Mohabbat me dikhave ki dosti naa mila : Dr Bashir Badr

मोहब्बत में दिखावे की दोस्ती ना मिला 
अगर गले नहीं मिलता तो हाथ भी ना मिला 

घरों पे नाम थे, नामों के साथ ओहदे थे 
बहुत तलाश किया कोई आदमी ना मिला 

तमाम रिश्तों को मैं घर पे छोड़ के आया था 
फिर इसके बाद मुझे कोई अजनबी ना मिला 

बहुत अजीब है करतबों की दूरी भी 
वो मेरे साथ रहा और मुझसे कभी ना मिला 

ख़ुदा की इतनी बड़ी क़ायनात में मैंने 
बस एक शख्स माँगा, मुझे वो ही ना मिला  

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