All ghazal lyrics ; Kunwar Mohinder Singh Bedi " Sahar "
तुम हमारे नहीं, तो क्या ग़म है
हम तुम्हारे तो हैं, ये क्या कम है
हुस्न की शोख़ियाँ जरा देखो
गाहे शोला है गाहे शबनम है
मुस्कुरा दो जरा ख़ुदा के लिए
शम-ऐ-महफ़िल में रौशनी कम है
बन गया है ये ज़िन्दगी अब तो
तुझसे बढ़कर हमें तेरा ग़म है
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तेरी बेरुखी और तेरी मेहरबानी
यही मौत है और यही ज़िंदगानी
वही इक फ़साना, वही इक कहानी
जवानी, जवानी, जवानी, जवानी
लबों पर तबस्सुम तो आँखों में पानी
यही है यही दिलजलों की निशानी
बताऊँ है क्या आंसुओं की हकीक़त
जो समझो तो सब कुछ न समझो तो पानी
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आँखों से यूँ आंसू ढलके
सागर से जैसे मय छलके
हम समझे मफ़हूम-ऐ-बहारा
कोई आया भेस बदल के
काश बता सकते परवाने
क्या खोया क्या पाया जलके
मंजिल तक वो क्या पहुंचाए
जिसने देखी राह न चलके
मफ़हूम-ऐ-बहारा : बहार का अर्थ
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अभी वो कमसिन उभर रहा है अभी है उस पर शबाब आधा
अभी जिगर में खलिश है आधी अभी है मुझ पर इताब आधा
मेरे सवाल-ऐ-वस्ल पर तुम नज़र झुका कर खड़े हुए हो
तुम्ही बताओ ये बात क्या है सवाल पूरा जवाब आधा
लगा के लारे पे ले तो आया हूँ शेख़ साहब को मैकदे तक
अगर ये दो घूँट आज पी लें मिलेगा मुझको सवाब आधा
कभी सितम है कभी करम है कभी तवज्जो कभी तग़ाफ़ुल
ये साफ़ जाहिर है मुझपे अब तक हुआ हूँ मैं कामयाब आधा
इताब : गुस्सा
सवाल-ऐ-वस्ल : मिलन का आग्रह
शेख़ साहब : मौलवी, पंडित
सवाब : पुण्य
तग़ाफ़ुल : उपेक्षा
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फूल भरे हैं दामन दामन
लेकिन वीराँ गुलशन गुलशन
मफ़हूम-ऐ-बहारा : बहार का अर्थ
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अभी वो कमसिन उभर रहा है अभी है उस पर शबाब आधा
अभी जिगर में खलिश है आधी अभी है मुझ पर इताब आधा
मेरे सवाल-ऐ-वस्ल पर तुम नज़र झुका कर खड़े हुए हो
तुम्ही बताओ ये बात क्या है सवाल पूरा जवाब आधा
लगा के लारे पे ले तो आया हूँ शेख़ साहब को मैकदे तक
अगर ये दो घूँट आज पी लें मिलेगा मुझको सवाब आधा
कभी सितम है कभी करम है कभी तवज्जो कभी तग़ाफ़ुल
ये साफ़ जाहिर है मुझपे अब तक हुआ हूँ मैं कामयाब आधा
इताब : गुस्सा
सवाल-ऐ-वस्ल : मिलन का आग्रह
शेख़ साहब : मौलवी, पंडित
सवाब : पुण्य
तग़ाफ़ुल : उपेक्षा
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फूल भरे हैं दामन दामन
लेकिन वीराँ गुलशन गुलशन
अक्ल की बातें करने वाले
क्या समझेंगे दिल की धड़कन
कौन किसी के दुःख का साथी
अपने आंसू अपना दामन
तेरा दामन छोड़ूँ कैसे
मेरी दुनिया तेरा दामन
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हुस्न वालों का एहतराम करो
कुछ तो दुनिया में नेक काम करो
शेख़ आये हैं बा-वज़ू होकर
अब तो पीने का इंतज़ाम करो
अब भी बरसेंगे हर तरफ जलवे
तुम निगाहों का एहतमाम करो
लोग डरने लगे गुनाहों से
बारिश-ऐ-रहमत-ऐ-तमाम करो
एहतराम : सम्मान
बा-वज़ू : नमाज पढ़कर
एहतमाम : व्यवस्था
बारिश-ऐ-रहमत-ऐ-तमाम : भगवन की कृपा की बारिश
एहतराम : सम्मान
बा-वज़ू : नमाज पढ़कर
एहतमाम : व्यवस्था
बारिश-ऐ-रहमत-ऐ-तमाम : भगवन की कृपा की बारिश
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