Showing posts with label श्री लाल राठी. Show all posts
Showing posts with label श्री लाल राठी. Show all posts

Ghazal by shri lal rathi

वो मेरी तक़दीर में ही नहीं                                                                  
तो ख्वाबों में क्यूँ आता है

तन्हाई की हद तो देखो
सन्नाटा भी शोर मचाता है

खुशियों से सुलह हो न सकी
अब ग़म ही दिल को भाता है

इश्क़ के अंगारों पे चलकर 
पाँव जले पर दिल क़रार पाता है

सूरत की नुमाइश तो चल रही
पर सीरत कोई देख ना पाता है

उसकी अक्ल पर पड़े हैं ताले
जहाने-ख़राब में जो हमें खपाता है

English Lyrics :

Wo meri taqdeer me hi nahin
to khawabon me kyu aata hai

Tanhai ki had to dekho 
sannata bhi shor machata hai

Khushiyon se sulah ho na saki
ab gham hi dil ko bhata hai

Ishq ke angaaron pe chala
paanv jale par dil qarar pata hai

Soorat ki numaish to chal rahi
par seerat koi dekh na pata hai

Uski akla par pade hain taale
jo jahan-e-kharab me hume khapata hai



                                     






सुबह के 4 बजे

यकायक खुली आँखें, देखा घडी 4 बजा रही थी
बहुत जल्दी था मगर
नींद तो जैसे ले चुकी थी विदाई इन आँखों से,
बैठा आकर हॉल में, लेकिन अजीब लग रहा था
शायद इसको इतना शांत देखने की आदत नहीं थी,
वक़्त को भगाते रहने वाली घडी भी
सेकंड सेकंड अपने पग बढ़ा रही थी,

पहली बार महसूस किया आँख के साथ जागा मन भी,
अलग ही मन था ये शायद, जो साफ़ था भोर के सन्नाटे की तरह,
जा रहा था हर कही, पर बिना भटके,
रंज जिनके लिए पालता है, उनके लिए भी बे-रंज
पोसता है जिनके लिए प्यार, उनके लिए भी तटस्थ,
नवीन विचारों की कोपलें उगाता मन
दूर से आ रही मंदिर की घंटी की ध्वनि
कुछ बुजुर्गों के सामूहिक कीर्तन के स्वर
जाग उठी इसकी सोई हुई संगीत लहरियां,

जागा में नहीं, जागी आज तो आत्मा है
आज का सूरज देगा मुझे शायद नया सवेरा,
नूतन विचारों के साथ उठा ये इंसान नया है
वर्ना पुराना तो इस वक़्त तक सोया रहता

                                                   " श्री लाल राठी "







ईश्वर का पत्र मनुष्य के नाम

प्रिय मनुष्य,

       सर्वप्रथम तुम्हे मेरा प्यार और आशीष…अगर इस दुनिया में सबसे पुराना कोई रिश्ता है तो वो है तुम्हारा और मेरा…एक पिता, अभिभावक, पालनकर्ता के रूप में तुम्हारा विकास देखकर में अभिभूत हुँ…मैंने जिस रूप में दुनिया बनाई, उसमे तुमने बहुत संशोधन भी किये…मैं यहाँ तुम्हे अच्छे या बुरे के बारे में ज्यादा कुछ नहीं कहूंगा…इसके लिए मैंने कुछ विदूषक भी छोड़ रखे है…

       मैं खुश हूँ कि तुम मुझे याद करते हो ये अलग बात है कि सुख में कम और दुःख में ज्यादा…तुम मंदिर की चौखटें भी नापते हो, और मेरी दरगाह चूमते भी हो, सुबह सुबह शायद मुझे हाथ भी जोड़ते हो, या फिर कोई चालीसा करके अपने कर्त्तव्य की इतिश्री समझ लेते हो…हाँ फैक्ट्री या दुकान में तुम मुझे सुबह के समय बड़ी शिद्दत से याद करते हो ( तुम्हारी रोजी रोटी का जो सवाल है ), शाम को मंगल करते समय भी वहाँ की चौकीदारी के लिए मुझसे ही गुहार लगाते हो...नौकरी वाले भी अपने प्रमोशन, ट्रान्सफर इत्यादि के लिए मुझे ही याद करते है…तुम सभी मेरी प्रसादी भी बोलते हो, परन्तु किसी काम को पूरा करने की शर्त  रखते हुए…तुम्हे लगता है कि तुम्हारी सवामणि घूस का काम करेगी…
तुम मुझे सच्चे भाव से याद करोगे और में हाजिर हो जाउंगा, ऐसी धारणा तो शायद तुम भूल चुके हो…

       बुरा मत मानना, मेरे पास एक प्रस्ताव है...क्यों न तुम मुझे अपने व्यापार में साझेदार बना लेते ? ऐसा करके तुम्हे मुझसे डरने की जरुरत नहीं रहेगी, तुम चिंता मुक्त रह सकते हो,  सोचो जो शक्ति सारी दुनिया चला रही है, वही तुम्हारी भागीदार बन जाये तो तुम्हे आगे बढ़ने से कौन रोक सकता है…लेकिन मेरा कुछ प्रतिशत निश्चित कर दो…मेरा भी ध्यान तुम पर ज्यादा रहेगा…

       अब तुम कहोगे कि ये हिस्सा मुझ तक पहुँचे कैसे ? घर में कीर्तन, जगराता, मंदिरों में प्रसादी, दरगाह पर चादर, यज्ञ, पाठ पूजा, जप या कुछ और ? नहीं मुझे ये कुछ नहीं चाहिए…मुँह खुला रह गया ? बंद कर ले…तू सिर्फ इतना कर कि मेरे हिस्से के पैसे से किसी भूखे को खाना खिला, किसी गरीब के बच्चे को पढ़ा, किसी की कन्या की शादी में योगदान कर, गाय को चारा डाल ,मूक पक्षियों को दाना दे, किसी गरीब का अस्पताल में इलाज करा दे,रक्त दान कर… इन कामों से मेरा हिस्सा मेरे पास पंहुचा हुआ समझना....

       अंत में तुम्हारी सबसे बड़ी कमजोरी बताता हु कि तुम किसी के काम आना चाहते हो परन्तु जरुरत के समय पर सामने वाले पर भरोसा नहीं कर पाते, यही संदेह तुम्हे एक नेक काम से रोक देता है…अतः अगर तुम्हे किसी की मदद करनी है तो कर डालो, इस काम  में ज्यादा गुणा भाग उचित नहीं है....वैसे भी नेक काम गणित से नहीं, दिल से होते है…तो निकाल अपना कैलकुलेटर और मेरा प्रतिशत क्या रखेगा, इस पर विचार शुरू कर…यही सोच रहा है न कि ईश्वर ने कब से मांगना शुरू कर दिया, तो समझ ले कि ये तेरी संगति का असर है…
                                                                                                                         
                                                                                         तुम्हारा,

                                                                                         ईश्वर,खुदा,वाहेगुरू,god