिराग़ था 
और कुछ नहीं था ज़मीन पर, एक आसमान का ग़ुबार था 

बड़े सूफियों से ख़याल थे, और बयां भी उसका कमाल था 
कहा मैंने कब कि वही था वो, एक शख्स था वादाख़्वार था  

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Gulzar On Maa

तुझे पहचानूँगा कैसे
तुझे देखा ही नहीं

ढूंढा करता हूँ तुम्हे
अपने चेहरे में ही कहीं

लोग कहते हैं
मेरी आँखें मेरी माँ सी हैं

यूं तो लबरेज़ हैं पानी से
मगर प्यासी हैं

कान में छेद है
पैदायशी आया होगा

तूने मन्नत के लिये
कान छिदाया होगा

सामने दाँतों का वक़्फा है
तेरे भी होगा
एक चक्कर
तेरे पाँव के तले भी होगा

जाने किस जल्दी में थी
जन्म दिया, दौड़ गयी
क्या खुदा देख लिया था
कि मुझे छोड़ गयी

मेल के देखता हूं
मिल ही जाए तुझसी कहीं
तेरे बिन ओपरी लगती है
मुझे सारी जमीं

तुझे पहचानूंगा कैसे?
तुझे देखा ही नहीं

Little Awesome Nazm of Gulzar

नज़्म उलझी हुई है सीने में 
मिसरे अटके हुए हैं होठों पर 
उड़ते फिरते हैं तितलियों की तरह 
लफ्ज़ कागज़ पे बैठे ही नहीं 

कब से बैठा हूँ मैं जानम 
सादे कागज़ पे लिख के नाम तेरा 
बस तेरा नाम ही मुकम्मल है 
इससे बेहतर क्या नज़्म होगी 


Gulzar & R.D.Burman




आप की आँखों में कुछ महके हुए से राज़ हैं
आप से भी खूबसूरत आप के अंदाज हैं
लब हिले तो मोगरे के फूल खिलते हैं कही
आप की आँखों में क्या साहिल भी मिलते हैं कही
आप की खामोशियाँ भी आप की आवाज है
आप की बातों में फिर कोई शरारत तो नहीं
बेवजह तारीफ़ करना आप की आदत तो नहीं
आप की बदमाशियों के ये नए अंदाज हैं

Movie : Ghar
Voice : Lata ji & Kishore Kr.

Ishqiya : Gulzar

ऐसी उलझी नज़र उनसे हटती नहीं, दांत से रेशमी डोर कटती नहीं 
उम्र कब की बरस के सफ़ेद हो गई, कारी बदरी जवानी की छँटती नहीं 
वल्ला ये धड़कन बढ़ने लगी है....
चेहरे की रंगत उड़ने लगी है....
डर लगता है तनहा सोने में जी....
दिल तो बच्चा है जी, थोड़ा कच्चा है जी....

किसको पता था पहलु में रखा दिल ऐसा पाजी भी होगा 
हम तो हमेशा समझते थे कोई हम जैसा हाजी ही होगा 
हाये जोर करे कितना शोर करे 
बेवजह बातों पे एवै गौर करे 
दिल सा कोई कमीना नहीं 
कोई तो रोके, कोई तो टोके 
इस उम्र में अब खाओगे धोखे 
डर लगता है इश्क़ करने में जी......दिल तो बच्चा है जी 

ऐसी उदासी बैठी है दिल पे, हंसने से घबरा रहे हैं 
सारी जवानी कतरा के काटी, पीरी में टकरा गए हैं 
दिल धड़कता है तो ऐसे लगता है वो 
आ रहा है यहीं देखता ही ना हो 
प्रेम की मारें कटार रे 
तौबा ये लम्हे कटते नहीं क्यूँ 
आँखों से मेरी हटते नहीं क्यूँ 
डर लगता है मुझसे कहने में जी......दिल तो बच्चा है जी 

Movie : Ishqiya
Music : Vishal Bhardwaj
Voice : Rahet Fateh Ali Khan










Everhit song : Gulzar ( Jhoom Barabar Jhoom )

धागे तोड़ लाओ चांदनी से नूर के 
घूंघट ही बना लो रौशनी से नूर के 
शरमा गए तो आगोश में लो 
सांसों से उलझी रहें मेरी सांसें
बोल न हल्के हल्के, बोल न हल्के हल्के 
होंठ से हल्के हल्के, बोल न हल्के

आ नींद का सौदा करें 
इक ख़्वाब लें इक ख़्वाब दे 
इक ख़्वाब तो आँखों में है 
एक चाँद के तकिये तले 
कितने दिनों से ये आसमां भी सोया नहीं आ इसको सुला दें 
बोल न हल्के हल्के, बोल न हल्के हल्के

उम्रें लगी कहते हुए 
दो लफ्ज़ थे, इक बात थी 
वो एक दिन सौ साल का 
सौ साल की एक रात थी 
कैसे लगे जो चुपचाप दोनों इक पल में पूरी सदियाँ बिता दें 
बोल न हल्के हल्के, बोल न हल्के हल्के


