Excellent creation of Gulzar

जीने की राह :


काले घर में सूरज रख के,
तुमने शायद सोचा था, मेरे सब मोहरे पिट जायेंगे 
मैंने एक चिराग जलाकर,
अपना रास्ता खोल लिया 

तुमने एक समंदर हाथ में ले कर,
मुझ पर ठेल दिया 
मैंने नूह की कश्ती उसके ऊपर रख दी 

काल चला तुमने, और मेरी जानिब देखा 
मैंने काल को तोड़ के लम्हा लम्हा जीना सीख लिया 


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