एक ही ख़्वाब कई बार यूं ही देखा है मैंने
तूने साड़ी में उरस ली है मेरी चाबियाँ घर की
और चली आई है बस यूँ ही मेरा हाथ पकड़कर
घर की हर चीज संभाले हुऐ अपनाये हुए तू
तू मेरे पास मेरे घर पे, मेरे साथ है ' सोनूँ '
मेज़ पर फूल सजाते हुए देखा है कई बार
और बिस्तर से कई बार जगाया भी है तुझको
चलते-फिरते तेरे क़दमों की वो आहट भी सुनी है
गुनगुनाती हुई निकली है बाथरूम से जब भी
अपने भीगे हुए बालों से टपकता हुआ पानी
मेरे चेहरे पर छटक देती है तू सोनूँ की बच्ची
फ़र्श पर लेट गयी है तू कभी रूठ के मुझसे
और कभी फ़र्श से मुझको भी उठाया है मनाकर
ताश के पत्तों पे लड़ती है कभी खेल में मुझसे
और कभी लड़ती भी ऐसे है कि बस खेल रही है
और आग़ोश में नन्हे को……
और मालूम है ? जब देखा था ये ख़्वाब तुम्हारा
अपने बिस्तर पे मैं उस वक़्त पड़ा जाग रहा था
तूने साड़ी में उरस ली है मेरी चाबियाँ घर की
और चली आई है बस यूँ ही मेरा हाथ पकड़कर
घर की हर चीज संभाले हुऐ अपनाये हुए तू
तू मेरे पास मेरे घर पे, मेरे साथ है ' सोनूँ '
मेज़ पर फूल सजाते हुए देखा है कई बार
और बिस्तर से कई बार जगाया भी है तुझको
चलते-फिरते तेरे क़दमों की वो आहट भी सुनी है
गुनगुनाती हुई निकली है बाथरूम से जब भी
अपने भीगे हुए बालों से टपकता हुआ पानी
मेरे चेहरे पर छटक देती है तू सोनूँ की बच्ची
फ़र्श पर लेट गयी है तू कभी रूठ के मुझसे
और कभी फ़र्श से मुझको भी उठाया है मनाकर
ताश के पत्तों पे लड़ती है कभी खेल में मुझसे
और कभी लड़ती भी ऐसे है कि बस खेल रही है
और आग़ोश में नन्हे को……
और मालूम है ? जब देखा था ये ख़्वाब तुम्हारा
अपने बिस्तर पे मैं उस वक़्त पड़ा जाग रहा था
