Chandni by Gulzar
पूर्णमाशी की रात जंगल में
जब कभी चांदनी बरसती है
पत्तों में टिकलियाँ-सी बजती है
पूर्णमाशी की रात जंगल में
नीले शीशम के पेड़ के नीचे
बैठकर तुम कभी सुनो, ' जानम '
चांदनी में धुली हुई मद्धम
भीगी-भीगी उदास आवाज़ें
नाम लेकर पुकारती हैं तुम्हे
कितने सदियों से ढूंढती होंगी
तुमको ये चांदनी की आवाज़ें
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