छोड़ आये हम वो गलियां - 2
जहाँ तेरे पैरों के कमल गिरा करते थे
हँसे तो दो गालों में भंवर पड़ा करते थे
तेरी कमर के बल पर नदी मुड़ा करती थी
हंसी तेरी सुन-सुन के फसल पका करती थी
हो. .जहाँ तेरी एड़ी से धूप उड़ा करती थी
सुना है उस चौखट पे अब शाम रहा करती है
लटों से उलझी लिपटी इक रात हुआ करती थी
कभी कभी तकिये पे वो भी मिला करती है
दिल दर्द का टुकड़ा है, पत्थर की डली सी है
इक अँधा कुआं है या इक बंद गली सी है
इक छोटा सा लम्हा है, जो ख़त्म नहीं होता
मैं लाख जलाता हूँ ये भस्म नहीं होता
lyrics : gulzar
movie : machis
music : vishal bhardwaz
singer : suresh wadekar, hariharan etc
जहाँ तेरे पैरों के कमल गिरा करते थे
हँसे तो दो गालों में भंवर पड़ा करते थे
तेरी कमर के बल पर नदी मुड़ा करती थी
हंसी तेरी सुन-सुन के फसल पका करती थी
हो. .जहाँ तेरी एड़ी से धूप उड़ा करती थी
सुना है उस चौखट पे अब शाम रहा करती है
लटों से उलझी लिपटी इक रात हुआ करती थी
कभी कभी तकिये पे वो भी मिला करती है
दिल दर्द का टुकड़ा है, पत्थर की डली सी है
इक अँधा कुआं है या इक बंद गली सी है
इक छोटा सा लम्हा है, जो ख़त्म नहीं होता
मैं लाख जलाता हूँ ये भस्म नहीं होता
lyrics : gulzar
movie : machis
music : vishal bhardwaz
singer : suresh wadekar, hariharan etc
