Gulzar - Ustad Amzad Ali ( Album Vaada )

ऐसा कोई ज़िन्दगी से वादा तो नहीं था
तेरे बिना जीने का इरादा तो नहीं था

तेरे लिए रातों में चांदनी उगाई थी
क्यारियों में खुशबु की रौशनी लगाई थी
जाने कहाँ टूटी है डोर मेरे ख़्वाब की
ख़्वाब से जागेंगे सोचा तो नहीं था

शामियाने शामों के रोज ही सजाये थे
कितनी उम्मीदों के मेहमां बुलाये थे
आ के दरवाज़े से लौट गए हो
यूँ भी कोई आएगा सोचा तो नहीं था

singer : roop kumar rothore

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हर बात पे हैरां है, मूरख है ये नादां है 
मैं दिल से परेशां हूँ, दिल मुझसे परेशां है 

हर एक हसीं चीज को छूने की उमंग है 
मैं आग कहूँ, कहता है ये शहद का रंग है 
मैं कहके पशेमां हूँ ये सुनके पशेमां है 

है जिस्म हसीं लेकिन पौशाक ये तंग है 
क्यूँ बाँध के रखा है ये उड़ने की पतंग है 
मैं इसपे मेहरबां हूँ ये मुझपे मेहरबां है 

singer : Roop Kr Rathore & Sonali Rathore

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डूब रहे हो और बहते हो 
दरिया किनारे क्यूँ रहते हो 

याद आते हैं वादे जिनके 
तेज हवा में सूखे तिनके 
उनकी बातें क्यूँ कहते हो 

बात करें तो रुख़सारों में 
दो चकराते भंवर पड़ते हैं 
मझधारों में क्यूँ रहते हो 

singer : Roop Kr Rathore

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ये सुबह सांस लेगी और बादबाँ खुलेगा 
पलकें उठाओ जानम, ये आसमां खुलेगा 

आँखों के नीचे थोड़ा सा काजल ढलक गया है 
पलकें उठाओ ख्वाब का आँचल अटक गया है 
पलकों से बाँधा सपना जाने कहाँ खुलेगा.......ये सुबह

आँखों से नींद खोलो, दरिया रुके हुए हैं 
और पर्वतों पे कब से बादल झुके हुए हैं 
ये रात बंद हो तो दिन का समां खुलेगा........ये सुबह

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आँखों में सावन छलका हुआ है 
आंसू है कोई अटका हुआ है 

आँखों की हिचकी रूकती नहीं है 
रोने से कब दिल हल्का हुआ है 

सीने में टूटी है चीज कोई 
खामोश से एक खटका हुआ है 

चारों तरफ तू, बस तू ही तू है 
मुझसे ज़ियादा भटका हुआ है 

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This song is special for teen-age youth..so touchy.

चोरी चोरी की वो झांकियां, झूठी छींके, झूठी खांसिया 
देख के सबको तुझपे नज़र जाती थी 
शाम तेरी गली में गुजर जाती थी 

देखना भी नहीं और वहीं देखना 
कोई कंकर उठा कर कहीं फेंकना 
तेरी खिड़की का पर्दा खिसकता हुआ 
कांच पर एक साया सरकता हुआ 
साँस रुक जाती थी, आँख भर जाती थी
शाम तेरी गली में गुजर जाती थी 

पान वाले से बेवजह की यारियां 
और यारों से छुपने की दुश्वारियां 
डाकिये से कभी कोई ख़त पूछना 
लिखके कागज़ पे कुछ भी गलत पूछना - 2 
आँख से कह दिया कुछ तो डर जाती थी 
शाम तेरी गली में गुजर जाती थी

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