Album Passion

जब भी तन्हाई से घबरा के सिमट जाते हैं 
हम तेरी याद के दामन से लिपट जाते हैं 

उन पे तूफां को भी अफ़सोस हुआ करता है 
वो सफ़ीने जो किनारे पे उलट जाते हैं 

हम तो आये थे रहें शाख़ में फूलों की तरह 
तुम अगर खार समझते हो तो हट जाते हैं 

                                  सुदर्शन फ़ाकिर


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ये भी क्या अहसान कम है देखिये ना आपका 
हो रहा है हर तरफ चर्चा हमारा आपका 

चाँद में तो दाग है पर आप में तो वो भी नहीं 
चौदहवी के चाँद से बढ़के चेहरा है आपका 

इश्क़ में ऐसे भी हम डूबे हुए हैं आपके 
अपने चेहरे पे सदाहोता है धोखाआपका 

चाँद सूरज धुप सुबह कहकशां तारे शमा 
हर उजाले ने चुराया है उजाला आपका 

                              वाज़िदा तबस्सुम

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ये क्या जाने में जाना है, जाते हो खफा होकर 
मैं जब जानूं मेरे दिल से चले जाओ जुदा होकर  

क़यामत तक उड़ेगी दिल से उठकर खाक आखों तक 
इसी रस्ते गया है हसरतों का काफ़िला होकर 

तुम्ही अब दर्दे दिल के नाम से घबराये जाते हो 
तुम्ही तो दिल में शायद आये थे दर्द-ऐ-आशियाँ होकर 

यूँ ही हम तुम घडी भर मिला करते थे बेहतर था 
ये दोनों वक़्त जैसे रोज मिलते हैं जुदा होकर 

                                  सीमाब अकबराबादी

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Come Alive By Jagjit Singh


कौन कहता है मुहब्बत की जुबाँ होती है 
ये हक़ीकत तो निगाहों से बयां होती है 

वो न आये तो सताती है ख़लिश सी दिल को 
वो जो आये तो ख़लिश और जवां होती है 

रूह को शाद करे, दिल को पुरनूर करे 
हर नज़ारे में ये तनवीर कहाँ होती है 

ज़िन्दगी इक सुलगती सी चिता है ' साहिर '
शोला बनती है न ये बुझके धुआं होती है 

                                         साहिर होशियारपुरी



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हरसू दिखाई देते हैं वो जलवागर मुझे 
क्या क्या फरेब देती है मेरी नज़र मुझे 

डाला है बेखुदी ने अजब राह पर मुझे 
आँखें है, और कुछ नहीं आता है नज़र मुझे 

दिल लेके मुझसे देते हो दाग-ऐ-जिगर मुझे 
ये बात भूलने की नहीं उम्र भर मुझे 

आया ना रास नाला-ऐ-दिल का असर मुझे 
अब तुम मिले तो कुछ नहीं अपनी खबर मुझे 

                                  जिगर मुरादाबादी

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कोई पास आया सवेरे सवेरे 
मुझे आजमाया सवेरे सवेरे 

मेरी दास्ताँ को जरा सा बदलकर 
मुझे ही सुनाया सवेरे सवेरे 

जो कहता था कल शब् सम्भलना सम्भलना 
वही लड़खड़ाया सवेरे सवेरे 

कटी रात सारी मेरी मैकदे में 
ख़ुदा याद आया सवेरे सवेरे 

जली थी शमा रात भर जिसकी खातिर 
उसीको जलाया सवेरे सवेरे 

                                                 सईद राही

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मेरी तन्हाइयों तुम ही लगा लो मुझको सीने से 
कि मैं घबरा गया हूँ इस तरह रो रो के जीने से 

ये आधी रात को फिर चूड़ियां सी क्या खनकती है 
कोई आता है या मेरी ही जंजीरें खनकती है 
ये बातें किस तरह पूछूं मैं सावन के महीने से 

पीने दो मुझे अपने ही लहू का जाम पीने दो 
ना सीने दो किसी को भी मेरा दामन ना सीने दो 
मेरी वहशत न बढ़ जाए कहीं दामन के सीने से 

