हमारा हौसला बढ़ाने के लिए कृपया पोस्ट के नीचे अपनी - Average, Good या Excellent की रेटिंग अवश्य दें और हो सके तो कमेंट भी लिखें । धन्यवाद....
***************************************************************************
अगर हम कहें और वो मुस्कुरा दें
हम उनको लिए ज़िंदगानी लूटा दें
हर एक मोड़ पर हम ग़मों को सज़ा दें
चलो ज़िन्दगी को मुहब्बत बना दें
अगर खुद को भूले तो, कुछ भी न भूले
कि चाहत में उनकी ख़ुदा को भुला दें
कभी ग़म की आंधी जिन्हे छू न पाये
वफ़ाओं के हम वो नशेमन बना दे
क़यामत के दीवाने, कहते हैं हमसे
चलो उनके चेहरे से पर्दा हटायें
सजा दे, सिला दे, बना दे, मिटा दे
मगर वो कोई फैसला तो सुना दे
नशेमन : घोंसला
' सुदर्शन फ़ाकिर '
****************************************************************************
बहुत पहले से उन कदमों की आहट जान लेते हैं
तुझे ऐ ज़िन्दगी, हम दूर से पहचान लेते हैं
तबीयत अपनी घबराती है, जब सुनसान रातों में
हम ऐसे में तेरी यादों की चादर तान लेते हैं
मेरी नज़रें भी ऐसे काफिरों का जान-ओ-इमां है
निगाहें मिलते ही जो जान और ईमान लेते हैं
' फ़िराक़ ' अक्सर बदल कर भेस मिलता है कोई काफ़िर
कभी हम जान लेते हैं, कभी पहचान लेते हैं
' फ़िराक गोरखपुरी '
*****************************************************************************
दास्तान-ए-ग़म-ए-दिल उनको सुनाई न गई
बात बिगड़ी कुछ ऐसी, कि बनाई न गई
सबको हम भूल गए जोश-ए-जुनूँ में लेकिन
इक तेरी याद थी ऐसी, कि भुलाई न गई
इश्क़ पर कुछ न चला दीदा-ए-तर का काबू
उसने जो आग लगा दी, वो बुझाई न गई
' जिगर मुरादाबादी '
*****************************************************************************
जब कभी तेरा नाम लेते हैं
दिल से हम इन्तेक़ाम लेते हैं
मेरी बर्बादियों के अफ़साने
मेरे यारों के नाम लेते हैं
बस यही एक जुर्म है अपना
हम मोहब्बत से काम लेते हैं
हर कदम पर गिरे, मगर सीखा
कैसे गिरतों को थाम लेते हैं
हम भटककर जुनून की राहों में
अक्ल से इन्तेक़ाम लेते हैं
' सरदार अंजुम '
*****************************************************************************
जब से हम तबाह हो गए
तुम जहाँपनाह हो गए
हुस्न पर निखार आ गया
आईने सियाह हो गए
आँधियों की कुछ खता नहीं
हम भी गर्द-ऐ-राह हो गए
दुश्मनों को चिठियां लिखो
दोस्त ख़ैरख्वाह हो गए
सियाह : काले
' बेकल उत्साही '
****************************************************************************