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Awesome Poetry of Gulzar


देखो, आहिस्ता चलो, और भी आहिस्ता ज़रा,


देखना, सोच-सँभल कर ज़रा पाँव रखना,


ज़ोर से बज न उठे पैरों की आवाज़ कहीं.


काँच के ख़्वाब हैं बिखरे हुए तन्हाई में,


ख़्वाब टूटे न कोई, जाग न जाये देखो,


जाग जायेगा कोई ख़्वाब तो मर जाएगा.

Gulzar on Dreams

देखो, आहिस्ता चलो, और भी आहिस्ता जरा
देखना, सोच संभल कर ज़रा पाँव रखना
ज़ोर से बज न उठें पैरों की आवाज़ कहीं
कांच के ख्वाब हैं बिखरे हुए तन्हाई में
ख्वाब टूटे न कोई, जाग न जाए देखो

जाग जायेगा कोई ख्वाब, तो मर जायेगा ।


Excellent creation of Gulzar

जीने की राह :


काले घर में सूरज रख के,
तुमने शायद सोचा था, मेरे सब मोहरे पिट जायेंगे 
मैंने एक चिराग जलाकर,
अपना रास्ता खोल लिया 

तुमने एक समंदर हाथ में ले कर,
मुझ पर ठेल दिया 
मैंने नूह की कश्ती उसके ऊपर रख दी 

काल चला तुमने, और मेरी जानिब देखा 
मैंने काल को तोड़ के लम्हा लम्हा जीना सीख लिया 


Tanha ( तन्हा ) : Gulzar

कहाँ छुपा दी है रात तूने 
कहाँ छुपाये है तूने अपने गुलाबी हाथों के ठन्डे फाये 
कहाँ है तेरे लबों के चेहरे 
कहाँ है तू आज - तू कहाँ है ? 

ये मेरे बिस्तर पे कैसा सन्नाटा सो रहा है ?


Gulzar : Aah !

ठंडी सांसें न पालो सीने में 
लम्बी साँसों में सांप रहते हैं 
ऐसी ही एक सांस ने इक बार 
डस लिया था हसीं क्लियोपेत्रा को

मेरे होठों पे अपने लब रखकर 
फूँक दो सारी साँसों को ' बीबा '

मुझको आदत है ज़हर पीने की 


Chandni by Gulzar

पूर्णमाशी की रात जंगल में 
जब कभी चांदनी बरसती है 
पत्तों में टिकलियाँ-सी बजती है 

पूर्णमाशी की रात जंगल में 
नीले शीशम के पेड़ के नीचे 
बैठकर तुम कभी सुनो, ' जानम '
चांदनी में धुली हुई मद्धम 
भीगी-भीगी उदास आवाज़ें 
नाम लेकर पुकारती हैं तुम्हे 

कितने सदियों से ढूंढती होंगी 
तुमको ये चांदनी की आवाज़ें 




गली में : gulzar

बारिश होती है तो पानी को भी लग जाते हैं पाँव 
दरो दीवार से टकरा के गुज़रता है गली से 
और उछलता है छपाकों में 
किसी मैच में जीते हुए लड़कों की तरह,

जीत कर आते हैं जब मैच गली के लड़के 
जूते पहने हुए कैनवास के उछलते हुए गेंदों की तरह 
दरो दीवार से टकरा के गुज़रते हैं 
वो पानी के छपाकों की तरह 


Virasat by Gulzar

अपनी मर्ज़ी से तो मजहब भी नहीं उसने चुना था 
उसका मजहब था जो माँ बाप से ही उसने विरासत में लिया था 

अपने माँ बाप चुने कोई ये मुमकिन ही कहाँ है ?
उस पे ये मुल्क भी लाज़िम था, कि माँ बाप का घर था इसमें 
ये वतन उसका चुनाव तो नहीं था 

वो तो कुल नौ ही बरस का था उसे क्यूँ चुनकर 
फ़िर्कादाराना फ़सादात ने कल क़त्ल किया....।



Painting by Gulzar

रात कल गहरी नींद में थी जब
एक ताज़ा सफ़ेद कैनवस पर
आतिशीं लाल सुर्ख रंगों से
मैंने रोशन किया था इक सूरज

सुबह तक जल गया था वो कैनवस
राख बिखरी हुई थी कमरे में....!




Gulzar : Honeymoon

कल तुझे सैर करवाएंगे समन्दर से लगी गोल सड़क की
रात को हार सा लगता है समन्दर के गले में !

घोड़ा गाडी पे बहुत दूर तलक सैर करेंगे 
धोडों की टापों से लगता है कि कुछ देर के राजा है हम !
गेटवे ऑफ इंडिया पे देखेंगे हम ताज महल होटल 
जोड़े आते हैं विलायत से हनीमून मनाने,
तो ठहरते हैं यही पर !

आज की रात तो फुटपाथ पे ईंट रख कर,
गर्म कर लेते हैं बिरयानी जो ईरानी के होटल से मिली है 
और इस रात मना लेंगे "हनीमून" यहीं जीने के नीचे !

हाय, कौन न मर मिटे इस सादगी पर… इतने सरल शब्दों में भी आम इंसान की भावना को जिस ख़ूबसूरती से गुलज़ार साब ने अपने अंदाज़ में पिरोया है वोही इन्हे अपने समकालीन शायरों में एक अलहदा स्थान दिलाती है...बीड़ी, चिमटा, चटाई, तम्बाकू, केसर, सुपारी, कत्था, चिलम इत्यादि सैकड़ों शब्द जो रोजमर्रा की ज़िन्दगी में काम आते है, उनको अपनी रचनाओ में शामिल कर गुलज़ार ने इन्हे भी vip रुतबा तो दिला ही दिया है....ये आम शब्द भी किसी नज़्म या गीत में शामिल होकर श्रोताओ को ख़ास अहसास दिलाते है…वैसे साहित्य जितना मिटटी से जुड़ा हो उतना ही अवाम के दिल में उतरता है.…
सच कहें तो कैसे भूल सकते है गुलज़ार के अहसान कोई कि इन्होने ही ग़ालिब को हिंदुस्तान के घर घर में पहुँचाया, आज भी लोग इंटरनेट के जरिये ग़ालिब को इनके सीरियल के द्वारा ही जान पाते है....मीरा जैसे चरित्र को किताबों से निकाल कर फ़िल्म के जरिये सब के सामने रखा, हाल ही में टैगोर की बंगाली रचनाओ का हिंदी अनुवाद किया....मुंशी प्रेम चंद की रचना पर सीरियल बनाया " किरदार "....बच्चों के लिए कहानी, गीत इनके सर्वप्रिय है ही…इनकी फ़िल्में देखने पर भी महसूस होता है कि संवाद व कहानी ही स्क्रीन की सतह पर लहरा रही होती है एक गहराई लिए हुए.…किरदार तो सिर्फ उस सतह पर तैरने भर का काम करते है....संजीव कुमार महान अभिनेता साबित हुए अधिकतर गुलज़ार की फिल्मों से ही....भारत का एकमात्र गीतकार जिसने हमे ऑस्कर अवार्ड दिलाया…वैसे सारी बातें आज ही कर ली तो आगे के लिए कुछ नहीं बचेगा....लेकिन मिर्ज़ा ग़ालिब के गुलज़ार रचित सीरियल का विडियो आपके लिए छोड़े जाते हैं…आपकी ज़िन्दगी का श्रेष्ठ अनुभव होगा ये मेरा दावा है…तब तक जय जय.…

                                                                                                                       " श्री लाल राठी "