Showing posts with label baat saqi ki na. Show all posts
Showing posts with label baat saqi ki na. Show all posts

Royal Salute

कृपया ग़ज़ल के निचे दिए गए ऑप्शन में Average, Good, Excellent  रेटिंग जरूर देवें ।


मान मौसम का कहा, छायी घटा जाम उठा 
आग से आग बुझा, फूल खिला जाम उठा 

ऐ मेरे यार, तुझे उसकी कसम देता हूँ 
भूल जा शिकवा-गिला, हाथ मिला जाम उठा 

एक पल भी कभी हो जाता है सदियों जैसा 
देर क्या करना यहाँ, हाथ बढ़ा जाम उठा 

प्यार ही प्यार है सब लोग बराबर है यहाँ 
मयकदे में कोई छोटा न बड़ा, जाम उठा 

मान मौसम का कहा, छायी घटा जाम उठा 
आग से आग बुझा, फूल खिला जाम उठा 

                                    " बशीर बद्र "

*******************************************************

मेरे करीब न आओ, कि मैं शराबी हूँ 
मेरा शऊर जगाओ, कि मैं शराबी हूँ 

ज़माने भर की निगाहों से गिर चुका हूँ मैं 
नज़र से तुम न गिराओ कि मैं शराबी हूँ 

ये अर्ज़ करता हूँ गिर के ख़ुलूस वालों से 
उठा सको तो उठाओ कि मैं शराबी हूँ

तुम्हारी आँख से भर लूँ सुरूर आँखों में 
नज़र नज़र से मिलाओ कि मैं शराबी हूँ

ख़ुलूस : अच्छे लोग 

                                                  "  सबा सीकरी "

********************************************************

झूम के जब रिंदों ने पिला दी 
शेख ने चुपके चुपके दुआ दी 

एक कमी थी ताजमहल में 
हमने तेरी तस्वीर लगा दी 

तेरी गली में सज़दे करके 
हमने इबादतगाह बना दी 

आपने झूठा वादा करके 
आज हमारी उम्र बढा दी 

                                          " Kaif Bhopali :      

********************************************************

नज़र नज़र से मिला कर शराब पीते हैं 
हम उनको पास बिठाकर शराब पीते हैं 

इसीलिए तो अंधेरा है मयकदे में बहुत 
यहाँ घरों को जलाकर शराब पीते हैं 

हमें तुम्हारे सिवा कुछ नज़र नहीं आता 
तुम्हे नज़र में सजाकर शराब पीते हैं 

उन्हीं के हिस्से में आती है प्यास ही अक्सर 
जो दूसरों को रुलाकर शराब पीते है 

                                                            " Tasneem Faruqi "

*********************************************************

ये पीने वाले बहुत ही अजीब होते हैं 
जहाँ से दूर ये खुद के करीब होते हैं 

किसी को प्यार मिले, और किसी को रुसवाई 
मोहब्बतों के सफर भी अजीब होते हैं 

मिला किसी को है क्या सोचिये अमीरी से 
दिलों के शाह तो अक्सर ग़रीब होते हैं 

यहाँ के लोगों की है ख़ासियत ये सबसे बड़ी 
हबीब लगते हैं लेकिन रक़ीब होते हैं 

                                                    अज्ञात 
                                                **********************************************************

आप आये जनाब बरसों में 
हमने पी है शराब बरसों में 

दिल से दिल की कली खिली अपनी 
फिर से देखा शबाब बरसों में 

तुम कहाँ थे, कहाँ रहे साहिब  
आज होगा हिसाब बरसों में 

पहले नादां थे अब हुए दाना
उनको आया अदब बरसों में 

इसी उम्मीद पे मैं ज़िंदा हूँ 
क्या वो देंगे जवाब बरसों में 

                                          " Rustam Sehgal 'wafa' "

***********************************************************

बात साक़ी की ना टाली जाएगी 
करके तौबा तोड़ डाली जाएगी 

देख लेना वो न खाली जाएगी 
आह जो दिल निकाली जायेगी 

गर यही तर्ज-ए-फुगाँ है अंदलीब 
तू भी गुलशन से निकाली जाएगी 

आते आते आएगा उनको ख्याल 
जाते जाते बेखयाली जाएगी 

क्यों नहीं मिलती गले से तेग-ए-नाज़ 
ईद क्या अबके भी खाली जायेगी 

                                                      " Jalil Manikpuri "

तर्ज-ए-फुगाँ : दुहाई देने का तरीका 
अंदलीब : बुलबुल 
बेखयाली : असावधानी 
तेग-ए-नाज़ : घमंडी 

*********************************************************

















jagjit singh : Album Desires

गुलशन की फ़क़त फूलों से नहीं काँटों से भी जीनत होती है
जीने के लिए इस दुनिया में ग़म की भी जरुरत होती है

ऐ वाइज़-ए-नादान करता है तू एक क़यामत का चर्चा
यहाँ रोज निगाहें मिलती हैं यहाँ रोज क़यामत होती है

