Album : Saher

ये जो ज़िन्दगी की किताब है, ये किताब भी क्या किताब है 
कहीं इक हसीन सा ख्वाब है, कहीं जानलेवा हिजाब है

कहीं छाँव है कहीं धुप है, कहीं और ही कोई रूप है 
कई चेहरे इसमें छुपे हुए, इक अजीब सी ये नक़ाब है 

कहीं खो दिया कहीं पा लिया, कहीं रो लिया कहीं गा लिया 
कहीं छीन लेती है हर ख़ुशी, कहीं मेहरबाँ बेहिसाब है 

कहीं आंसुओं की है दास्ताँ, कहीं मुस्कुराहटों का बयाँ 
कहीं बरकतों की है बारिशें, कहीं तिश्नगी बेहिसाब है 

                                                     " राजेश रेड्डी "

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मुझसे बिछड़ के खुश रहते हो                                    
मेरी तरह तुम भी झूठे हो

एक टहनी पे चाँद टिका था
मैं ये समझा तुम बैठे हो

उजले उजले फूल खिले थे
मैं ये समझा तुम हँसते हो

मुझको शाम बता देती है
तुम कैसे कपड़े पहने हो

तुम तनहा दुनिया से लड़ोगे
बच्चों सी बातें करते हो

                    " डॉ बशीर बद्र "

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तेरे आने की जब खबर महके
तेरी खुशबू से सारा घर महके

शाम महके तेरे तसव्वुर से
शाम के बाद फिर सहर महके

रात भर सोचता रहा तुझको
ज़हन-ओ-दिल मेरे रात भर महके

याद आए तो दिल मुनव्वर हो
दीद हो जाए तो नज़र महके

वो घड़ी दो घड़ी जहाँ बैठे
वो ज़मीं महके वो शजर महके

तेरे आने की जब खबर महके
तेरी खुश्बू से सारा घर महके


Lyrics : Dr. Nawaz Deobandi

दीद : दिखना 
शज़र : माहौल 

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चराग़े इश्क़ जलाने की रात आयी है 
किसी को अपना बनाने की रात आयी है 

वो आज आये हैं महफ़िल में चांदनी लेकर 
कि रौशनी में नहाने की रात आयी है 

फ़लक का चाँद भी शरमा के मुंह छुपायेगा 
नक़ाब रुख़ से उठाने की रात आयी है 

निगाहे साक़ी से पैहम छलक रही है शराब 
पियो कि पीने पिलाने की रात आयी है 

                              " faiz ratlami "

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