                                                  prem warbartoni

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Munavvar Rana on Maa

उर्दू साहित्य में जो दर्जा ग़ालिब को प्राप्त है, हिंदी में जो तुलसीदास जी को है ।

माँ की शायरी ने मुनव्वर राना को वही दर्जा दिलाया है । आज के इस महान दिन पर आप लोगों के लिए नजराना :

लबों पे उसके कभी बददुआ नहीं होती                   
बस इक माँ है जो कभी ख़फा नहीं होती

इस तरह मेरे गुनाहों को वो धो देती है
माँ बहुत गुस्से में होती है तो रो देती है

मैंने रोते हुए पोंछे थे किसी दिन आंसू
मुद्दतों माँ ने नहीं धोया दुपट्टा अपना

जब भी कश्ती मेरी सैलाब में आ जाती है
माँ दुआ करती हुई ख्वाब में आ जाती है

ऐ अँधेरे देख ले मुंह तेरा काला हो गया
माँ ने आँखें खोल दी घर में उजाला हो गया

अभी ज़िंदा है माँ मेरी मुझे कुछ भी नहीं होगा
मैं जब घर से निकलता हूँ दुआ भी साथ चलती है

ये ऐसा कर्ज़ है जो मैं अदा कर ही नहीं सकता
मैं जब तक घर ना लौटूं मेरी माँ सजदे में रहती है

' मुनव्वर ' माँ के आगे यूँ कभी खुलकर मत रोना
जहाँ बुनियाद हो वहाँ इतनी नमी अच्छी नहीं होती

For Rajasthani songs lovers

प्यारे पाठकों, आपके लिए बेहद मशहूर और लोकप्रिय राजस्थानी गीतों के बोल ( lyrics )  भी उपलब्ध होंगे हमारे नए ब्लॉग पर :

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Qateel Shifaai at his best


चांदी जैसा रंग है तेरा, सोने जैसे बाल 
एक तू ही धनवान है गौरी, बाकि सब कंगाल 

हर आँगन में आये तेरे, उजले रूप की धुप 
छैल छबीली रानी थोड़ा घूँघट और निकाल 

भर भर नज़रें देखें तुझको आते जाते लोग 
देख तुझे बदनाम न कर दे हिरणी जैसी चाल 

सामने तू आये तो धड़के मिलकर लाखों दिल 
अब जाना धरती पर कैसे आते हैं भूचाल 

बीच में रंग महल है तेरा, खाई चारों ओर 
हमसे मिलने की गौरी अब तू ही राह निकाल 

Awesome Poetry of Gulzar


देखो, आहिस्ता चलो, और भी आहिस्ता ज़रा,


देखना, सोच-सँभल कर ज़रा पाँव रखना,


ज़ोर से बज न उठे पैरों की आवाज़ कहीं.


काँच के ख़्वाब हैं बिखरे हुए तन्हाई में,


ख़्वाब टूटे न कोई, जाग न जाये देखो,


जाग जायेगा कोई ख़्वाब तो मर जाएगा.

Gulzar : Ghazal

अपने आप जल गयी
कल की रात टल गयी
इक धुआं उठा था
फिर राख में बदल गयी
बून्द बून्द टपकी शब्
सड़कों पर पिघल गयी
कल जो रात टल गयी
कितना कुछ बदल गयी

Album :Classic Forever ( Jagjit Singh )



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तेरा चेहरा कितना सुहाना लगता है
तेरे आगे चाँद पुराना लगता है

तिरछे तिरछे तीर नज़र के लगते हैं
सीधा सीधा दिल पे निशाना लगता है

आग का क्या है पल दो पल में लगती है
बुझते बुझते एक ज़माना लगता है

सच तो ये है फूल का दिल भी छलनी है
हँसता चेहरा एक बहाना लगता है


                                 " कैफ़ भोपाली "

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मेरे क़रीब ना आओ के मैं शराबी हूँ
मेरा शऊर जगाओ के मैं शराबी हूँ