Movie : Jhoom Barabar Jhoom
Music : Shankar Ehsaan Loy
Singer : Mahalaxmi Iyer, Rahat Fateh Ali Khan





Mausam : Gulzar all time hit

' दिल ढूंढता है फिर वही फुर्सत के रात दिन
  बैठे रहें तसव्वर-ऐ-जानां किये हुए '  

( This is written by Ghalib and rest r from Gulzar pen )

जाड़ों की नर्म धूप और आँगन में लेट कर
आँखों पे खिंच कर तेरे आँचल के साये को
औंधे पड़े रहे, कभी करवट लिए हुए

या गर्मियों की रात में पुरवाइयां चलें
ठन्डे सफ़ेद बिस्तर पर जागे देर तक
तारों को देखते रहे छत पर पड़े हुए

बर्फीली सर्दियों की किसी रात में कभी
जा कर उसी पहाड़ के कोने में बैठकर
वादी में गूंजती हुई तन्हाईयाँ सुने

Voice : Bhupinder singh, Lata ji
Music : Madan Mohan


Gulzar : Movie Anand

मैंने तेरे लिए ही सात रंग के सपने चुने, सपने सुरीले सपने
कुछ हँसते, कुछ ग़म के, तेरी आँखों के साये चुराए रसीली यादों ने

छोटी बातें, छोटी-छोटी बातों की है यादें बड़ी 
भूले नहीं बीती हुई इक छोटी घड़ी - 2 
जनम जनम से आँखें बिछाई तेरे लिए ही राहों में 

भोले भाले, भोले भाले दिल को बहलाते रहे 
तन्हाई में तेरे ख़यालों को सजाते रहे - 2 
कभी कभी तो आवाज़ देकर मुझको जगाया ख्वाबों ने 

Singer : Mukesh
Movie : Anand
Music : Salil Choudhary

Gulzar : Mausam

रुके रुके से कदम रुक के बार बार चले
क़रार ले के तेरे दर से बेक़रार चले

सुबह न आई कई बार नींद से जागे
थी एक रात की ये ज़िन्दगी गुजार चले

उठाये फिरते थे अहसान दिल का सीने पर
ले तेरे कदमों में ये कर्ज़ भी उतार चले

Singer : Lata ji
Music : Madan Mohan





Gulzar - Ustad Amzad Ali ( Album Vaada )

ऐसा कोई ज़िन्दगी से वादा तो नहीं था
तेरे बिना जीने का इरादा तो नहीं था

तेरे लिए रातों में चांदनी उगाई थी
क्यारियों में खुशबु की रौशनी लगाई थी
जाने कहाँ टूटी है डोर मेरे ख़्वाब की
ख़्वाब से जागेंगे सोचा तो नहीं था

शामियाने शामों के रोज ही सजाये थे
कितनी उम्मीदों के मेहमां बुलाये थे
आ के दरवाज़े से लौट गए हो
यूँ भी कोई आएगा सोचा तो नहीं था

singer : roop kumar rothore

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हर बात पे हैरां है, मूरख है ये नादां है 
मैं दिल से परेशां हूँ, दिल मुझसे परेशां है 

हर एक हसीं चीज को छूने की उमंग है 
मैं आग कहूँ, कहता है ये शहद का रंग है 
मैं कहके पशेमां हूँ ये सुनके पशेमां है 

है जिस्म हसीं लेकिन पौशाक ये तंग है 
क्यूँ बाँध के रखा है ये उड़ने की पतंग है 
मैं इसपे मेहरबां हूँ ये मुझपे मेहरबां है 

singer : Roop Kr Rathore & Sonali Rathore

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डूब रहे हो और बहते हो 
दरिया किनारे क्यूँ रहते हो 

याद आते हैं वादे जिनके 
तेज हवा में सूखे तिनके 
उनकी बातें क्यूँ कहते हो 

बात करें तो रुख़सारों में 
दो चकराते भंवर पड़ते हैं 
मझधारों में क्यूँ रहते हो 

singer : Roop Kr Rathore

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ये सुबह सांस लेगी और बादबाँ खुलेगा 
पलकें उठाओ जानम, ये आसमां खुलेगा 

आँखों के नीचे थोड़ा सा काजल ढलक गया है 
पलकें उठाओ ख्वाब का आँचल अटक गया है 
पलकों से बाँधा सपना जाने कहाँ खुलेगा.......ये सुबह

आँखों से नींद खोलो, दरिया रुके हुए हैं 
और पर्वतों पे कब से बादल झुके हुए हैं 
ये रात बंद हो तो दिन का समां खुलेगा........ये सुबह

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आँखों में सावन छलका हुआ है 
आंसू है कोई अटका हुआ है 

आँखों की हिचकी रूकती नहीं है 
रोने से कब दिल हल्का हुआ है 

सीने में टूटी है चीज कोई 
खामोश से एक खटका हुआ है 

चारों तरफ तू, बस तू ही तू है 
मुझसे ज़ियादा भटका हुआ है 

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This song is special for teen-age youth..so touchy.

