अपनी मर्ज़ी से तो मजहब भी नहीं उसने चुना था
उसका मजहब था जो माँ बाप से ही उसने विरासत में लिया था
अपने माँ बाप चुने कोई ये मुमकिन ही कहाँ है ?
उस पे ये मुल्क भी लाज़िम था, कि माँ बाप का घर था इसमें
ये वतन उसका चुनाव तो नहीं था
वो तो कुल नौ ही बरस का था उसे क्यूँ चुनकर
फ़िर्कादाराना फ़सादात ने कल क़त्ल किया....।
उसका मजहब था जो माँ बाप से ही उसने विरासत में लिया था
अपने माँ बाप चुने कोई ये मुमकिन ही कहाँ है ?
उस पे ये मुल्क भी लाज़िम था, कि माँ बाप का घर था इसमें
ये वतन उसका चुनाव तो नहीं था
वो तो कुल नौ ही बरस का था उसे क्यूँ चुनकर
फ़िर्कादाराना फ़सादात ने कल क़त्ल किया....।

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