Nazm ka vaada : Gulzar
मुझसे इक नज़्म का वादा है, मिलेगी मुझको
डूबती नब्ज़ों में जब दर्द को नींद आने लगे
ज़र्द-सा चेहरा लिए चाँद उफ़क़ पर पहुंचे
दिन अभी पानी में हो, रात किनारे के करीब
न अँधेरा, न उजाला हो, यह न रात, न दिन
जिस्म जब ख़त्म हो और रूह को जब सांस आये
मुझसे इक नज़्म का वादा है, मिलेगी मुझको ।
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