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jagjit singh : Album Inteha

इंतिहा आज इश्क़ की कर दी 
आपके नाम ज़िन्दगी कर दी 

था अँधेरा ग़रीब ख़ाने में 
आपने आ के रौशनी कर दी 

देने वाले ने उनको हुस्न दिया 
और अता मुझको आशिक़ी कर दी 

तुमने ज़ुल्फ़ों को रुख पे बिखरा कर 
शाम रंगीन और भी कर दी 

                       " पैयम सईदी "

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आइना सामने रखोगे तो याद आऊंगा
अपनी ज़ुल्फ़ों को संवारोगे तो याद आऊंगा

भूल जाना मुझे आसान नहीं है इतना
जब मुझे भूलना चाहोगे तो याद आऊंगा

एक दिन भीगे थे बरसात में हम तुम दोनों
अब जो बरसात में भीगोगे तो याद आऊंगा

याद आऊंगा उदासी की जो रुत आएगी 
जब कोई जश्न मनाओगे तो याद आऊंगा 

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आपके दिल ने हमें आवाज़ दी, हम आ गए 
हमको ले आई मोहब्बत आपकी, हम आ गए 

अपने आने का सबब हम क्या बताएं आपको 
बैठे बैठे याद आई आपकी, हम आ गए 

हम हैं दिलवाले भला हम पर किसी का जोर क्या 
जायेंगे अपनी ख़ुशी, अपनी ख़ुशी हम आ गए 

कहिये अब क्या है चरागों की जरुरतआपको 
ले के आँखों में वफ़ा की रौशनी, हम आ गए 

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कुछ खोना कुछ पाना चलता रहता है
साँसों का अफसाना चलता रहता है

अब भी चिड़ियाँ चुग जाती है खेतों को
दो इक दिन पछताना चलता रहता है

कुछ बच जाते हैं, तो कुछ मिट जाते हैं
वक़्त का आना जाना चलता रहता है

हिन्दू मुस्लिम आते जाते रहते हैं
नुक्कड़ का मयखाना चलता रहता है