चोरी चोरी की वो झांकियां, झूठी छींके, झूठी खांसिया 
देख के सबको तुझपे नज़र जाती थी 
शाम तेरी गली में गुजर जाती थी 

देखना भी नहीं और वहीं देखना 
कोई कंकर उठा कर कहीं फेंकना 
तेरी खिड़की का पर्दा खिसकता हुआ 
कांच पर एक साया सरकता हुआ 
साँस रुक जाती थी, आँख भर जाती थी
शाम तेरी गली में गुजर जाती थी 

पान वाले से बेवजह की यारियां 
और यारों से छुपने की दुश्वारियां 
डाकिये से कभी कोई ख़त पूछना 
लिखके कागज़ पे कुछ भी गलत पूछना - 2 
आँख से कह दिया कुछ तो डर जाती थी 
शाम तेरी गली में गुजर जाती थी

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cchod aaye hum wo galiyaan : gulzar

छोड़ आये हम वो गलियां - 2

जहाँ तेरे पैरों के कमल गिरा करते थे 
हँसे तो दो गालों में भंवर पड़ा करते थे 
तेरी कमर के बल पर नदी मुड़ा करती थी 
हंसी तेरी सुन-सुन के फसल पका करती थी 

हो. .जहाँ तेरी एड़ी से धूप उड़ा करती थी 
सुना है उस चौखट पे अब शाम रहा करती है 
लटों से उलझी लिपटी इक रात हुआ करती थी 
कभी कभी तकिये पे वो भी मिला करती है 

दिल दर्द का टुकड़ा है, पत्थर की डली सी है 
इक अँधा कुआं है या इक बंद गली सी है 
इक छोटा सा लम्हा है, जो ख़त्म नहीं होता 
मैं लाख जलाता हूँ ये भस्म नहीं होता 

lyrics : gulzar
movie : machis
music : vishal bhardwaz
singer : suresh wadekar, hariharan etc






ऐ मेरे प्यारे वतन By Gulzar Saab

ऐ मेरे प्यारे वतन ऐ मेरे बिछड़े चमन तुझ पे दिल कुर्बान तू ही मेरी आरजू, तू ही मेरी आबरू, तू ही मेरी जान तेरे दामन से जो आये, उन हवाओं को सलाम चूम लू मैं उस जुबान को जिस पे आये तेरा नाम सब से प्यारी सुबह तेरी, सब से रंगी तेरी शाम माँ का दिल बनके कभी सीने से लग जाता है तू और कभी नन्ही सी बेटी बन के याद आता है तू जितना याद आता है तू, उतना तड़पाता है तू छोड़कर तेरी जमीन को दूर आ पहुचे हैं हम फिर भी है यही तमन्ना तेरे जर्रो की कसम हम जहां पैदा हुए, उस जगह ही निकले ये दम

Lyrics : gulzar saab
singer : Manna de
music : salil chaudhary
Movie : kabuliwala

Ghazal by Gulzar

दिखाई देते हैं, धुंध में अब भी साये कोई 
मगर बुलाने से वक़्त लौटे न आये कोई 

मेरे मुहल्ले का आसमाँ सूना हो गया है 
पतंग उड़ाए, फलक में पेचे लड़ाए कोई 

वो ज़र्द पत्ते जो पेड़ से टूट कर गिरे थे 
कहाँ गए बहते पानियों में, बुलाये कोई 

ज़ईफ़ बरगद के हाथ में रेशा आ गया है 
जटाएं आँखों पे गिर रही है, उठाये कोई 

मज़ार पे खोल कर गरेबाँ, दुआएं मांगे 
जो आये अबके, तो लौट कर फिर न जाये कोई 

Milestone ghazal of Gulzar

सब्र हर बार अख़्तियार किया 
हम से होता नहीं, हज़ार किया 

आदतन तुमने कर दिए वादे 
आदतन हमने ऐतबार किया 

हमने अक्सर तुम्हारी राहों में 
रुक के अपना ही इंतज़ार किया 

फिर न मांगेंगे ज़िंदगी या रब 
ये गुनाह हमने इक बार किया 


Excellent ghazal by Gulzar

हवा के सींग न पकड़ो, खदेड़ देती है 
ज़मीं से पेड़ों के टाँके उधेड़ देती है 

मैं चुप कराता हूँ हर शब उमड़ती बारिश को 
मगर ये रोज गयी बात छेड़ देती है 

ज़मीं-सा दूसरा कोई सख़ी कहाँ होगा 
ज़रा सा बीज उठा ले तो पेड़ देती है 

रूंधे गले की दुआओं से भी नहीं खुलता 
दरे-हयात, जिसे मौत भेड़ देती है 

Nazm ka vaada : Gulzar

मुझसे इक नज़्म का वादा है, मिलेगी मुझको

डूबती नब्ज़ों में जब दर्द को नींद आने लगे

ज़र्द-सा चेहरा लिए चाँद उफ़क़ पर पहुंचे

दिन अभी पानी में हो, रात किनारे के करीब

न अँधेरा, न उजाला हो, यह न रात, न दिन 

जिस्म जब ख़त्म हो और रूह को जब सांस आये

मुझसे इक नज़्म का वादा है, मिलेगी मुझको ।