ज़माने भर की निगाहों से गिर चुका हूँ मैं
नज़र से तुम ना गिराओ के मैं शराबी हूँ

ये अर्ज़ करता हूँ गिर के ख़ुलूस वालो से
उठा सको तो उठाओ के मैं शराबी हूँ

तुम्हारी आँख से भर लूँ सुरूर आँखों में
नज़र नज़र से मिलाओ के मैं शराबी हूँ


                                    " सबा सीकरी "

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कौन आएगा यहाँ, कोई न आया होगा
मेरा दरवाज़ा हवाओं ने हिलाया होगा

दिल-ए-नादाँ न धड़क, ऐ दिल-ए-नादाँ न धड़क
कोई ख़त ले के पड़ौसी के घर आया होगा

गुल से लिपटी हुई तितली को गिरा कर देखो
आँधियों तुम ने दरख़्तों को गिराया होगा

‘कैफ’ परदेस में मत याद करो अपना मकाँ
अब के बारिश ने उसे तोड़ गिराया होगा


                                         " कैफ भोपाली "

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उसकी बातें बहार की बातें
वादी-ए-लालाज़ार* की बातें       ( गुलाब की वादी )

गुल-ओ-शबनम* का ज़िक्र कर ना अभी       ( फूल और ओस )
मुझको करनी है यार की बातें

मखमली फ़र्श पे हो जिनकें कदम
क्या वो समझेंगे ख़ार* की बातें       ( कांटे )

शेख़* जी मैकदा* है काबा* नहीं       ( पंडित, शराबखाना, मस्जिद )
याँ तो होंगी ख़ुमार की बाते

इश्क़ का कारवाँ चला भी नहीं
और अभी से ग़ुबार की बातें

ये क़फ़स* और तेरा ख़याल-ए-हसीं       ( पिंजरा )
उस पे हरसू बहार की बातें

याद है तुझसे गुफ़्तगू करना
कभी इश्क़, कभी रार की बातें

नसीम-ए-सहर* मुझे भी सुना,       ( सुबह की ठंडी हवा )
गेसू-ए-मुश्क़बार* की बातें       ( खुशबूदार जुल्फें )

जब सुकूँ है कफ़स* में ऐ 'राही'       ( पिंजरा )
क्यूँ करें हम फ़रार* की बातें       ( भागने की बात )

                              " सईद राही "


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हम तो हैं परदेस में, देस में निकला होगा चाँद
अपनी रात की छत पर कितना तनहा होगा चाँद

जिन आँखों में काजल बन कर तैरी काली रात
उन आँखों में आँसू का इक क़तरा होगा चाँद

रात ने ऐसा पेंच लगाया टूटी हाथ से डोर
आँगन वाले नीम में जाकर अटका होगा चाँद

चाँद बिना हर दिन यूँ बीता जैसे युग बीते
मेरे बिना किस हाल में होगा कैसा होगा चाँद


                                      " राही मासूम रज़ा "


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दिन आ गए शबाब के आँचल संभालिये
होने लगी है शहर में हलचल संभालिये

चलिए संभल संभल के कठिन राह-ऐ-इश्क़ है
नाज़ुक बड़ी है आपकी पायल संभालिये

सज धज के आप निकले सर-ए-राह ख़ैर हो
टकरा न जाए आपका पागल संभालिये

घर से ना जाओ दूर किसी अजनबी के साथ
बरसेंगे जोर-शोर से बादल संभालिये


                                            " मदन पाल "


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नींद के गाँव में आज यादों का बाज़ार है

खिलखिलाते हुए अपना दामन उठाते हुए
बच्चों के पाँव की धूल का कारवाँ
गाँव की हर गली अपने पैरों की ज़ंजीर है
गाँव का हर मकान अपने रस्ते की दीवार है
नींद के गाँव में आज यादों का बाज़ार है

एक अँगोछा लपेटे हुए वक़्त बैठा है दहलीज़ पर
बांस के झुण्ड़ से बचके चलती रहगुज़र
वो गली के किनारे पर बैठी वज़ू करती
मस्जि़द की एक मीनार पर
कब की अटकी हुई इक अज़ान
जिसका सन्नाटा तलवार की धार है
नींद के गाँव में आज यादों का बाज़ार है

