चल मेरे साथ ही चल, ऐ मेरी जान-ऐ-ग़ज़ल
इन समाजों के बनाये बंधन से निकल, चल
हम वहां जाएँ, जहाँ प्यार पर पहरे न लगे
दिल की दौलत पे जहाँ, लुटेरे न कोई लगें
कब है बदला ये ज़माना, तू ज़माने को बदल, चल
प्यार सच्चा हो तो राहें भी निकल आती हैं
बिजलियाँ अर्श से खुद रास्ता दिखाती हैं
तू भी बिजली की तरह ग़म के अंधेरों से निकल, चल
अपने मिलने पे जहाँ कोई भी ऊँगली न उठे
अपनी चाहत पे जहाँ कोई दुश्मन न हँसे
छेद दे प्यार से तू साज़-ऐ-मोहब्बत-ऐ-ग़ज़ल, चल
पीछे मत देख, न शामिल हों गुनहगारों में
सामने देख कि मंजिल है तेरी तारों में
बात बनती है अगर इरादे हों अटल, चल
इन समाजों के बनाये बंधन से निकल, चल
हम वहां जाएँ, जहाँ प्यार पर पहरे न लगे
दिल की दौलत पे जहाँ, लुटेरे न कोई लगें
कब है बदला ये ज़माना, तू ज़माने को बदल, चल
प्यार सच्चा हो तो राहें भी निकल आती हैं
बिजलियाँ अर्श से खुद रास्ता दिखाती हैं
तू भी बिजली की तरह ग़म के अंधेरों से निकल, चल
अपने मिलने पे जहाँ कोई भी ऊँगली न उठे
अपनी चाहत पे जहाँ कोई दुश्मन न हँसे
छेद दे प्यार से तू साज़-ऐ-मोहब्बत-ऐ-ग़ज़ल, चल
पीछे मत देख, न शामिल हों गुनहगारों में
सामने देख कि मंजिल है तेरी तारों में
बात बनती है अगर इरादे हों अटल, चल