यकायक खुली आँखें, देखा घडी 4 बजा रही थी
बहुत जल्दी था मगर
नींद तो जैसे ले चुकी थी विदाई इन आँखों से,
बैठा आकर हॉल में, लेकिन अजीब लग रहा था
शायद इसको इतना शांत देखने की आदत नहीं थी,
वक़्त को भगाते रहने वाली घडी भी
सेकंड सेकंड अपने पग बढ़ा रही थी,
पहली बार महसूस किया आँख के साथ जागा मन भी,
अलग ही मन था ये शायद, जो साफ़ था भोर के सन्नाटे की तरह,
जा रहा था हर कही, पर बिना भटके,
रंज जिनके लिए पालता है, उनके लिए भी बे-रंज
पोसता है जिनके लिए प्यार, उनके लिए भी तटस्थ,
नवीन विचारों की कोपलें उगाता मन
दूर से आ रही मंदिर की घंटी की ध्वनि
कुछ बुजुर्गों के सामूहिक कीर्तन के स्वर
जाग उठी इसकी सोई हुई संगीत लहरियां,
जागा में नहीं, जागी आज तो आत्मा है
आज का सूरज देगा मुझे शायद नया सवेरा,
नूतन विचारों के साथ उठा ये इंसान नया है
वर्ना पुराना तो इस वक़्त तक सोया रहता
" श्री लाल राठी "
बहुत जल्दी था मगर
नींद तो जैसे ले चुकी थी विदाई इन आँखों से,
बैठा आकर हॉल में, लेकिन अजीब लग रहा था
शायद इसको इतना शांत देखने की आदत नहीं थी,
वक़्त को भगाते रहने वाली घडी भी
सेकंड सेकंड अपने पग बढ़ा रही थी,
पहली बार महसूस किया आँख के साथ जागा मन भी,
अलग ही मन था ये शायद, जो साफ़ था भोर के सन्नाटे की तरह,
जा रहा था हर कही, पर बिना भटके,
रंज जिनके लिए पालता है, उनके लिए भी बे-रंज
पोसता है जिनके लिए प्यार, उनके लिए भी तटस्थ,
नवीन विचारों की कोपलें उगाता मन
दूर से आ रही मंदिर की घंटी की ध्वनि
कुछ बुजुर्गों के सामूहिक कीर्तन के स्वर
जाग उठी इसकी सोई हुई संगीत लहरियां,
जागा में नहीं, जागी आज तो आत्मा है
आज का सूरज देगा मुझे शायद नया सवेरा,
नूतन विचारों के साथ उठा ये इंसान नया है
वर्ना पुराना तो इस वक़्त तक सोया रहता
" श्री लाल राठी "
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