Definition of Love by Gulzar

प्यार एक जिस्म के साज पे बजती गूँज नहीं है,
ना मन्दिर की आरती है,ना पूजा है,
प्यार नफ़ा है,ना लालच है,
ना कोई लाभ,ना कोई हानि,
प्यार ऐलान है,ना अहसान है,ना कोई जंग की जीत है ये,
ना ये हुनर है,ना ईनाम है,ना ये रिवाज,ना रीत है ये,

ये रहम नहीं ,ये दान नहीं,ये बीज नहीं जो बीज सके,
ख़ुशबू है मगर ये ख़ुशबू की पहचान नहीं ,

दर्द,दिलासे,शक,विश्वास,जुनून और
होश-ओ-हवास के अहसास की कोख से पैदा हुआ इक रिश्ता है,
या सम्बन्ध है दो जनों का,दो रूहों का,पहचानों का,
पैदा होता है,बढ़ता है ये बूढ़ा होता नहीं              " Gulzar "



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