मेरी ज़िन्दगी किसी और की, मेरे नाम का कोई और है
मेरा अक्स है सर-ए-आईना, पस-ए-आईना कोई और है
मेरी धड़कनों में है चाप सी, ये भी जुदाई है मिलाप सी
मुझे क्या पता मेरे दिल बता, मेरे साथ क्या कोई और है
न गये दिनों को खबर मेरी, न शरीक-ए-हाल नज़र तेरी
तेरे देस में, मेरे भेस में, कोई और था, कोई और है
वो मेरी तरफ निगराँ रहे, मेरा ध्यान जाने कहाँ रहे
मेरी आँख में कई सूरतें, मुझे चाहता कोई और है
" Mujaffar Warsi "
सर-ए-आईना - आईने के सामने
सर-ए-आईना - आईने के पीछे
चाप - आवाज़
निगराँ - नज़र रखने वाला
sung by : jagjit singh
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मेरे दुःख की कोई दवा न करो
मुझको मुझसे अभी जुदा न करो
नाख़ुदा को ख़ुदा कहा तो फिर
डूब जाओ ख़ुदा ख़ुदा न करो
ये सिखाया है दोस्ती ने हमें
दोस्त बनकर कभी वफ़ा न करो
इश्क़ है इश्क़, ये मजाक नहीं
चंद लम्हों में फैसला न करो
आशिक़ी हो कि बंदगी ' फ़ाकिर '
बेदिली से तो इब्तिदा न करो
" Sudarshan Fakir "
बंदगी - पूजा, प्रार्थना
इब्तिदा - प्रारम्भ
sung by : chitra singh
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फासला तो है मगर, कोई फासला नहीं
मुझसे तुम जुदा सही, दिल से तो जुदा नहीं
आसमां की फ़िक्र क्या, आसमां ख़फ़ा सही
आप ये बताइये, आप तो ख़फ़ा नहीं
कश्तियाँ नहीं तो क्या, हौसले तो पास है
कह दो नाख़ुदाओं से, तुम कोई ख़ुदा नहीं
लीजिये, बुला लिया आपको ख्याल में
अब तो देखिये हमें, कोई देखता नहीं
आइये चराग़-ए-दिल, आज ही जलाएं हम
कैसी कल हवा चले, कोई जानता नहीं
" Shami Karhani "
नाख़ुदा : नाविक, मल्लाह
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आदमी आदमी को क्या देगा
जो भी देगा वही ख़ुदा देगा
मेरा क़ातिल ही मेरा मुन्सिफ़ है
क्या मेरे हक़ में फैसला देगा
ज़िन्दगी को करीब से देखो
इसका चेहरा तुम्हे रुला देगा
हमसे पूछो दोस्ती का सिला
दुश्मनों का भी दिल हिला देगा
इश्क़ का जहर पी लिया ' फाकिर '
अब ख़ुदा भी क्या दवा देगा
" Sudarshan Fakir "
मुन्सिफ़ : न्यायकर्ता
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कोई समझेगा क्या राज-ए-गुलशन
जब तक उलझे ना काँटों में दामन
यक-ब-यक सामने आ न जाना
रुक न जाए कहीं दिल की धड़कन
गुल तो गुल, खार तक चुन लिए हैं
फिर भी खाली है गुलचीं का दामन
अज़मत-ए-आशियाँ बढ़ा दी
बर्क को दोस्त समझूँ कि दुश्मन
" Fana Nizami "
अज़मत-ए-आशियाँ : घर की रौनक
बर्क : बिजली
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मेरा अक्स है सर-ए-आईना, पस-ए-आईना कोई और है
मेरी धड़कनों में है चाप सी, ये भी जुदाई है मिलाप सी
मुझे क्या पता मेरे दिल बता, मेरे साथ क्या कोई और है
न गये दिनों को खबर मेरी, न शरीक-ए-हाल नज़र तेरी
तेरे देस में, मेरे भेस में, कोई और था, कोई और है
वो मेरी तरफ निगराँ रहे, मेरा ध्यान जाने कहाँ रहे
मेरी आँख में कई सूरतें, मुझे चाहता कोई और है
" Mujaffar Warsi "
सर-ए-आईना - आईने के सामने
सर-ए-आईना - आईने के पीछे
चाप - आवाज़
निगराँ - नज़र रखने वाला
sung by : jagjit singh
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मेरे दुःख की कोई दवा न करो
मुझको मुझसे अभी जुदा न करो
नाख़ुदा को ख़ुदा कहा तो फिर
डूब जाओ ख़ुदा ख़ुदा न करो
ये सिखाया है दोस्ती ने हमें
दोस्त बनकर कभी वफ़ा न करो
इश्क़ है इश्क़, ये मजाक नहीं
चंद लम्हों में फैसला न करो
आशिक़ी हो कि बंदगी ' फ़ाकिर '
बेदिली से तो इब्तिदा न करो
" Sudarshan Fakir "
बंदगी - पूजा, प्रार्थना
इब्तिदा - प्रारम्भ
sung by : chitra singh
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फासला तो है मगर, कोई फासला नहीं
मुझसे तुम जुदा सही, दिल से तो जुदा नहीं
आसमां की फ़िक्र क्या, आसमां ख़फ़ा सही
आप ये बताइये, आप तो ख़फ़ा नहीं
कश्तियाँ नहीं तो क्या, हौसले तो पास है
कह दो नाख़ुदाओं से, तुम कोई ख़ुदा नहीं
लीजिये, बुला लिया आपको ख्याल में
अब तो देखिये हमें, कोई देखता नहीं
आइये चराग़-ए-दिल, आज ही जलाएं हम
कैसी कल हवा चले, कोई जानता नहीं
" Shami Karhani "
नाख़ुदा : नाविक, मल्लाह
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आदमी आदमी को क्या देगा
जो भी देगा वही ख़ुदा देगा
मेरा क़ातिल ही मेरा मुन्सिफ़ है
क्या मेरे हक़ में फैसला देगा
ज़िन्दगी को करीब से देखो
इसका चेहरा तुम्हे रुला देगा
हमसे पूछो दोस्ती का सिला
दुश्मनों का भी दिल हिला देगा
इश्क़ का जहर पी लिया ' फाकिर '
अब ख़ुदा भी क्या दवा देगा
" Sudarshan Fakir "
मुन्सिफ़ : न्यायकर्ता
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कोई समझेगा क्या राज-ए-गुलशन
जब तक उलझे ना काँटों में दामन
यक-ब-यक सामने आ न जाना
रुक न जाए कहीं दिल की धड़कन
गुल तो गुल, खार तक चुन लिए हैं
फिर भी खाली है गुलचीं का दामन
अज़मत-ए-आशियाँ बढ़ा दी
बर्क को दोस्त समझूँ कि दुश्मन
" Fana Nizami "
अज़मत-ए-आशियाँ : घर की रौनक
बर्क : बिजली
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