Showing posts with label nazm of gulzar. Show all posts
Showing posts with label nazm of gulzar. Show all posts

Little Awesome Nazm of Gulzar

नज़्म उलझी हुई है सीने में 
मिसरे अटके हुए हैं होठों पर 
उड़ते फिरते हैं तितलियों की तरह 
लफ्ज़ कागज़ पे बैठे ही नहीं 

कब से बैठा हूँ मैं जानम 
सादे कागज़ पे लिख के नाम तेरा 
बस तेरा नाम ही मुकम्मल है 
इससे बेहतर क्या नज़्म होगी 


Nazm ka vaada : Gulzar

मुझसे इक नज़्म का वादा है, मिलेगी मुझको

डूबती नब्ज़ों में जब दर्द को नींद आने लगे

ज़र्द-सा चेहरा लिए चाँद उफ़क़ पर पहुंचे

दिन अभी पानी में हो, रात किनारे के करीब

न अँधेरा, न उजाला हो, यह न रात, न दिन 

जिस्म जब ख़त्म हो और रूह को जब सांस आये

मुझसे इक नज़्म का वादा है, मिलेगी मुझको ।