मैं भी बरगद के साये में बैठी हुई
अपनी यादों की परछाईयाँ बेच दूँ
मेरे लफ्ज़ों में है उस उदासी कहानी का रस
जिसपे चलता न था कच्चे आँगन का बस
निमकियों के कड़े सख़्त लड़े
जो न जाने थे किसके लिए
आज भी किस कदर याद है
नींद के गाँव में आज यादों का बाज़ार है



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Hasrat Jaipuri : Ghazal

चल मेरे साथ ही चल, ऐ मेरी जान-ऐ-ग़ज़ल 
इन समाजों के बनाये बंधन से निकल, चल 

हम वहां जाएँ, जहाँ प्यार पर पहरे न लगे 
दिल की दौलत पे जहाँ, लुटेरे न कोई लगें 
कब है बदला ये ज़माना, तू ज़माने को बदल, चल 

प्यार सच्चा हो तो राहें भी निकल आती हैं 
बिजलियाँ अर्श से खुद रास्ता दिखाती हैं 
तू भी बिजली की तरह ग़म के अंधेरों से निकल, चल 

अपने मिलने पे जहाँ कोई भी ऊँगली न उठे 
अपनी चाहत पे जहाँ कोई दुश्मन न हँसे 
छेद दे प्यार से तू साज़-ऐ-मोहब्बत-ऐ-ग़ज़ल, चल 

पीछे मत देख, न शामिल हों गुनहगारों में 
सामने देख कि मंजिल है तेरी तारों में 
बात बनती है अगर इरादे हों अटल, चल 

Rahat Indori : Ghazal

मोम के पास कभी आग को लेकर देखूं 
सोचता हूँ के तुझे हाथ लगाकर देखूं 

मैंने देखा है ज़माने को शराब पीकर 
दम निकल जाए अगर होश में आकर देखूं 

दिल का मंदिर बड़ा वीरान नज़र आता है 
सोचता हूँ तेरी तस्वीर लगा कर देखूं 

तेरे बारे में सुना है ये कि तू सूरज है 
मैं जरा देर तेरे साये में आकर देखूं 

याद आता है के पहले भी कर बार यूँ ही 
मैंने सोचा था के तुझे भुलाकर देखूं 

Gulzar : Humko man ki shakti dena

हमको मन की शक्ति देना, मन विजय करें 
दूसरों की जय से पहले, खुद को जय करें 

भेदभाव अपने दिल से साफ़ कर सकें 
दोस्तों से भूल हो तो माफ़ कर सकें 
झूठ से बचे रहें, सच का दम भरें 
दूसरों की जय से पहले, खुद को जय करें

मुश्किल पड़े हमपे तो इतना कर्म कर 
साथ दें तो धर्म का, चलें तो धर्म पर 
खुद पर हौसला रहे, बदी से ना डरें 
दूसरों की जय से पहले, खुद को जय करें

हमको मन की शक्ति देना, मन विजय करें 
दूसरों की जय से पहले, खुद को जय करें 

movie : guddi
music : vasant desai
singer : vaani jairam

Hosh walon ko Khabar Kya

होश वालों को खबर क्या, बेखुदी क्या चीज़ है 
इश्क़ कीजे, फिर समझिये, ज़िन्दगी क्या चीज़ है 

उनसे नज़रें क्या मिलीं, रोशन फ़िज़ाएं हो गईं 
आज जाना, प्यार की जादूगरी क्या चीज़ है 

खुलती जुल्फों ने सिखाई, मौसमों को शायरी 
झुकती आँखों ने बताया, मैकशी क्या चीज़ है 

हम लबों से कह न पाए, उनसे हाल-ए-दिल कभी 
और वो समझे नहीं ये, ख़ामोशी क्या चीज़ है 

                                 "  निदा फ़ाज़ली "       

Album Soz : Jagjit singh and Javed Akhtar

तमन्‍ना फिर मचल जाए, अगर तुम मिलने आ जाओ
यह मौसम ही बदल जाए, अगर तुम मिलने आ जाओ

मुझे ग़म है कि मैने ज़िन्दगी में कुछ नहीं पाया
ये ग़म दिल से निकल जाए, अगर तुम मिलने आ जाओ

