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Wo Chandni : Dr Bashir Badr

वो चाँदनी भी मेरी तरह जाग रही है
पलकों पे सितारों को लिये रात खड़ी है


ये बात कि सूरत के भले, दिल के बुरे हों
अल्लाह करे झूठ हो, बहुतों से सुनी है


वो माथे का मतला हो कि होंठों के दो मिसरे
बचपन की ग़ज़ल ही मेरी महबूब रही है


ग़ज़लों ने वहीं ज़ुल्फ़ों के फैला दिये साये
जिन राहों पे देखा है बहुत धूप कड़ी है


हम दिल्ली भी हो आये हैं लाहौर भी घूमे
ऐ यार मगर तेरी गली, तेरी गली है

Bashir Badr at his best

कुछ तो मजबूरियाँ रही होंगी
यूँ कोई बेवफ़ा नहीं होता

जी बहुत चाहता है सच बोलें
क्या करें हौसला नहीं होता

अपना दिल भी टटोल कर देखो
फासला बेवजह नही होता

कोई काँटा चुभा नहीं होता
दिल अगर फूल सा नहीं होता

गुफ़्तगू उनसे रोज़ होती है
मुद्दतों सामना नहीं होता

रात का इंतज़ार कौन करे
आज कल दिन में क्या नहीं होता