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Royal Salute

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मान मौसम का कहा, छायी घटा जाम उठा 
आग से आग बुझा, फूल खिला जाम उठा 

ऐ मेरे यार, तुझे उसकी कसम देता हूँ 
भूल जा शिकवा-गिला, हाथ मिला जाम उठा 

एक पल भी कभी हो जाता है सदियों जैसा 
देर क्या करना यहाँ, हाथ बढ़ा जाम उठा 

प्यार ही प्यार है सब लोग बराबर है यहाँ 
मयकदे में कोई छोटा न बड़ा, जाम उठा 

मान मौसम का कहा, छायी घटा जाम उठा 
आग से आग बुझा, फूल खिला जाम उठा 

                                    " बशीर बद्र "

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मेरे करीब न आओ, कि मैं शराबी हूँ 
मेरा शऊर जगाओ, कि मैं शराबी हूँ 

ज़माने भर की निगाहों से गिर चुका हूँ मैं 
नज़र से तुम न गिराओ कि मैं शराबी हूँ 

ये अर्ज़ करता हूँ गिर के ख़ुलूस वालों से 
उठा सको तो उठाओ कि मैं शराबी हूँ

तुम्हारी आँख से भर लूँ सुरूर आँखों में 
नज़र नज़र से मिलाओ कि मैं शराबी हूँ

ख़ुलूस : अच्छे लोग 

                                                  "  सबा सीकरी "

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झूम के जब रिंदों ने पिला दी 
शेख ने चुपके चुपके दुआ दी 

एक कमी थी ताजमहल में 
हमने तेरी तस्वीर लगा दी 

तेरी गली में सज़दे करके 
हमने इबादतगाह बना दी 

आपने झूठा वादा करके 
आज हमारी उम्र बढा दी 

                                          " Kaif Bhopali :      

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नज़र नज़र से मिला कर शराब पीते हैं 
हम उनको पास बिठाकर शराब पीते हैं 

इसीलिए तो अंधेरा है मयकदे में बहुत 
यहाँ घरों को जलाकर शराब पीते हैं 

हमें तुम्हारे सिवा कुछ नज़र नहीं आता 
तुम्हे नज़र में सजाकर शराब पीते हैं 

उन्हीं के हिस्से में आती है प्यास ही अक्सर 
जो दूसरों को रुलाकर शराब पीते है 

                                                            " Tasneem Faruqi "

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ये पीने वाले बहुत ही अजीब होते हैं 
जहाँ से दूर ये खुद के करीब होते हैं 

किसी को प्यार मिले, और किसी को रुसवाई 
मोहब्बतों के सफर भी अजीब होते हैं 

मिला किसी को है क्या सोचिये अमीरी से 
दिलों के शाह तो अक्सर ग़रीब होते हैं 

यहाँ के लोगों की है ख़ासियत ये सबसे बड़ी 
हबीब लगते हैं लेकिन रक़ीब होते हैं 

                                                    अज्ञात 
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आप आये जनाब बरसों में 
हमने पी है शराब बरसों में 

दिल से दिल की कली खिली अपनी 
फिर से देखा शबाब बरसों में 

तुम कहाँ थे, कहाँ रहे साहिब  
आज होगा हिसाब बरसों में 

पहले नादां थे अब हुए दाना
उनको आया अदब बरसों में 

इसी उम्मीद पे मैं ज़िंदा हूँ 
क्या वो देंगे जवाब बरसों में 

                                          " Rustam Sehgal 'wafa' "

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बात साक़ी की ना टाली जाएगी 
करके तौबा तोड़ डाली जाएगी 

देख लेना वो न खाली जाएगी 
आह जो दिल निकाली जायेगी 

गर यही तर्ज-ए-फुगाँ है अंदलीब 
तू भी गुलशन से निकाली जाएगी 

आते आते आएगा उनको ख्याल 
जाते जाते बेखयाली जाएगी 

क्यों नहीं मिलती गले से तेग-ए-नाज़ 
ईद क्या अबके भी खाली जायेगी 

                                                      " Jalil Manikpuri "

तर्ज-ए-फुगाँ : दुहाई देने का तरीका 
अंदलीब : बुलबुल 
बेखयाली : असावधानी 
तेग-ए-नाज़ : घमंडी 

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