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Ghazal of Bashir Badr

दिल की दहलीज़ पे यादों के दीये रखे हैं 
आज तक हमने ये दरवाज़े खुले रखे हैं 

इस कहानी के वो किरदार कहाँ से लाऊं 
वही दरिया है, वही कच्चे घड़े रखे हैं 

हम पे जो गुजरी, न बताया न बताएँगे कभी 
कितने ख़त अब भी तेरे नाम लिख रखे हैं 

आप के पास खरीद-दारी की कुव्वत है अगर 
आज सब लोग दुकानों में सजे रखे हैं