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सरहद पार by गुलज़ार

आज़ादी के बाद भारत और पाकिस्तान के बंटवारे के बारे में काफी कुछ सुना है, पढ़ा है…उस समय के हालात इतने त्रासदीपूर्ण थे कि जिन्होंने ये मंज़र देखा वो सदा के लिए उनकी आँखों में बुरे सपने की तरह समा गया…बल्कि उनके अस्तित्व का हिस्सा हो गया,  वो चाहे हिंदुस्तान में रहे या पाकिस्तान में किन्तु उस मंज़र की परछाइयाँ हमेशा दोनों देशों के विस्थापितों के साथ रही…परिवारों के टुकड़े हो गए..... कुछ भारत में रहे, कुछ पाक में.....सरहदें अलग हो गई, सरकारें वीज़ा मांगने लगी.… लेकिन दिलों को, आँखों को कहाँ वीज़ा की जरुरत पड़ती है, वो तो कभी भी कही भी अपनों को यादों में, सपनों में मिल सकते है…वतन जुदा हुए लेकिन लोगों के दिल नही…
इन्हीं भावनाओं को संवेदनशीलता की पराकाष्ठा तक पहुंचते हुए गुलज़ार अपने शब्दों में बयां करते है तो यह दोनों देशों के लोगो को अपने दिल की आवाज़ मालूम पड़ती है…अपने व दूसरों के दर्द को इस भावना की तीव्रता के साथ कह पाना और आसान शब्दों में कह पाना, ऐसे कद्दावर शायर के वश की बात हो सकती है.…


सुबह सुबह इक ख्वाब की दस्तक पर दरवाज़ा खोला, देखा
सरहद के उस पार से कुछ मेहमान आये हैं
आँखों से मानूस से सारे
चहरे सारे सुने सुनाये
पाँव धोये, हाथ धुलाए
आँगन में आसन लगवाए……
और तन्नूर पे मक्की के कुछ मोटे मोटे रोट पकाए
पोटली में मेहमान मेरे
पिछले सालों की फसलों का गुड़ लाये थे

आँख खुली तो देखा घर में कोई नहीं था
हाथ लगाकर देखा तो तन्नूर अभी तक बुझा नहीं था
और होठों पे मीठे गुड़ का जायका अभी तक चिपक रहा था

ख्वाब था शायद !
ख्वाब ही होगा !!
सरहद पर कल रात, सुना है, चली थी गोली
सरहद पर कल रात, सुना है
कुछ ख्वाबों का ख़ून हुआ था


Subah subah ek khawab ki dastak par darwaza khola, dekha
sarhad ke us paar se kuch mehmaan aaye hain
aankhon se maanoos se saare
chehre saare sune sunaye
paanv dhoye, haath dhulaye
aangan me aasan lagvaye......

Aur tannor pe makki ke kuch mote mote rot pakaye
potli me mehmaan mere
pichle saalon ki phaslon ka gud laye the 

Aankh khuli to dekha ghar me koi nahi tha
haath lagakar dekha to tannoor abhi tak bujha nahi tha
aur hothon par meethe gud ka jayka abhi tak chipak raha tha

Khwab tha shayad !
khawab hi hoga !!
sarhad par kal raat, suna hai, chali thi goli
sarhad par kal raat, suna hai
kuch khwabon ka khoon hua tha