Unique : Jagjit Singh

तेरा चेहरा कितना सुहाना लगता है 
तेरे आगे चाँद पुराना लगता है 

तिरछे तिरछे तीर नज़र के चलते हैं 
सीधा सीधा दिल पे निशाना लगता है 

आग का क्या है पल दो पल में लगती है
बुझते बुझते एक ज़माना लगता है 

सच तो ये है फूल का दिल भी छलनी है 
हँसता चेहरा एक  बहाना लगता है   
                                                      " Kaif Bhopali "

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आप से गिला आपकी कसम 
सोचते रहे कर सके न हम 

उसकी क्या खता ला-दवा है ग़म 
क्यूँ गिला करें चारागर से हम 

ये नवाज़िशें और ये करम 
फरते शौक से मर न जाए हम 

खींचते रहे उम्र भर मुझे 
इक तरफ ख़ुदा इक तरफ सनम 

ये अगर नहीं यार की गली 
चलते चलते क्यूँ रुक गए कदम 
                                                   " Saba Sikri

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बस एक वक़्त का खंजर मेरी तलाश में है 
जो रोज भेष बदलकर मेरी तलाश में है 

मैं एक कतरा मेरा अलग वज़ूद तो है 
हुआ करे जो समंदर मेरी तलाश में है 

मैं देवता की तरह क़ैद अपने मंदिर में 
वो मेरे जिस्म के बाहर मेरी तलाश में है 

मैं जिसके हाथ में इक फूल आया था 
उसी के हाथ का पत्थर मेरी तलाश में है 
                                                          " Krishna Bihari Noor "

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बुझ गई तपते हुए दिन की अगन 
साँझ ने चुपचाप ही पी ली जलन 
रात झुक आई पहन उजला वसन 
प्राण तुम क्यों मौन हो कुछ गुनगुनाओ 
चांदनी के फूल चुन मुस्कुराओ 

एक नीली झील सा फैला अचल 
आज ये आकाश है कितना सजल 
चाँद जैसे रूप का उभरा कमल 
रात भर इस रूप का जादू जगाओ 
प्राण तुम क्यों मौन हो कुछ गुनगुनाओ 

चल रहा है चैत का चंचल पवन 
बाँध लो बिखरे हुए उंदल सघन 
आज लो कजरा उदास है नयन 
मांग भर लो भाल पर बिंदिया सजाओ 
प्राण तुम क्यों मौन हो कुछ गुनगुनाओ 
                                                            " Pandit Vinod Sharma "

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मेरे क़रीब न आओ कि मैं शराबी हूँ 
मेरा सऊर जगाओ कि मैं शराबी हूँ 

ज़माने भर की निगाहों से गिर चुका हूँ मैं
नज़र से तुम न गिराओ कि मैं शराबी हूँ 

ये अर्ज़ करता हूँ गिरके ख़ुलूस वालों से 
उठा सको तो उठाओ कि मैं शराबी हूँ

तुम्हारी आँख से भर लूँ सुरूर आँखों में 
नज़र नज़र से मिलाओ कि मैं शराबी हूँ
                                                            " Saba Sikri "

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