ये दुनिया भर के झगड़े, घर के किस्‍से, काम की बातें
बला हर एक टल जाए, अगर तुम मिलने आ जाओ

नहीं मिलते हो मुझसे तुम तो सब हमदर्द हैं मेरे
ज़माना मुझसे जल जाए, अगर तुम मिलने आ जाओ


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आज मैंने अपना फिर सौदा किया
और फिर मैं दूर से देखा किया

ज़िन्‍दगी भर मेरे काम आए उसूल
एक एक करके उन्‍हें बेचा किया

कुछ कमी अपनी वफ़ाओं में भी थी
तुम से क्‍या कहते के तुमने क्‍या किया

हो गई थी दिल को कुछ उम्‍मीद सी
ख़ैर तुमने जो किया अच्‍छा किया


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अब अगर आओ तो जाने के लिए मत आना
सिर्फ अहसान जताने के लिए मत आना

मैंने पलकों पे तमन्‍नाएँ सजा रखी हैं
दिल में उम्‍मीद की सौ शम्‍मे जला रखी हैं
ये हसीं शम्‍मे बुझाने के लिए मत आना

प्‍यार की आग में ज़ंजीरें पिघल सकती हैं
चाहने वालों की तक़दीरें बदल सकती हैं
तुम हो बेबस ये बताने के लिए मत आना

अब तुम आना जो तुम्‍हें मुझसे मुहब्‍बत है कोई
मुझसे मिलने की अगर तुमको भी चाहत है कोई
तुम कोई रस्‍म निभाने के लिए मत आना


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आप भी आइये हमको भी बुलाते रहिये
दोस्ती जुर्म नहीं दोस्त बनाते रहिये

ज़हर पी जाइये और बाँटिये अमृत सब को
ज़ख्म भी खाइये और गीत भी गाते रहिये

वक़्त ने लूट लीं लोगों की तमन्नाएँ भी
ख़्वाब जो देखिये औरों को दिखाते रहिये

शक्ल तो आपके भी ज़हन में होगी कोई
कभी बन जाएगी तस्वीर बनाते रहिये


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क्‍यों डरें ज़िन्‍दगी में क्‍या होगा
कुछ ना होगा तो तज़ुर्बा होगा

हँसती आँखों में झाँक कर देखो
कोई आँसू कहीं छुपा होगा

इन दिनों ना-उम्‍मीद सा हूँ मैं
शायद उसने भी ये सुना होगा

देखकर तुमको सोचता हूँ मैं
क्‍या किसी ने तुम्‍हें छुआ होगा


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तुम बैठे हो लेकिन जाते देख रहा हूँ
मैं तन्हाई के दिन आते देख रहा हूँ

आने वाले लम्हे से दिल सहमा है
तुमको भी डरते घबराते देख रहा हूँ

कब यादों का ज़ख्म भरे कब दाग मिटे
कितने दिन लगते हैं भुलाते देख रहा हूँ

उसकी आँखों में भी काजल फैला है
मैं भी मुड़ के जाते जाते देख रहा हूँ


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इक पल ग़मों का दरिया इक पल खुशी का दरिया
थमता नहीं कहीं भी ये ज़िन्दगी का दरिया

आँखें थी वो किसी की या ख़्वाब के जज़ीरे
आवाज़ थी किसी की या रागिनी का दरिया

इस दिल की वादियों में अब ख़ाक उड़ रही है
बहता यहीं था पहले इक आशिक़ी का दरिया

किरनों में हैं ये लहरें या लहरों में हैं किरनें
दरिया की चाँदनी है या चाँदनी का दरिया

जज़ीरे : टापू 

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प्यास की कैसे लाए ताब कोई
नहीं दरिया तो हो सराब कोई

रात बजती थी दूर शहनाई
रोया पीकर बहुत शराब कोई

कौन-सा ज़ख़्म किसने बख़्शा है
इसका रक्खे कहाँ हिसाब कोई

फ़िर मैं सुनने लगा हूँ इस दिल की
आने वाला है फिर अज़ाब कोई

ताब : सहनशक्ति 
सराब : तृष्णा 
अज़ाब : दुःख 

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all ghazals lyrics are penned by Javed Akhtar.

