दिल की दहलीज़ पे यादों के दीये रखे हैं
आज तक हमने ये दरवाज़े खुले रखे हैं
इस कहानी के वो किरदार कहाँ से लाऊं
वही दरिया है, वही कच्चे घड़े रखे हैं
हम पे जो गुजरी, न बताया न बताएँगे कभी
कितने ख़त अब भी तेरे नाम लिख रखे हैं
आप के पास खरीद-दारी की कुव्वत है अगर
आज सब लोग दुकानों में सजे रखे हैं