कतरे कतरे से मिलकर समंदर महान बना है
अक्षर अक्षर से मिलकर वेदों का ज्ञान बना है
किसी का भी वजूद छोटा समझना है नासमझी
भाप के कण कण से विशाल आसमान बना है
खुद को तूफान के हिमायती समझने वालों सुनों
छोटी छोटी सांसों से तुम्हारा जीवनदान बना है
समंदर भूल गया कि एक कतरा था वो कभी
वो खारा हुआ क्योंकि उसमें अभिमान बना है
बरसों पोथियाँ चाटकर कचरा रहा वो ‘मधु’
केवल ढाई आखर पढ़कर कबीर विद्वान बना है
अक्षर अक्षर से मिलकर वेदों का ज्ञान बना है
किसी का भी वजूद छोटा समझना है नासमझी
भाप के कण कण से विशाल आसमान बना है
खुद को तूफान के हिमायती समझने वालों सुनों
छोटी छोटी सांसों से तुम्हारा जीवनदान बना है
समंदर भूल गया कि एक कतरा था वो कभी
वो खारा हुआ क्योंकि उसमें अभिमान बना है
बरसों पोथियाँ चाटकर कचरा रहा वो ‘मधु’
केवल ढाई आखर पढ़कर कबीर विद्वान बना है

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