Showing posts with label lyrics of mera kuch saaman. Show all posts
Showing posts with label lyrics of mera kuch saaman. Show all posts

Mera kuch saaman : Gulzar

मेरा कुछ सामान तुम्हारे पास पड़ा है 
हो...सावन के कुछ भीगे भीगे दिन रखे हैं 
और मेरे इक ख़त में लिपटी रात पड़ी है 
वो रात बुझा दो मेरा वो सामां लौटा दो 

पतझड़ में कुछ पत्तों के गिरने की आहट 
कानों में इक बार पहन के लौटाई थी 
पतझड़ की वो शाख़ अभी तक काँप रही है 
वो शाख़ गिरा दो मेरा वो सामां लौटा दो 

एक अकेली छतरी में जब आधे आधे भीग रहे थे 
आधे गीले आधे सूखे, सूखा तो मैं ले आई थी 
गीला मन शायद बिस्तर के पास पड़ा हो 
वो भिजवा दो मेरा वो सामां लौटा दो 

एक सौ सोलह चाँद की रातें एक तुम्हारे काँधे का तिल 
गीली मेहंदी की खुशबू, झूठ-मूठ के शिकवे कुछ 
झूठ-मूठ के वादे भी सब याद करा दूँ 
सब भिजवा दो मेरा वो सामां लौटा दो 

एक इजाज़त दे दो बस जब इसको दफ़नाऊँगी, मैं भी वही सो जाउंगी 

गुलज़ार साब की सबसे बेहतरीन फ़िल्मी रचनाओं में से एक रचना है ये गीत। इजाज़त फिल्म बहुत ही मर्मस्पर्शी कहानी पर आधारित है जो भावनाओं का शिखर छूती है। इस गीत के लिए गुलज़ार को न केवल filmfare पुरस्कार मिला बल्कि राष्ट्रीय पुरस्कार से भी नवाजा गया। जबकि जब ये गीत गुलज़ार, R.d.burman के पास लेके गए तो उन्होंने शिकायत के लहजे में कहा कि आज का अखबार भी ले आओ उसके समाचारों पर भी धुन बना देता हूँ। लेकिन आशा जी ने एक लाइन गाई और उन्हें इसका संगीत बनाने के लिए तैयार किया। आगे इतिहास बन गया। गुलज़ार तो वैसे भी अपने गैर-पारम्परिक बोलों के लिए ही मशहूर है और श्रोता उन्हें इसीलिए सर माथे लेते हैं। एक बात और बताऊँ कोई भी इंसान तन्हाई में इस गाने को सुने तो उसका alltime favourite बन जाएगा और वो उस गाने को सदी के बेहतरीन गानों में शुमार करेगा।