Tum to Nahi ho : Jagjit singh and Bashir Badr

All Lyrics in this album are from pen of  ' Bashir Badr '

सुन ली जो ख़ुदा ने वो दुआ तुम तो नहीं हो 
दरवाज़े पे दस्तक की सदा तुम तो नहीं हो 

महसूस किया तुमको तो गीली हुई पलकें 
भीगे हुए मौसम की अदा तुम तो नहीं हो 

अनजानी सी राहों में नहीं कोई भी मेरा 
किसने मुझे अपना कहा तुम तो नहीं हो 

दुनिया को बहरहाल गिले-शिकवे रहेंगे 
दुनिया की तरह मुझसे खफ़ा तुम तो नहीं हो 

                                     
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मुझे तुमसे मोहब्बत हो गई है
ये दुनिया खूबसूरत हो गई है

ख़ुदा से रोज़ तुमको मांगता हूँ
मेरी चाहत इबादत हो गई है

वो चेहरा चाँद है, आँखें सितारे
ज़मीं फूलों को जन्नत हो गई है

बहुत दिन से तुम्हे देखा नहीं है
चले ही आओ मुद्दत हो गई है

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रात आँखों में ढली, पलकों पे जुगनू आये
हम हवाओं की तरह जाके, उसे छू आये

बस गई है मेरे अहसास में ये कैसी महक
कोई खुशबू मैं लगाऊं तो तेरी खुशबू आये

उसने छू कर मुझे पत्थर से इंसान किया
मुद्दतों बाद मेरी आँख में आंसू आये

मैंने दिन रात ख़ुदा से ये दुआ मांगी थी
कोई आहट ना हो दर पर मेरे जब तू आये

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कभी तो आसमां से चाँद उतरे जाम हो जाये
तुम्हारे नाम की इक ख़ूबसूरत शाम हो जाए

वो मेरा नाम सुनकर कुछ जरा शरमा से जाते हैं
बहुत मुमकिन है कहीं इसका मोहब्बत ना हो जाए

जरा सा मुस्कुरा कर हाल पूछो दिल बहल जाए
हमारा काम हो जाए, तुम्हारा नाम हो जाए

उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो
न जाने किस गली में ज़िन्दगी की शाम हो जाए

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खुश रहे या बहुत उदास रहे 
ज़िन्दगी तेरे आस पास रहे 

आज हम सब के साथ खूब हँसे 
और फिर देर तक उदास रहे 

रात के रास्ते भी रोशन हों 
हाथ में चाँद का गिलास रहे 

आदमी के लिये जरुरी है
कोई उम्मीद, कोई आस रहे 

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वो नहीं तो मलाल क्या, जो गुजर गया सो गुजर गया 
उसे याद करके ना दिल दुखा, जो गुजर गया सो गुजर गया 

ना गिला किया, ना ख़फा हुए,  यूँ ही रास्ते में जुदा हुए 
ना तू बेवफा ना मैं बेवफा, जो गुजर गया सो गुजर गया

तुझे ऐतबार-ओ-यकीं नहीं, नहीं दुनिया इतनी बुरी नहीं 
ना मलाल कर, मेरे साथ आ, जो गुजर गया सो गुजर गया

वो वफायें थी, कि जफ़ाएं थी, ये न सोच किसकी खतायें थीं 
वो तेरा है, उसको गले लगा, जो गुजर गया सो गुजर गया

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Aas hogi naa aasra hoga : Bashir Badr

आस होगी न आसरा होगा
आने वाले दिनों में क्या होगा


मैं तुझे भूल जाऊँगा इक दिन
वक़्त सब कुछ बदल चुका होगा

नाम हम ने लिखा था आँखों में
आँसुओं ने मिटा दिया होगा

आसमाँ भर गया परिंदों से
पेड़ कोई हरा गिरा होगा


कितना दुश्वार था सफ़र उस का
वो सर-ए-शाम सो गया होगा

Royal Salute

कृपया ग़ज़ल के निचे दिए गए ऑप्शन में Average, Good, Excellent  रेटिंग जरूर देवें ।


