दुनिया जिसे कहते हैं, जादू का खिलौना है
मिल जाये तो मिट्टी है, खो जाए तो सोना है
बरसात का बादल तो दीवाना है, क्या जाने
किस राह से बचना है, किस छत को भिगोना है
अच्छा सा कोई मौसम, तनहा सा कोई आलम
हर वक़्त का रोना तो बेकार का रोना है
ग़म हो कि ख़ुशी, दोनों कुछ देर के साथी है
हर गाम पे पहरा है, फिर भी इसे खोना है
आवारा मिज़ाजी ने फैला दिया आँगन को
आकाश की चादर है, धरती का बिछोना है
गाम : कदम
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