Gulzar's first film song

मोरा गोरा रंग लई ले, मोहे श्याम रंग दई दे 
छुप जाउंगी रात ही में, मोहे पी का संग दई दे 

इक लाज रोके पैया, इक मोह खींचे बैंया
जाऊं किधर न जाऊं, हमका कोई बताई दे 

बदरी हटा के चंदा, चुपके से झांके चंदा 
तोहे राहु लागे बैरी, मुस्काये जी जलाई के 

कुछ खो दिया है पाइ के, कुछ पा लिया गवाईं के 
कहाँ ले चला है मनवा, मोहे बावरी बनाइ के

स्वर : आशा भोंसले 
संगीत : S.D. Burman   


जनाब ये ही वो गाना है जिसने हिंदी सिनेमा को एक नायाब गीतकार, शायर और असाधारण रूप से संवेदनशील निर्देशक दिया। बंदिनी फ़िल्म में बिमल रॉय ने सम्पूरन सिंह कालरा को मोटर गेराज से निकाल कर उसकी प्रतिभा के अनुरूप गीत लिखने को दिया और वहीं से गुलज़ार के रूप में उनका सफ़र शुरू हुआ। उसके बाद की कहानी सभी जानते हैं।  इसीलिए गुलज़ार बिमल रॉय को अपने पिता तुल्य मानते थे।  बाद में गुलज़ार ने बिमल दा का portrait भी बनाया।  जो कभी आपके सामने रखूँगा। 

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