आज फिर आपके लिए भारतीय सिनेमा के कालजयी गीत का नजराना पेश करता हूँ। 1980 में प्रदर्शित फ़िल्म ' थोड़ी सी बेवफाई ' के लिए लिखा गुलज़ार साब का ये गाना उनके संग्रह में एक और filmfare ट्राफी दिला गया। संगीत खय्याम का था और स्वर लता जी और किशोर कुमार के। 1975 से लेकर 1985 का दौर गुलज़ार का स्वर्णिम दौर रहा क्यूंकि इसी दौरान इन्होने लगभग लगातार filmfare award कब्जाए।
बड़ी वफ़ा से निभाई तुमने हमारी थोड़ी सी बेवफाई
जहां से तुम मोड़ मुड़ गए थे
ये मोड़ अब भी वहीं पड़े हैं
हम अपने पैरों में जाने कितने
भंवर लपेटे हुए खड़े हैं
बड़ी वफ़ा से निभाई तुमने हमारी थोड़ी सी बेवफाई
कहीं किसी रोज़ यूँ भी होता
हमारी हालत तुम्हारी होती
जो रात हमने गुजारी मर के
वो रात तुमने गुजारी होती
बड़ी वफ़ा से निभाई तुमने हमारी थोड़ी सी बेवफाई
तुम्हे ये ज़िद थी कि हम बुलाते हमें ये उम्मीद वो पुकारें
हैं नाम होठों पे अब भी लेकिन आवाज़ में पड़ गई दरारें

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