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Ishqiya : Gulzar

ऐसी उलझी नज़र उनसे हटती नहीं, दांत से रेशमी डोर कटती नहीं 
उम्र कब की बरस के सफ़ेद हो गई, कारी बदरी जवानी की छँटती नहीं 
वल्ला ये धड़कन बढ़ने लगी है....
चेहरे की रंगत उड़ने लगी है....
डर लगता है तनहा सोने में जी....
दिल तो बच्चा है जी, थोड़ा कच्चा है जी....

किसको पता था पहलु में रखा दिल ऐसा पाजी भी होगा 
हम तो हमेशा समझते थे कोई हम जैसा हाजी ही होगा 
हाये जोर करे कितना शोर करे 
बेवजह बातों पे एवै गौर करे 
दिल सा कोई कमीना नहीं 
कोई तो रोके, कोई तो टोके 
इस उम्र में अब खाओगे धोखे 
डर लगता है इश्क़ करने में जी......दिल तो बच्चा है जी 

ऐसी उदासी बैठी है दिल पे, हंसने से घबरा रहे हैं 
सारी जवानी कतरा के काटी, पीरी में टकरा गए हैं 
दिल धड़कता है तो ऐसे लगता है वो 
आ रहा है यहीं देखता ही ना हो 
प्रेम की मारें कटार रे 
तौबा ये लम्हे कटते नहीं क्यूँ 
आँखों से मेरी हटते नहीं क्यूँ 
डर लगता है मुझसे कहने में जी......दिल तो बच्चा है जी 

Movie : Ishqiya
Music : Vishal Bhardwaj
Voice : Rahet Fateh Ali Khan