वो पुर्सिश-ए-ग़म को आये हैं कुछ कह न सकूं चुप रह न सकूं
खामोश रहूँ तो मुश्किल है कह दू तो शिकायत होती है

करना ही पड़ेगा जब्त-ए-आलम पीने ही पड़ेंगे ये आंसू
फरियाद-ओ-फुगां से ऐ नादाँ तोहीन-ए-मोहब्बत होती है

जो आके रुके दामन पे सदा वो अश्क नहीं है पानी है 
जो अश्क न छलके आँखों से उस अश्क की कीमत होती है 

                                                " saba afghani "

*********************************************************************************

काँटों की चुभन पाई, फूलों का मज़ा भी 
दिल दर्द के मौसम में रोया भी हंसा भी 

आने का सबब याद न जाने की ही खबर है 
वो दिल में रहा और इसे तोड़ गया भी 

हर एक से मंज़िल का पता पूछ रहा है 
गुमराह मेरे साथ हुआ राहनुमा भी 

गुमनाम कभी अपनों से जो ग़म हुए हासिल 
कुछ याद रहे उनमे तो कुछ भूल गया भी 

                                               " Gumnam Surinder Malik "

*********************************************************************************

उल्फत का जब किसी ने लिया नाम, रो पड़े 
अपनी वफ़ा का सोचके हम अंजाम, रो पड़े 

हर शाम ये सवाल मुहब्बत से क्या मिला 
हर शाम ये जवाब कि, हर शाम रो पड़े 

राहे वफ़ा में हमको ख़ुशी की तलाश थी 
दो कदम ही चले थे कि हर कदम रो पड़े 


रोना नसीब में है तो औरों से क्या गिला 

अपने ही सर लिया कोई इलज़ाम, रो पड़े 

                                                    " Bashir Badr "

*********************************************************************************


जब नाम तेरा प्यार से लिखती हैं ऊँगलियाँ,
मेरी तरफ़ ज़माने की उठती हैं ऊँगलियाँ

दामन सनम का हाथ में आया था एक पल,
दिन रात उस एक पल से महकती हैं ऊँगलियाँ

जिस दिन से दूर हो गए, उस दिन से ही सनम,
बस दिन तुम्हारे आने के गिनती हैं ऊँगलियाँ

पत्थर तराश कर ना बना ताज एक नया,
फ़नकार की जहान में कटती हैं उँगलियाँ 


                                                  " Madan Pal "

*********************************************************************

अबके बरस भी वो नहीं आये बहार में
गुज़रेगा और एक बरस इंतज़ार में

ये आग इश्क़ की है बुझाने से क्या बुझे
दिल तेरे बस में है ना मेरे इख़्तियार में

है टूटे दिल में तेरी मुहब्बत, तेरा ख़याल
कुछ रंग है बहार के उजड़ी बहार में

आँसू नहीं हैं आँख में लेकिन तेरे बग़ैर
तूफ़ान छुपे हुए हैं दिल-ए-बेक़रार में

                                               ' पयाम सईदी '


*********************************************************************************************

बात साक़ी की न टाली जाएगी
कर के तौबा तोड़ डाली जाएगी

देख लेना वो न ख़ाली जाएगी
आह जो दिल से निकाली जाएगी

ग़र यही तर्ज़-ए-फ़ुग़ाँ है अन्दलीब
तू भी गुलशन से निकाली जाएगी

आते-आते आएगा उनको ख़याल
जाते-जाते बेख़याली जाएगी

क्यों नहीं मिलती गले से तेग़-ए-नाज़
ईद क्या अब के भी ख़ाली जाएगी


तर्ज़-ए-फ़ुग़ाँ = दुहाई का ढँग, अन्दलीब = बुलबुल
बेख़याली = ख्याल में गुम 

तेग़-ए-नाज़ = घमण्ड में चूर 

                                                           ' जलील मानिकपुरी '


***************************************************************************************

ये कैसी मुहब्बत कहाँ के फ़साने
ये पीने पिलाने के सब है बहाने

वो दामन हो उनका कि सुनसान सहरा
बस हमको तो आख़िर हैं आँसू बहाने

ये किसने मुझे मस्त नज़रों से देखा
लगे ख़ुद-ब-ख़ुद ही कदम लड़खडाने

चलो तुम भी 'गुमनाम' अब मैकदे में
तुम्हे दफ़्न करने हैं कई ग़म पुराने

                                                ' गुमनाम सुरिंदर मलिक '


***************************************************************************************

दिन आ गए शबाब के आँचल संभालिये
होने लगी है शहर में हलचल संभालिये 

चलिए संभल संभल के कठिन राह-ऐ-इश्क़ है
नाज़ुक बड़ी है आपकी पायल संभालिये

सज धज के आप निकले सर-ए-राह ख़ैर हो
टकरा न जाए आपका पागल संभालिये

घर से ना जाओ दूर किसी अजनबी के साथ
बरसेंगे जोर-शोर से बादल संभालिये

                                                       ' मदन पाल '


***********************************************************************************