मान मौसम का कहा, छायी घटा जाम उठा 
आग से आग बुझा, फूल खिला जाम उठा 

ऐ मेरे यार, तुझे उसकी कसम देता हूँ 
भूल जा शिकवा-गिला, हाथ मिला जाम उठा 

एक पल भी कभी हो जाता है सदियों जैसा 
देर क्या करना यहाँ, हाथ बढ़ा जाम उठा 

प्यार ही प्यार है सब लोग बराबर है यहाँ 
मयकदे में कोई छोटा न बड़ा, जाम उठा 

मान मौसम का कहा, छायी घटा जाम उठा 
आग से आग बुझा, फूल खिला जाम उठा 

                                    " बशीर बद्र "

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मेरे करीब न आओ, कि मैं शराबी हूँ 
मेरा शऊर जगाओ, कि मैं शराबी हूँ 

ज़माने भर की निगाहों से गिर चुका हूँ मैं 
नज़र से तुम न गिराओ कि मैं शराबी हूँ 

ये अर्ज़ करता हूँ गिर के ख़ुलूस वालों से 
उठा सको तो उठाओ कि मैं शराबी हूँ

तुम्हारी आँख से भर लूँ सुरूर आँखों में 
नज़र नज़र से मिलाओ कि मैं शराबी हूँ

ख़ुलूस : अच्छे लोग 

                                                  "  सबा सीकरी "

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झूम के जब रिंदों ने पिला दी 
शेख ने चुपके चुपके दुआ दी 

एक कमी थी ताजमहल में 
हमने तेरी तस्वीर लगा दी 

तेरी गली में सज़दे करके 
हमने इबादतगाह बना दी 

आपने झूठा वादा करके 
आज हमारी उम्र बढा दी 

                                          " Kaif Bhopali :      

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नज़र नज़र से मिला कर शराब पीते हैं 
हम उनको पास बिठाकर शराब पीते हैं 

इसीलिए तो अंधेरा है मयकदे में बहुत 
यहाँ घरों को जलाकर शराब पीते हैं 

हमें तुम्हारे सिवा कुछ नज़र नहीं आता 
तुम्हे नज़र में सजाकर शराब पीते हैं 

उन्हीं के हिस्से में आती है प्यास ही अक्सर 
जो दूसरों को रुलाकर शराब पीते है 

                                                            " Tasneem Faruqi "

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ये पीने वाले बहुत ही अजीब होते हैं 
जहाँ से दूर ये खुद के करीब होते हैं 

किसी को प्यार मिले, और किसी को रुसवाई 
मोहब्बतों के सफर भी अजीब होते हैं 

मिला किसी को है क्या सोचिये अमीरी से 
दिलों के शाह तो अक्सर ग़रीब होते हैं 

यहाँ के लोगों की है ख़ासियत ये सबसे बड़ी 
हबीब लगते हैं लेकिन रक़ीब होते हैं 

                                                    अज्ञात 
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आप आये जनाब बरसों में 
हमने पी है शराब बरसों में 

दिल से दिल की कली खिली अपनी 
फिर से देखा शबाब बरसों में 

तुम कहाँ थे, कहाँ रहे साहिब  
आज होगा हिसाब बरसों में 

पहले नादां थे अब हुए दाना
उनको आया अदब बरसों में 

इसी उम्मीद पे मैं ज़िंदा हूँ 
क्या वो देंगे जवाब बरसों में 

                                          " Rustam Sehgal 'wafa' "

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बात साक़ी की ना टाली जाएगी 
करके तौबा तोड़ डाली जाएगी 

देख लेना वो न खाली जाएगी 
आह जो दिल निकाली जायेगी 

गर यही तर्ज-ए-फुगाँ है अंदलीब 
तू भी गुलशन से निकाली जाएगी 

आते आते आएगा उनको ख्याल 
जाते जाते बेखयाली जाएगी 

क्यों नहीं मिलती गले से तेग-ए-नाज़ 
ईद क्या अबके भी खाली जायेगी 

                                                      " Jalil Manikpuri "

तर्ज-ए-फुगाँ : दुहाई देने का तरीका 
अंदलीब : बुलबुल 
बेखयाली : असावधानी 
तेग-ए-नाज़ : घमंडी 

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